बिहार में पहली बार IGIMS में सफल हुआ लिवर ट्रांसप्लांट

IGIMS पटना में बिहार सरकार की आर्थिक मदद से पहला सफल लिवर प्रत्यारोपण संपन्न हुआ। 16 वर्षीय मोनू कुमार के अंगदान से तीन मरीजों को मिली नई जिंदगी। जानें ₹15 लाख सहायता और अंगदान की पूरी प्रक्रिया।

सरकार देगी 15 लाख, बिहार में अब लिवर ट्रांसप्लांट मुमकिन

HIGHLIGHTS

  • 16 साल के बच्चे का अंगदान, तीन जिंदगियां लौट आईं
  • 19 वर्षीय युवती को नया लिवर, IGIMS ने लिखा इतिहास
  • दिल्ली-चेन्नई का सफर खत्म, अब बिहार में होगा ट्रांसप्लांट
  • 16 वर्षीय मोनू का अंगदान, तीन जिंदगियों के बने मसीहा

IGIMS Liver Transplant: बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं के इतिहास में सुनहरा अध्याय जुड़ गया है। राजधानी स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS, पटना) में राज्य सरकार की आर्थिक सहायता से पहली बार लिवर प्रत्यारोपण की अत्यंत जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हुई है। 19 वर्षीय एक युवती को मस्तिष्क मृत दाता का लिवर प्रत्यारोपित किया गया, जिससे उसे नया जीवन मिला। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद IGIMS की चिकित्सकीय टीम ने स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत से उनके कार्यालय कक्ष में शिष्टाचार मुलाकात की और सरकार के प्रति आभार जताया।

बिहार में पहली बार राज्य सरकार के खर्चे पर संपन्न हुआ लिवर ट्रांसप्लांट

चिकित्सा विज्ञान में लिवर प्रत्यारोपण (लिवर ट्रांसप्लांट) को सबसे चुनौतीपूर्ण और तकनीकी रूप से जटिल सर्जरी माना जाता है। अब तक बिहार के मरीजों को ऐसी सर्जरी के लिए दिल्ली, चेन्नई या हैदराबाद जैसे महानगरों का रुख करना पड़ता था, जहां खर्च कई लाख रुपये तक पहुंच जाता था। IGIMS में इस सर्जरी के सफल होने से साबित हो गया है कि राज्य के सरकारी अस्पताल भी देश के प्रमुख विशेषज्ञ केंद्रों जैसी उन्नत चिकित्सा उपलब्ध करा सकते हैं — वह भी बिहार सरकार की वित्तीय मदद से।

NOTTO, SOTTO और ROTTO के समन्वय से पूरी हुई अंगदान की प्रक्रिया

इस सफल प्रत्यारोपण के पीछे अंगदान नेटवर्क का तेज और प्रभावी समन्वय रहा। SOTTO बिहार, NOTTO दिल्ली और ROTTO कोलकाता की टीमों ने मिलकर अंग का आवंटन, परिवहन और प्रत्यारोपण की पूरी श्रृंखला घंटों के भीतर संपन्न कराई। मोनू कुमार की दो किडनी से दो अन्य मरीजों का किडनी प्रत्यारोपण भी हुआ — एक मरीज की सर्जरी IGIMS पटना में, जबकि दूसरे मरीज की AIIMS पटना में सफलतापूर्वक की गई। यानी एक ही अंगदान से तीन जरूरतमंदों को नया जीवन मिला।

दुःख की घड़ी में लिया गया महादान का फैसला

इस पूरी कहानी के नायक हैं 16 वर्षीय किशोर मोनू कुमार, जिन्हें मस्तिष्क मृत घोषित होने के बाद उनके परिजनों ने गहरे सदमे के बीच अंगदान का साहसिक निर्णय लिया। स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि मोनू के परिवार का यह मानवीय और दूरदर्शी फैसला पूरे बिहार समेत देश के लिए प्रेरणादायक है। उनके इस महादान ने न केवल तीन परिवारों में खुशियां लौटाईं, बल्कि राज्य में अंगदान के प्रति जागरूकता की नई मिसाल भी पेश की है।

स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने IGIMS की पूरी चिकित्सकीय टीम को इस सराहनीय उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई दी। मुलाकात में बिहार के अन्य मेडिकल कॉलेजों में अंग प्रत्यारोपण सुविधा के विस्तार पर विस्तार से विमर्श हुआ। इसके लिए आवश्यक चिकित्सकीय बुनियादी ढांचे, विशेषज्ञ टीमों और संस्थागत क्षमता के विकास पर रणनीति बनाई गई, ताकि आने वाले समय में PMCH, पटना समेत अन्य जिला अस्पतालों में भी ऐसी जटिल सर्जरियां संभव हो सकें। इस अवसर पर स्वास्थ्य सचिव श्री कुमार रवि भी मौजूद रहे और टीम के योगदान की सराहना की।

लिवर प्रत्यारोपण पर मिलेगी ₹15 लाख की सरकारी सहायता

बिहार सरकार ने लिवर प्रत्यारोपण के लिए प्रति मरीज ₹15 लाख तक की आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य साफ है — कोई भी जरूरतमंद मरीज आर्थिक तंगी की वजह से जीवनरक्षक इलाज से वंचित न रह जाए। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य में आधुनिक चिकित्सा अवसंरचना के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम है और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को अब बेहतर इलाज अपने ही राज्य में मिलेगा।

मस्तिष्क मृत व्यक्ति का लिवर, किडनी, हृदय, फेफड़े और अन्य अंग उन मरीजों को नया जीवन दे सकते हैं, जो वर्षों से अंग के इंतजार में होते हैं। बिहार में मोनू कुमार का मामला इस बात का सबूत बन गया है कि एक परिवार का सही फैसला कितनी जिंदगियां बदल सकता है। स्वास्थ्य विभाग अब अंगदान को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान भी तेज करने की तैयारी में है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now