वेस्टइंडीज के खिलाफ चौथे टी20 मुकाबले में भारत को 24 रन से हार का सामना करना पड़ा। इस जीत के साथ मेजबान टीम ने पांच मैचों की सीरीज 2-2 से बराबर कर ली। भारत के सामने 248 रन का बड़ा लक्ष्य था और एक समय टीम अच्छी स्थिति में नजर आ रही थी। लेकिन लगातार विकेट गिरने से लक्ष्य का पीछा मुश्किल होता गया।
मैच के बाद भारतीय सलामी बल्लेबाज संजू सैमसन ने बताया कि उनके हिसाब से मुकाबले का निर्णायक मोड़ 17वां ओवर था। इसी ओवर में तिलक वर्मा आउट हुए। सैमसन के मुताबिक, तिलक और नीतीश कुमार रेड्डी की साझेदारी के दौरान भारत लक्ष्य के करीब पहुंचने की कोशिश कर रहा था। तिलक का विकेट गिरने के बाद टीम पर दबाव बढ़ा और मुकाबला वेस्टइंडीज के पक्ष में चला गया।
संजू सैमसन की तेजतर्रार पारी
248 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को संजू सैमसन ने आक्रामक शुरुआत दिलाई। उन्होंने महज 20 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और 23 गेंदों पर 56 रन बनाकर आउट हुए। उनकी पारी में छह चौके और चार छक्के शामिल थे। कीमो पॉल की गेंद पर शिमरन हेटमायर ने उनका कैच पकड़ा।
सैमसन के आउट होने के बाद भारत को पारी की रफ्तार बनाए रखने के लिए दूसरे बल्लेबाजों से बड़ी साझेदारी की जरूरत थी। हालांकि, शुरुआती तेज रन बनाने के बावजूद टीम नियमित अंतराल पर विकेट गंवाती रही। सैमसन इस मुकाबले में भारत की ओर से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे।
तिलक वर्मा का विकेट क्यों बना टर्निंग पॉइंट?
सैमसन ने मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बल्लेबाजों को शुरुआत से ही तेजी से रन बनाने थे। उन्होंने माना कि टीम पारी को संभालने के लिए ज्यादा समय नहीं ले सकती थी। तिलक वर्मा और नीतीश कुमार रेड्डी जब क्रीज पर थे, तब भारत रन गति बनाए रखने के साथ मुकाबले में बना हुआ था।
सैमसन के अनुसार, उस समय भारतीय टीम को प्रति ओवर करीब 12 से 13 रन बनाने की जरूरत थी। यह चुनौतीपूर्ण स्थिति जरूर थी, लेकिन तिलक और रेड्डी दबाव में अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे। तिलक के आउट होने से साझेदारी टूटी और लक्ष्य का पीछा करने की जिम्मेदारी बाकी बल्लेबाजों पर आ गई।
सैमसन ने कहा, “हमें लगभग 250 रन का लक्ष्य हासिल करना था, इसलिए पारी को संभालने का ज्यादा मौका नहीं था। पहली गेंद से आक्रामक खेलना जरूरी था और सभी ने यही करने की कोशिश की।
जब तक तिलक और रेड्डी बल्लेबाजी कर रहे थे, हम मैच में बने हुए थे। निर्णायक मोड़ तिलक का विकेट था। उस समय हम लक्ष्य का पीछा कर रहे थे और मुकाबले को अपने पक्ष में करने के करीब थे।”
उनकी बात से साफ है कि भारत की हार सिर्फ एक विकेट की वजह से नहीं हुई, लेकिन तिलक का आउट होना उस चरण में बड़ा झटका था। साझेदारी टूटने के बाद रन बनाने का दबाव बढ़ा और वेस्टइंडीज के गेंदबाजों को बाकी बल्लेबाजों पर नियंत्रण बनाने का मौका मिला।
शाई होप की बल्लेबाजी पर सैमसन ने क्या कहा?
सैमसन ने वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप की भी तारीफ की। इस दौरे में वेस्टइंडीज की जीतों में होप की अहम भूमिका रही है। उपलब्ध मैच विवरण के मुताबिक, उन्होंने तीनों जीत में पारी को संभालते हुए बड़ा योगदान दिया और हर बार शतक बनाया।
भारतीय टीम होप को रोकने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपना रही है। सैमसन ने कहा कि टीम बैठकों में इस पर चर्चा हुई है और पिछले मैच में कुछ योजनाएं काम भी आईं। उन्होंने अर्शदीप सिंह का जिक्र करते हुए बताया कि गेंदबाज ने स्टंप्स के पास से होप को आउट करने में सफलता हासिल की थी।
सैमसन ने होप की बल्लेबाजी की सराहना करते हुए कहा कि वह बेहतरीन क्रिकेटिंग शॉट खेल रहे हैं और उनके प्रदर्शन का सम्मान किया जाना चाहिए। विपक्षी कप्तान की लगातार अच्छी बल्लेबाजी ने भारत के गेंदबाजों के सामने चुनौती बढ़ाई है।
सीरीज में अब बराबरी की टक्कर
चौथे टी20 में जीत के बाद पांच मैचों की सीरीज 2-2 से बराबर हो गई है। अब निर्णायक मुकाबले में दोनों टीमों के पास सीरीज जीतने का मौका होगा। भारत के लिए अहम होगा कि वह बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय साझेदारियां बनाए और विकेट गिरने के बाद भी रन गति बनाए रखे।
संजू सैमसन की तेज शुरुआत ने दिखाया कि भारतीय बल्लेबाज वेस्टइंडीज के बड़े स्कोर को चुनौती दे सकते हैं। लेकिन इस मैच का सबक यह भी रहा कि आक्रामक शुरुआत के बाद मध्यक्रम में साझेदारी बनाए रखना जरूरी है। तिलक वर्मा और नीतीश कुमार रेड्डी ने भारत को मुकाबले में बनाए रखा, मगर तिलक के आउट होने के बाद टीम उस लय को कायम नहीं रख सकी।



























