A Run for HIV Awareness: बिहार की राजधानी पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान इस बार किसी खेल जलसे से कहीं बड़े मिशन का गवाह बना। HIV/AIDS के प्रति जागरूकता फैलाने और संक्रमित लोगों से जुड़े सामाजिक भेदभाव को खत्म करने के उद्देश्य से यहां नेशनल रेड रन 4.0 (National Red Run 4.0) का भव्य आयोजन हुआ।
राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) के मार्गदर्शन में बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति (BSACS) की मेजबानी में हुए इस चौथे संस्करण में देश के 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से धावक, अधिकारी, खिलाड़ी और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि पहुंचे। हाथ में लाल रिबन लिए उमड़ी भीड़ ने साफ संदेश दिया कि HIV के खिलाफ यह लड़ाई अब पूरे देश की साझा लड़ाई बन चुकी है।
10 किमी दौड़ और 2 किमी वॉकथॉन: जोश के साथ था संदेश भी
इस राष्ट्रीय आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण 10 किलोमीटर की प्रतियोगिता रही, जिसमें लगभग 250 प्रतिभागियों ने पदक जीतने के सपने के साथ दमखम दिखाया। दूसरी ओर, 2 किलोमीटर के वॉकथॉन में करीब 1,000 लोगों ने उत्साह से शिरकत की।
यह वॉकथॉन मुकाबले से ज्यादा एक अभियान था, जिसका संदेश बिल्कुल साफ था — HIV जांच कराना शर्म की बात नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी है। अलग-अलग उम्र और पृष्ठभूमि के लोग यहां एक ही पंक्ति में चलते नजर आए, जो आयोजन के असली संदेश यानी ‘समानता और सम्मान’ को दर्शाता है।
रेड रन क्यों? जानिए इस दौड़ का असली मकसद और इतिहास
दुनिया भर में लाल रिबन (Red Ribbon) HIV/AIDS से जूझ रहे लोगों के प्रति सहानुभूति और समर्थन का सबसे बड़ा प्रतीक है। इसी प्रतीक से प्रेरित होकर NACO ने ‘रेड रन’ की शुरुआत की, ताकि दौड़ के जरिए युवाओं तक HIV से बचाव की सही जानकारी पहुंचे। पिछले संस्करणों की मेजबानी चंडीगढ़, हैदराबाद और भुवनेश्वर कर चुके हैं और अब चौथा आयोजन बिहार के हिस्से में आया — जो राज्य के लिए गर्व की बात है।
स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि बोले- युवाओं की सोच ही बदलेगी सोसाइटी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने युवाओं को HIV जागरूकता अभियान की धुरी बताया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में लगातार चल रहे जागरूकता अभियानों, बेहतर उपचार सुविधाओं और निरंतर प्रयासों के चलते HIV नियंत्रण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। समाज की सोच भी बदल रही है — अब संक्रमित व्यक्ति के प्रति नजरिया सकारात्मक हो रहा है और दवाइयों की उपलब्धता ने नई उम्मीद जगाई है।
सचिव ने विशेष रूप से मां से बच्चे को होने वाले HIV संक्रमण की रोकथाम पर जोर दिया और इसे आने वाले समय का बड़ा लक्ष्य बताया। उन्होंने समझाया कि HIV केवल यौन संपर्क से ही नहीं, बल्कि संक्रमित रक्त जैसे अन्य माध्यमों से भी फैल सकता है, इसलिए समाज के हर वर्ग तक सही जानकारी पहुंचाना जरूरी है। इस अवसर पर उन्होंने BSACS प्रोजेक्ट डायरेक्टर, उनकी पूरी टीम और सहयोगी संस्थानों को आयोजन की सफलता के लिए बधाई दी।
NACO और UNICEF प्रतिनिधियों ने दिया जांच कराने का संदेश
NACO की डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. तान्जिन डिकिड ने सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि HIV के प्रति सही जानकारी पहुंचाने में युवाओं की सहभागिता सबसे असरदार रास्ता है। उनके मुताबिक, ऐसे बड़े आयोजन समाज में फैली भ्रांतियों और भेदभाव की दीवार को तोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं।
वहीं, यूनिसेफ की फील्ड ऑफिसर मोनिका नेल्सन ने एक जरूरी सलाह दी — हर व्यक्ति को समय-समय पर अपनी HIV जांच करानी चाहिए। उन्होंने खासकर गर्भवती महिलाओं से समय पर जांच कराने की अपील की, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान संक्रमण का पता चल जाए तो उचित इलाज और देखभाल से मां से बच्चे को होने वाले खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है।
BSACS प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुमित कुमार: पूरा देश एकजुट
बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुमित कुमार ने 10KM दौड़ और वॉकथॉन में बड़ी संख्या में सहभागिता को देश की एकजुटता का प्रमाण बताया। उन्होंने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए अधिकारियों व प्रतिनिधियों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में HIV जागरूकता अभियान को और गति दें।
‘पंचायत’ फेम अशोक पाठक समेत ये हस्तियां रहीं मौजूद
आयोजन में सेलिब्रिटी प्रेजेंस ने जोश दोगुना कर दिया। हिट वेब सीरीज ‘पंचायत’ में विनोद का किरदार निभाने वाले अभिनेता अशोक पाठक, अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के धावक पियूष राज तथा अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट शैलेश कुमार विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। खेल और मनोरंजन जगत के इन चेहरों ने युवाओं को HIV जागरूकता का संदेश दिया।
इस अवसर पर BSACS के संयुक्त निदेशक (आईईसी) मनोज कुमार सिन्हा, अपर परियोजना निदेशक एन.के. गुप्ता और सहायक निदेशक (युवा) आलोक सिंह समेत स्वास्थ्य विभाग और बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति के कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
HIV के खिलाफ भारत की लड़ाई: आंकड़े कहते हैं कहानी बदल रही है
भारत में HIV/AIDS को लेकर तस्वीर पिछले एक दशक में काफी बदली है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुमानों के मुताबिक, देश में लगभग 25 लाख लोग HIV के साथ जीवन यापन कर रहे हैं और 2010 की तुलना में नए संक्रमणों में लगभग 44 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। ART केंद्रों पर मुफ्त इलाज और बढ़ती जांच सुविधाओं ने इस बीमारी को डर से निकालकर ‘संभाले हुए स्वास्थ्य मुद्दे’ की श्रेणी में लाया है।
लेकिन चुनौती अब भी बरकरार है — खासकर सामाजिक भेदभाव, देर से जांच और मां से बच्चे को होने वाले संक्रमण के रूप में। गौरतलब है कि हर साल 1 दिसंबर को वर्ल्ड एड्स डे मनाया जाता है, और इसी भावना को आगे बढ़ाता है नेशनल रेड रन 4.0। जांच कराइए, इलाज जारी रखिए और किसी के साथ भेदभाव न करें — यही इस पूरे अभियान की रीढ़ है।


























