“हमारी सरकार का मकसद साफ है कि गांव का मरीज इलाज के लिए शहरों के चक्कर न काटे। स्वास्थ्य सुविधाएं अब मरीज के दरवाजे तक पहुंचेंगी,” यह बात बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने राज्य में स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार को लेकर कही। स्वास्थ्य मंत्री निशांत के इस बयान के बाद ही बिहार स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा फैसला अमल में लाते हुए राज्य के विभिन्न जिलों में बनकर तैयार 135 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) को 30 बेड वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के दर्जे में उत्क्रमित कर दिया है। इस संबंध में विभाग की ओर से आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
बिहार स्वास्थ्य सेवा में ऐतिहासिक बदलाव
बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर यह फैसला उन करोड़ों ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत की खबर है, जिन्हें अब तक सामान्य इलाज के लिए भी दूर-दराज के जिला अस्पतालों या पटना-मुजफ्फरपुर जैसे बड़े शहरों तक का रास्ता तय करना पड़ता था। नए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों के भर्ती रखने के लिए 30 बेड की व्यवस्था होगी, जबकि जरूरी चिकित्सा उपकरण, दवाओं और स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता को भी चरणबद्ध तरीके से मजबूत किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इन केंद्रों को उत्क्रमित करने के बाद वहां केवल प्राथमिक इलाज तक सीमित नहीं रहा जाएगा। बल्कि प्रसूति सेवा, पैथोलॉजी जांच, आपातकालीन उपचार और विशेषज्ञ परामर्श जैसी सुविधाएं भी स्थानीय स्तर पर विकसित की जाएंगी। इससे बिहार की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को एक नई मजबूती मिलेगी।
सात निश्चय-3 के तहत बनेंगे विशिष्ट चिकित्सा केंद्र
मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठित सात निश्चय-3 योजना के तहत इन सभी 135 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अंतर्गत हर केंद्र पर तीन विशेष विभागों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद सृजित किए गए हैं—
- हड्डी रोग (ऑर्थोपेडिक) विशेषज्ञ — फ्रैक्चर, जोड़ों के दर्द और हड्डी संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए
- नेत्र रोग (आई स्पेशलिस्ट) विशेषज्ञ — आंखों की जांच, मोतियाबिंद सहित अन्य बीमारियों के उपचार के लिए
- नाक, कान और गला (ईएंटी) विशेषज्ञ — सुनने, बोलने और सांस संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए
यानी अब गांव के मरीजों को हड्डी टूटने, आंखों की रोशनी या सुनने की समस्या जैसी परेशानियों में अपने अंचल के अस्पताल ही जाना होगा, जहां उन्हें विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं मिल सकेंगी।

हर केंद्र में 47 पद निर्धारित, स्टाफ की भी पकड़ मजबूत
अधिसूचना के मुताबिक, इन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के सुचारु संचालन के लिए प्रत्येक संस्थान में 24 प्रकार के कुल 47 पद निर्धारित किए गए हैं। इनमें उपाधीक्षक से लेकर विशेषज्ञ चिकित्सक, सामान्य चिकित्सक, जीएनएम नर्स, सीनियर फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, फिजियोथेरेपिस्ट और अस्पताल प्रबंधन से जुड़े अन्य पद शामिल हैं। इसके अलावा, पहले से सृजित डेंटल हाइजीनिस्ट और ड्रेसर के एक-एक पद भी इस ढांचे में शामिल रहेंगे।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि स्टाफ की यह पूरी तस्वीर तैयार होने से केंद्रों में भ्रमणशील डॉक्टरों की समस्या पर भी लगाम लगेगी और मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा। यह पहल बिहार स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे संस्थागत सुधार अभियान की कड़ी मानी जा रही है।
राज्य के सभी 38 जिलों को मिलेगा लाभ
135 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की यह सूची राज्य के सभी 38 जिलों को कवर करती है। पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, भागलपुर, अररिया, औरंगाबाद, बेगूसराय, भोजपुर, गोपालगंज, कटिहार, मधुबनी, समस्तीपुर और वैशाली समेत हर जिले के विभिन्न प्रखंडों स्थित स्वास्थ्य केंद्र इसमें शामिल हैं। यानी चाहे सीमांचल हो, मगध हो या तिरहुत अंचल — हर क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों के लोग इस योजना का लाभ उठा पाएंगे।
जिला अस्पतालों पर भी घटेगा मरीजों का बोझ
विशेषज्ञों की मानें तो इन केंद्रों के सक्रिय होने से जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों पर मरीजों का दबाव काफी कम होगा। फिलहाल सामान्य बुखार, चोट या जांच जैसी छोटी-मोटी परेशानियों में भी हजारों मरीज रोज जिला अस्पतालों में पहुंचते हैं। जब उन्हें स्थानीय CHC में ही विशेषज्ञ परामर्श, जांच और भर्ती रखने की सुविधा मिलेगी, तो बड़े अस्पतालों में सिर्फ गंभीर मामले ही पहुंचेंगे। इससे वहां इलाज की गुणवत्ता में भी सुधार की उम्मीद है। इसके साथ ही मरीजों का इलाज पर खर्च भी घटेगा, क्योंकि अब उन्हें इलाज के अलावा यातायात, भोजन और ठहरने पर होने वाला अतिरिक्त खर्च नहीं उठाना पड़ेगा।
सरकार का लक्ष्य: गांव तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा
स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने स्पष्ट किया है कि बिहार सरकार ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को लगातार आधुनिक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तब्दील होना केवल कागजी बदलाव नहीं, बल्कि वहां विशेषज्ञ सेवाओं, बेड की संख्या और मानव संसाधन का वास्तविक विस्तार है। आने वाले समय में इन केंद्रों में जरूरी मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति और नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज गति से आगे बढ़ाई जाएगी।
























