Delhi Mohan Garden News: दिल्ली में सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मोहन गार्डन इलाके में सीवर की समस्या अब केवल सरकारी लापरवाही तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि स्थानीय निवासियों ने दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यशैली पर पैसों के नाम पर काम करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का आरोप है कि सीवर जाम होने की शिकायत पर कर्मचारी मौके पर तो पहुंचते हैं, लेकिन काम करने के नाम पर कथित तौर पर अतिरिक्त पैसों की मांग की जाती है। यदि लोग पैसे देने से मना कर दें तो काम अधूरा छोड़कर कर्मचारी वापस चले जाते हैं।
मोहन गार्डन के प्लांट A-1, A-2 और गुरुद्वारा गली में पिछले करीब तीन महीने से सीवर ओवरफ्लो की समस्या बनी हुई है। गलियों में गंदा पानी फैल रहा है और लगातार दुर्गंध के कारण स्थानीय निवासियों का जीना मुश्किल हो गया है। हैरानी की बात यह है कि कई बार शिकायत करने और संबंधित अधिकारियों तक मामला पहुंचाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
दिल्ली जल बोर्ड में पैसे लेकर काम करने का आरोप
बता दें कि स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इलाके में जब भी सीवर जाम होता है और दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारी मौके पर पहुंचते हैं, तो कथित तौर पर काम करने के बदले अतिरिक्त पैसों की मांग की जाती है। लोगों का कहना है कि जो निवासी पैसे देने से इनकार कर देते हैं, उनके यहां काम को लेकर तरह-तरह के बहाने बनाए जाते हैं और कर्मचारी बिना समस्या का समाधान किए वापस चले जाते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दिल्ली जल बोर्ड की जिम्मेदारी निभाने के लिए भी आम जनता को अपनी जेब से अतिरिक्त पैसे देने पड़ेंगे? यदि विभाग के कर्मचारी सरकारी जिम्मेदारी के तहत काम करने पहुंचते हैं, तो फिर कथित तौर पर पैसों की मांग क्यों की जा रही है? निवासियों ने मांग की है कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कोई कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर लोग
स्थानीय लोगों का कहना है कि सीवर की समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की जाती है, लेकिन कई बार अधिकारी फोन तक नहीं उठाते। इसके बाद परेशान निवासी दिल्ली जल बोर्ड के कार्यालय पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज करवाते हैं।
लोगों के मुताबिक, कार्यालय में शिकायत लिख ली जाती है और कार्रवाई का भरोसा भी दिया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर समस्या जस की तस बनी रहती है। कुछ दिन बाद फिर वही सीवर जाम, वही गंदा पानी और वही दुर्गंध लोगों को परेशान करने लगती है।
निवासियों का आरोप है कि शिकायतों का रिकॉर्ड तो तैयार होता है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जाता। ऐसे में सवाल उठता है कि जब शिकायतें अधिकारियों तक पहुंच रही हैं तो कार्रवाई आखिर कहां अटक रही है?
सरकारी कर्मचारी नहीं करते काम,मजबूरी में निजी खर्च
मोहन गार्डन के निवासियों ने बताया कि बार-बार शिकायत करने और इंतजार करने के बाद जब कोई समाधान नहीं निकलता तो लोग मजबूरी में अपनी जेब से पैसे खर्च करके सीवर का काम करवाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई बार विभाग से जुड़े कर्मचारी ही निजी तौर पर पैसे लेकर काम कर देते हैं, लेकिन इस तरह हुए काम की आधिकारिक जानकारी विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज होने को लेकर भी सवाल हैं।
इससे एक बड़ी समस्या पैदा हो रही है। सरकारी विभाग की जिम्मेदारी होने के बावजूद आम नागरिकों को अपनी परेशानी दूर करने के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। अगर यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह विभागीय जवाबदेही और सरकारी व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर मामला है।
विधायक पवन शर्मा तक पहुंची शिकायत, समाधान नहीं
इस मामले में स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने अपनी शिकायत स्थानीय विधायक पवन शर्मा के कार्यालय तक भी पहुंचाई है। लोगों के अनुसार, जूनियर इंजीनियर (JE) से लेकर दिल्ली जल बोर्ड के संबंधित अधिकारियों तक इलाके की समस्या की जानकारी पहुंचाई जा चुकी है।
इसके बावजूद A-1, A-2 और गुरुद्वारा गली के निवासियों को राहत नहीं मिली है। लोगों का सवाल है कि जब विधायक कार्यालय और विभागीय अधिकारियों तक शिकायत पहुंच चुकी है तो फिर तीन महीने से सीवर की समस्या का समाधान क्यों नहीं हो रहा?
स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों से भी जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि जनता को केवल शिकायत दर्ज करवाने का भरोसा नहीं चाहिए, बल्कि मौके पर अधिकारी पहुंचकर समस्या का समाधान करें।
गंदे पानी और दुर्गंध से परेशान परिवार
सीवर ओवरफ्लो होने के कारण गलियों में गंदा पानी फैलना स्थानीय लोगों के लिए रोजमर्रा की परेशानी बन गया है। दुर्गंध के कारण घरों के आसपास रहना मुश्किल हो रहा है। लोगों को गंदे पानी के बीच से निकलना पड़ता है।
निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते सीवर की सफाई और मरम्मत नहीं कराई गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। बारिश या पानी का दबाव बढ़ने पर समस्या और विकराल होने की आशंका भी बनी रहती है।
दिल्ली जल बोर्ड से जवाब मांग रही जनता
मोहन गार्डन का यह मामला अब दिल्ली जल बोर्ड की कार्यप्रणाली और शिकायत निवारण व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन गया है। स्थानीय निवासियों ने विभाग से मांग की है कि A-1, A-2 और गुरुद्वारा गली में तत्काल सीवर सफाई कराई जाए और समस्या के स्थायी समाधान के लिए तकनीकी सर्वे कराया जाए।
इसके साथ ही कर्मचारियों पर पैसे मांगने के लगाए गए आरोपों की जांच हो, शिकायतों को नजरअंदाज करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और शिकायतकर्ताओं को कार्रवाई की जानकारी दी जाए।
फिलहाल संबंधित दिल्ली जल बोर्ड अधिकारियों, कर्मचारियों और विधायक पवन शर्मा का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी आवश्यक है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मोहन गार्डन में सीवर का काम सरकारी जिम्मेदारी के तहत होगा या लोगों को अपनी जेब से पैसे खर्च करके ही राहत मिलती रहेगी? तीन महीने से परेशान जनता अब आश्वासन नहीं, बल्कि कार्रवाई चाहती है।


























