JP Nadda’s attack on the Congress: दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने रैली को “राजनीतिक ड्रामा” बताते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि रैली का मकसद देश में अराजकता फैलाना और चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की कोशिश करना है। नड्डा ने कहा, “यह भारत है, कोई बनाना रिपब्लिक नहीं,” जहां मनमर्जी से आगजनी या दंगे कराए जा सकें।
नड्डा ने रैली को बताया अराजकता फैलाने की कोशिश
जेपी नड्डा के मुताबिक, रामलीला मैदान में हो रहा आयोजन लोकतंत्र के सम्मान का प्रदर्शन नहीं, बल्कि लोकतंत्र के नाम पर अव्यवस्था फैलाने की सोची-समझी कोशिश है। उन्होंने कहा कि जनता की ओर से बार-बार खारिज किए गए राजनीतिक दल अब ऐसे आयोजनों के जरिए अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जेपी नड्डा ने दावा किया कि देश के लोग इस राजनीति को समझते हैं।
रैली के उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी का रवैया लोकतांत्रिक संस्थाओं और जनादेश को कमजोर करने वाला है। हालांकि, ये नड्डा के राजनीतिक आरोप हैं; कांग्रेस या गठबंधन की ओर से उनका पक्ष अलग हो सकता है।
राहुल गांधी की राजनीति के चार चरण गिनाए
जेपी नड्डा ने राहुल गांधी की राजनीति को चार चरणों में बांटते हुए आरोप लगाया कि पहले चरण में झूठ और हंगामा फैलाया जाता है, दूसरे में सड़कों पर प्रदर्शन के जरिए अव्यवस्था पैदा होती है, तीसरे में देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचता है और चौथे में विदेशी ताकतों के इशारे पर चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की जाती है।
उन्होंने एक नवंबर को आयोजित रैली के पीछे भी चार कथित मकसद बताए। नड्डा के अनुसार, इनमें सिख समुदाय के जख्मों को कुरेदना, दिल्ली में अराजकता फैलाकर सरकार को अस्थिर करना, त्योहारों के समय व्यापारियों की कमाई प्रभावित करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि खराब करना शामिल है।
1984 के सिख विरोधी दंगों का किया उल्लेख
जेपी नड्डा ने रैली की तारीख को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा और 1984 के सिख विरोधी दंगों का जिक्र किया। उन्होंने उस दौर को देश के लोकतांत्रिक इतिहास का काला अध्याय बताते हुए आरोप लगाया कि दंगों में निर्दोष सिखों की हत्या हुई, अनेक परिवार बेघर हुए और कई महिलाएं विधवा हुईं। उन्होंने दिल्ली की विधवा कॉलोनी का हवाला देते हुए कहा कि वह आज भी उस त्रासदी की याद दिलाती है।
भाजपा नेता ने गांधी परिवार पर सिख समुदाय से दिल से माफी न मांगने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि पीड़ितों को याद करने के दिन राहुल गांधी का रामलीला मैदान में राजनीतिक कार्यक्रम करना असंवेदनशील है। ये आरोप जेपी नड्डा ने अपने भाषण में लगाए; इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि उनके बयान के तौर पर देखना चाहिए।
व्यापारियों को नुकसान का दावा
रामलीला मैदान की रैली से दिल्ली के कारोबार पर असर पड़ने का मुद्दा उठाते हुए जेपी नड्डा ने व्यापारियों के संभावित नुकसान की बात कही। उन्होंने कहा कि धनतेरस, दिवाली और छठ पूजा जैसे त्योहारों के दौरान छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों को साल की बड़ी कमाई की उम्मीद रहती है। जेपी नड्डा ने दावा किया कि पहले के प्रदर्शनों से दिल्ली के व्यापारियों को लगभग 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था और मौजूदा रैली के कारण नुकसान 10,000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।
उन्होंने चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, करोल बाग और मध्य दिल्ली के बाजारों का नाम लेते हुए कहा कि बड़े आयोजनों और यातायात में रुकावटों का असर कारोबार पर पड़ सकता है। ये आंकड़े जेपी नड्डा के दावे हैं; उपलब्ध बयान में उनके आकलन का स्वतंत्र आधार या गणना का विवरण नहीं दिया गया।
CTI के पत्रों का हवाला
जेपी नड्डा ने चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) की ओर से राजनीतिक दलों को लिखे गए पत्रों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, संगठन ने राहुल गांधी, सोनिया गांधी, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी से त्योहारों के दौरान बड़े राजनीतिक आयोजन न करने और व्यापार प्रभावित होने से बचाने की अपील की थी। जेपी नड्डा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को छोटे व्यापारियों की रोजी-रोटी की चिंता नहीं है।
INDIA गठबंधन के सहयोगियों से सवाल
भाजपा नेता ने INDIA गठबंधन के अन्य दलों से पूछा कि क्या वे भी रैली और उसके संभावित असर को लेकर कांग्रेस के साथ हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर विदेश में भारत की आलोचना करने और देश लौटकर लोकतंत्र तथा अर्थव्यवस्था पर हमला बोलने का आरोप लगाया।
जेपी नड्डा ने कहा कि भारत संविधान और जनता के जनादेश के अनुसार चलेगा, न कि अराजकता की राजनीति से। उन्होंने यह भी दावा किया कि रैली कांग्रेस के राजनीतिक पतन का संकेत बनेगी। वहीं, इस पूरे विवाद का राजनीतिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि रैली में गठबंधन क्या संदेश देता है और दिल्ली के कारोबार पर आयोजन का वास्तविक प्रभाव कितना पड़ता है।


























