US Iran Attack: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केशम द्वीप पर हमले की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने सोमवार को इस द्वीप को निशाना बनाया। इससे पहले ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने इलाके में कई जोरदार धमाकों की जानकारी दी थी। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चिंता पैदा कर दी है। खास बात यह है कि यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ संभावित समझौते की बात कर रहे हैं।
केशम द्वीप पर अमेरिका का हमला, कहां-कहां हुए धमाके?
अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के केशम द्वीप पर हमला किया है। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि हाल के हफ्तों में ईरान के खिलाफ की गई सीमित सैन्य कार्रवाइयों में यह ताजा हमला है।
वहीं, ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA ने इससे पहले केशम द्वीप पर कई विस्फोट होने की खबर दी थी। हालांकि, हमले में कितना नुकसान हुआ और किन ठिकानों को निशाना बनाया गया, इसकी पूरी जानकारी तत्काल सामने नहीं आई।
केशम द्वीप फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के बेहद करीब स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे सैन्य और रणनीतिक लिहाज से काफी अहम बनाती है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्तों में शामिल है। यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
छोटे हमलों के जरिए ईरान पर दबाव बना रहा अमेरिका?
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका हाल के दिनों में ईरान के खिलाफ सीमित स्तर पर सैन्य कार्रवाई कर रहा है। इन ऑपरेशनों को बड़े सैन्य अभियान की तरह सार्वजनिक नहीं किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन इन हमलों को छोटे दायरे में रखकर यह संदेश देने से बचना चाहता है कि वह ईरान के खिलाफ दोबारा बड़े पैमाने पर युद्ध शुरू करने जा रहा है।
हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की ओर से इस रिपोर्ट पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई। ऐसे में हमले की पूरी परिस्थितियों और उसके परिणामों को लेकर अभी और जानकारी का इंतजार है।
मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर बड़ा हमला करेंगे ट्रंप?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज कर सकते हैं?

सोमवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान पर दोबारा बड़े हमले की संभावना को लेकर पूछे गए सवालों पर इनकार में जवाब दिया। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह मंगलवार को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर हमला करने की योजना बना रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि नहीं।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की संभावना अभी खत्म नहीं हुई है। उनके इस बयान से कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जरूर बनी है, लेकिन दूसरी तरफ सैन्य गतिविधियों की खबरों ने स्थिति को उलझा दिया है।
28 फरवरी से जारी है अमेरिका-ईरान संघर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच लगातार तनाव और जवाबी कार्रवाइयों का सिलसिला देखने को मिला।
बीच में संघर्ष रोकने के लिए युद्धविराम और बातचीत की कोशिशें भी हुईं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर विवाद, ईरान का परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे अब भी दोनों देशों के बीच तनाव की प्रमुख वजह बने हुए हैं।
फिलहाल केशम द्वीप पर हमले की खबर ने अमेरिका-ईरान संबंधों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ट्रंप प्रशासन सैन्य दबाव बढ़ाता है या बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ता है।

























