SIR Electoral Roll: SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) के बाद अब मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग (ECI) पूरी तरह सतर्क हो गया है। आयोग चाहता है कि इस बार किसी भी पात्र नागरिक का नाम वोटर लिस्ट से बाहर न रहे और वहीं दूसरी तरफ लिस्ट में किसी भी तरह की गड़बड़ी—चाहे वह फर्जी नाम हो या डुप्लिकेट एंट्री—अंदर न घुसे। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ECI ने प्रदेशों के चुनावी अधिकारियों को निगरानी कड़ी करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
सख्त निगरानी क्यों बनी सबसे बड़ी प्राथमिकता?
चुनाव आयोग की मंशा साफ है—मतदाता सूची की शुद्धता ही लोकतंत्र की नींव है। SIR मतदाता सूची की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि जिन मतदाताओं के नाम किसी कारण से छूट गए हों, उन्हें फिर से जोड़ा जाए और उन एंट्रियों को हटाया जाए जो दोहराव वाली या असलियत में मौजूद नहीं हैं।
इसके लिए आयोग ने सभी स्तर के अधिकारियों को कहा है कि वे बूथ स्तर तक निगरानी बनाए रखें। बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से लेकर जिला चुनाव अधिकारी तक—सभी को यह सुनिश्चित करना होगा कि शिकायत या आवेदन करने वाले हर मतदाता को समय पर सुनवाई मिले और कोई भी नाम बिना जांच-पड़ताल के जोड़ा या हटाया न जाए।
20 राज्यों और UT में पूरा हुआ एसआईआर का दायरा
चुनाव आयोग के अनुसार, अब तक बिहार और पश्चिम बंगाल समेत कुल 20 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यह आंकड़ा इस बात का सबूत है कि देशभर में वोटर लिस्ट को लेकर बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चल चुका है।
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले एसआईआर को लेकर जो बहस छिड़ी थी, उसके बाद पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में भी इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों और आम नागरिकों की निगाहें टिकी हुई हैं। ऐसे में आयोग का यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे यह मैसेज जाता है कि पुनरीक्षण का मकसद किसी को वोटिंग से वंचित करना नहीं, बल्कि सूची को सटीक बनाना है।
छूटे मतदाताओं के लिए खुला रास्ता
मतदाता सूची का निरंतर अद्यतन (Continuous Update) उस स्थिति का समाधान है जब पात्र लोगों के नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं हो पाते, जिसके तहत 18 साल की उम्र पूरी करने वाले नए मतदाता आवेदन दे सकते हैं, छूटे हुए मतदाता फॉर्म भरकर अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं, गलत जानकारी वाली एंट्रियों में सुधार कराया जा सकता है, और अपना पता बदलवाने के लिए शिफ्टिंग करने वाले मतदाता भी आवेदन कर सकते हैं।
चुनाव आयोग ने देशभर के सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को निर्देश दिया है कि वे इस प्रक्रिया को आसान बनाएं। ऑनलाइन पोर्टल से लेकर बूथ स्तर तक—हर माध्यम से मतदाताओं तक पहुंच बनाई जाए ताकि किसी को कागजी कार्यवाही की उलझन में अपना वोटिंग अधिकार गंवाना न पड़े।
हलफनामे में ECI ने दिए कार्यप्रणाली पर स्पष्टीकरण
इस बीच चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे के जरिए एक और विवादित मुद्दे पर भी पर्दा उठाया है। दरअसल, कार्य आवंटन और एक वरिष्ठ अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों पर ECI ने अपना पक्ष साफ किया है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को लिखा गया जो पत्र चर्चा में है, वह चुनाव आयोग की किसी नीतिगत बात या उसके आईटी विभाग से संबंधित किसी मामले को लेकर नहीं था। बल्कि वह पत्र केवल एक ऐसे अधिकारी से जुड़ा था जो प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर आयोग में कार्यरत है और उसके कामकाज से जुड़ा था।
दोनों चुनाव आयुक्तों के निर्देश के बाद आदेश रुके
ECI के अनुसार, संबंधित अधिकारी की ओर से जारी किए गए कार्य पुनर्वितरण के आदेशों को दोनों चुनाव आयुक्तों के निर्देश मिलने के बाद लागू नहीं किया गया था। यानी आयोग का तर्क है कि यह पूरा मामला आंतरिक कामकाज का था और इसमें किसी भी तरह की नीतिगत दखलअंदाजी या अनियमितता का सवाल ही नहीं उठता।
यह स्पष्टीकरण इसलिए मायने रखता है क्योंकि इस मुद्दे पर पहले आयोग की आपसी कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। हलफनामे के जरिए ECI ने यह भी दर्ज किया है कि आयोग के भीतर कार्य आवंटन स्वतंत्र रूप से और संवैधानिक ढांचे के अनुसार किया जाता है।

























