Harish Dwivedi on Akhilesh Yadav’s statement: उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर तीखी भाषा का दौर शुरू हो गया है। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी अपने गृह क्षेत्र बस्ती पहुंचे, जहां मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को बिना किसी लिहाज के आड़े हाथों ले लिया। उनके सबसे चर्चित बयान यह रहा कि अखिलेश यादव कभी अपने कर्म या अपनी पहचान से नहीं, बल्कि ‘बाप के नाम पर’ मुख्यमंत्री बने थे। यह बयान आते ही सपा और भाजपा के बीच पुरानी अकसराहट एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है।
‘मुलायम के नाम पर चुनाव, विरासत बेटे को सौंप दी’
बस्ती में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हरीश द्विवेदी ने कहा कि अखिलेश यादव एक बार मुख्यमंत्री जरूर बने, लेकिन वे अपने कर्म या अपने नाम पर नहीं, बल्कि अपने बाप के नाम पर बने थे। चुनाव स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव की पहचान पर लड़ा गया और चुनाव के बाद कमान सीधे बेटे को सौंप दी गई।
भाजपा नेता हरीश द्विवेदी ने यह भी कहा कि मुलायम सिंह जमीन से उठकर, संघर्ष की राह पकड़कर राजनीति की ऊंचाइयों तक पहुंचे थे, जबकि अखिलेश यादव को पहला बड़ा मौका भी पिता की वजह से मिला। उनका आरोप था कि पिता की विरासत को संभालने में अखिलेश नाकाम रहे और जब से वे पार्टी की कमान संभाले हैं, सपा लगातार चुनावी हार का सिलसिला झेल रही है।
अखिलेश के ‘चुनाव नहीं लड़ूंगा’ बयान पर बीजेपी का पलटवार
हरीश द्विवेदी ने अखिलेश यादव के उस बयान पर भी निशाना साधा, जिसमें सपा प्रमुख ने खुद को “चुनाव लड़े बिना सीएम बनने वाला नेता” बताया था। द्विवेदी ने इसे अपनी कमजोरियां छिपाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें डर है कि अगर वे चुनाव लड़ेंगे तो हार जाएंगे, छीछालेदर होगी और सारे प्रदेश को उनका असली जनाधार पता चल जाएगा। यह उनकी कोरी कल्पना है। इसके जरिए वे यह दिखाना चाहते हैं कि सपा मैदान में है ही नहीं यानी वे चुनाव से भाग रहे हैं।
‘ओवर कॉन्फिडेंस नहीं, असल में हार का डर’
हरीश द्विवेदी ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ओवर कॉन्फिडेंस के चक्कर में नहीं हैं, बल्कि उन्हें अंदर से यह पता है कि सपा की सरकार बनने का कोई मौका नहीं है, इसीलिए वे पहले से मैदान छोड़ने की तैयारी में हैं। उन्होंने दावा किया कि धरातल पर सपा का कुछ नहीं बचा है और सत्ता के दौर में गरीबों, किसानों और मजदूरों के साथ हुए आचरण को जनता भूल नहीं पाई है। साथ ही उन्होंने दोहराया है कि फिर इस बार भी भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ उत्तर प्रदेश में सरकार बनाएगी और लगातार जीतती आ रही भाजपा तीसरी बार भी सत्ता में आएगी।
पदयात्रा का मकसद क्या? 800 स्थानों पर भाजपा का बड़ा प्लान
बस्ती में हरीश द्विवेदी ने भाजपा की पदयात्रा की रणनीति भी खोलकर बताई। अखिलेश यादव के इस आरोप को खारिज किया कि पदयात्रा से दुकानदार परेशान हो रहे हैं। हरीश द्विवेदी ने कहा है कि पदयात्रा का उद्देश्य कांग्रेस और इंडी गठबंधन के दावों का जवाब देना और सच्चाई जनता तक पहुंचाना है। अब तक देशभर में 161 स्थानों पर पदयात्रा संपन्न हो चुकी है और कल तक यह आंकड़ा 180 तक पहुंचने की उम्मीद है।
दीपावली से पहले और बाद दो चरणों में चलने वाली इस अभियान का लक्ष्य है — हर प्रशासनिक जिले के बड़े शहरों में 4–5 पदयात्राएं निकालकर कुल 800 स्थानों तक इसे पहुंचाना।हर आयोजन में व्यापारियों और छात्रों की असुविधा से बचने की पूरी प्लानिंग की जाती है।
SIR पर भड़के द्विवेदी
पदयात्रा के जरिए भाजपा का मुख्य संदेश SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) वोटर लिस्ट को लेकर भी है। हरीश द्विवेदी ने कहा कि वोटर लिस्ट का संशोधन कोई नया मुद्दा नहीं है, यह पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी तक के दौर में भी होता रहा है।
उन्होंने SIR को “पवित्र उद्देश्य” बताते हुए कहा कि इससे बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम वोटर लिस्ट से कटेंगे, दो जगह वोटर बने लोगों का नाम एक ही जगह रहेगा, शिफ्ट हो चुके और मृत वोटर्स के नाम लिस्ट से हटाए जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सामान्य बातें हैं, लेकिन कांग्रेस गठबंधन इन पर “झूठ फैलाने” की कोशिश कर रहा है।
‘हर बड़े फैसले पर कांग्रेस का विरोध’
हरीश द्विवेदी ने कांग्रेस पर हमला बढ़ाते हुए कहा कि देशहित के हर बड़े निर्णय पर कांग्रेस ने विरोध किया है धारा 370 और 35A हटाने पर भी कांग्रेस विपक्ष में खड़ी रही। राम मंदिर के मामले में कांग्रेस ने कोर्ट में रोक लगवाने के लिए सैकड़ों वकील तैनात किए। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सरदार वल्लभभाई पटेल को सम्मान देने वाली दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा — का भी कांग्रेस ने विरोध किया।


























