मुजफ्फरपुर-समस्तीपुर बनेंगे जल मॉडल, अब पूरे बिहार में होगा विस्तार

Groundwater recharge gets a big boost in Bihar: मुजफ्फरपुर व समस्तीपुर में कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण संरचनाओं के लिए CGWB, लघु जल संसाधन विभाग और WAPCOS के बीच त्रिपक्षीय MoU। जानें इंजेक्शन वेल तकनीक और पूरी योजना।

मुजफ्फरपुर-समस्तीपुर में बनेंगी कृत्रिम पुनर्भरण संरचनाएं

HIGHLIGHTS

  • तीन संस्थाओं का समझौता, बिहार में होगी भूमिगत जल क्रांति
  • इंजेक्शन वेल तकनीक अब बदलेगी बिहार की जल तस्वीर
  • भूमिगत जल का भंडार भरेगा, जानें कैसे होगा यह चमत्कार
  • सूखे से जंग की तैयारी, बिहार की धरती पिएगा पानी

Groundwater recharge gets a big boost in Bihar: उत्तर बिहार के गहरे जलभृतों (Deep Aquifers) के संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण को वैज्ञानिक गति देने की दिशा में अब ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर जिलों के जलोढ़ (एल्यूवियल) क्षेत्रों में कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है। खास बात यह है कि ये संरचनाएं प्रदर्शनात्मक एवं प्रायोगिक (पायलट) आधार पर विकसित की जाएंगी, ताकि मॉडल सफल होने पर इसे राज्य के अन्य जिलों में भी दोहराया जा सके।

तीन संस्थाओं के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन

06 नवंबर को पटना में केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड (CGWB), पटना, लघु जल संसाधन विभाग, बिहार तथा WAPCOS के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। लघु जल संसाधन विभाग के सचिव श्री चन्द्रशेखर सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यह समझौता अंतिम रूप दिया गया।

इस अवसर पर डॉ. प्रवीण नायक (सदस्य, CGWB मुख्यालय, नई दिल्ली), सुधीर कुमार (उप मुख्य अभियंता, WAPCOS), राजीव रंजन शुक्ला (क्षेत्रीय निदेशक, CGWB पटना), सुनील कुमार (अभियंता प्रमुख, लघु जल संसाधन विभाग) एवं जगन्नाथ पासवान (मुख्य अभियंता, मुजफ्फरपुर) सहित तीनों संस्थानों के वरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।

परियोजना के तहत भूमिका विभाजन इस प्रकार तय हुआ है कि निर्माण कार्य केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड, पटना द्वारा WAPCOS के माध्यम से कराया जाएगा, और निर्माण पूर्ण होने के बाद सभी संरचनाएं संचालन एवं रखरखाव के लिए लघु जल संसाधन विभाग, बिहार को हस्तांतरित कर दी जाएंगी।

इंजेक्शन वेल तकनीक से गहरे जलभृतों तक पहुंचेगा उपचारित जल

योजना का केंद्र-बिंदु है इंजेक्शन वेल (Injection Wells) के जरिए भूमिगत जलभृतों को रिचार्ज करना। इस तकनीक में उपचारित सतही जल को विशेष रूप से निर्मित कुओं के माध्यम से सीधे गहरे जलभृतों में प्रविष्ट कराया जाता है। सामान्य वर्षा-जल संचयन के विपरीत, यह विधि उन परतों तक पानी पहुंचाती है जहां प्राकृतिक पुनर्भरण बेहद धीमा होता है।

सचिव, लघु जल संसाधन विभाग के अनुसार इस पहल का उद्देश्य वैज्ञानिक एवं योजनाबद्ध तरीके से गहरे जलभृतों का विकास कर भू-जल संसाधनों की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

उत्तर बिहार में छिपा है बड़ा जल भंडार

केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड एवं राज्य स्तरीय अध्ययनों से संकेत मिले हैं कि उत्तरी बिहार के जिलों में गहरे जलभृतों में पर्याप्त जल उपलब्धता की संभावनाएं मौजूद हैं। केन्द्रीय भूजल बोर्ड के नवीनतम राष्ट्रीय आकलन के मुताबिक बिहार में वार्षिक निष्कर्षणीय भूजल लगभग 29.31 बीसीएम है और निष्कर्षण स्तर (Stage of Extraction) लगभग 39 प्रतिशत दर्ज किया गया है, यानी राज्य “सेफ” श्रेणी में है। लेकिन गंगा-संगम प्रणाली के जलोढ़ क्षेत्रों में कुछ गहरे जलभृतों में आर्सेनिक जैसी गुणवत्ता संबंधी चुनौतियों को देखते हुए सुरक्षित पेयजल स्रोतों का विस्तार अहम बन जाता है — और यहीं कृत्रिम पुनर्भरण गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

भू-जल पुनर्भरण के मुख्य चरण

कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण (Artificial Groundwater Recharge) एक ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसके तहत नदी या तालाब जैसे स्रोतों से लिए गए सतही जल का निस्पंदन एवं उपचार करके विशेष कुओं के जरिए गहरे जलभृत में डाला जाता है, जिससे भूमिगत भंडारण में पानी की वाष्पीकरण हानि नगण्य रहती है और सूखे मौसम में यही जल पेयजल व सिंचाई के काम आता है; केंद्र सरकार की अटल भूजल योजना और जल शक्ति अभियान–”Catch the Rain” के अनुरूप सीजीडब्ल्यूबी (CGWB) ने भी इन संरचनाओं के लिए मानकीकृत दिशानिर्देश जारी किए हैं।

बिहार को मिलने वाले मुख्य लाभ

बिहार को मिलने वाले फायदों में गिरते भू-जल स्तर में वैज्ञानिक सुधार, पेयजल की दीर्घकालिक एवं गुणवत्तायुक्त उपलब्धता और जलवायु परिवर्तन व सूखे के प्रभाव से निपटने की बेहतर क्षमता शामिल है, जिसके तहत पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने पर इसका अन्य जलोढ़ जिलों में विस्तार किया जा सकेगा और स्थानीय स्तर पर तकनीकी अनुभव के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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