Yuva Sangam Phase-7: दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षा मंत्रालय की पहल ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के अंतर्गत आयोजित युवा संगम फेज-7 का चौथा दिन सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राष्ट्रीय एकता के नाम रहा। कार्यक्रम में हरियाणा और पंजाब की साझा सांस्कृतिक विरासत को लोकनृत्यों के जरिए प्रस्तुत किया गया। तमिलनाडु से आए 55 सदस्यीय युवा दल ने दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहर, कला, खानपान और विविध परंपराओं से परिचित होने के साथ-साथ स्थानीय विद्यार्थियों के साथ संवाद किया।
सात दिवसीय आवासीय कार्यक्रम में केंद्रीय विश्वविद्यालय तमिलनाडु के 55 युवा प्रतिनिधि शामिल हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों और समन्वयकों के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को भारत की सांस्कृतिक विविधता से रूबरू कराना और विभिन्न राज्यों के विद्यार्थियों के बीच संवाद तथा मित्रता को बढ़ावा देना है।
दिल्ली की धरोहर और संस्कृति से परिचय
युवा संगम के तहत आए विद्यार्थियों के लिए दिल्ली के प्रमुख ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व के स्थलों के शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किए गए। दल ने लाल किला, कुतुब मीनार, राष्ट्रीय संग्रहालय और इंडिया गेट सहित विभिन्न स्थानों का दौरा किया। कार्यक्रम की गतिविधियों में दिल्ली हाट का भ्रमण, हस्तकला प्रदर्शनी, फूड फेस्टिवल और ‘भाषा संगम’ भी शामिल रहे। छात्रों ने ‘मेरी संस्कृति, मेरा गौरव’ विषय पर कैंपस में संवाद कर अपने अनुभव और विचार साझा किए।
इन गतिविधियों के जरिए प्रतिभागियों को राजधानी के इतिहास, स्थापत्य और समकालीन जीवन की झलक मिली। साथ ही, युवाओं को अपनी भाषा, परंपराओं और क्षेत्रीय पहचान के बारे में बताने का अवसर भी मिला।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में गिद्दा और तमिल लोकनृत्य
चौथे दिन के सांस्कृतिक आयोजन का खास संदेश हरियाणा-पंजाब की एकता रहा। श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज और अदिति महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने पंजाब के पारंपरिक लोकनृत्य गिद्दा समेत अन्य लोक प्रस्तुतियां दीं। ऊर्जा और रंगों से भरी इन प्रस्तुतियों ने तमिलनाडु से आए विद्यार्थियों को उत्तर भारत की लोकसंस्कृति से परिचित कराया।
कार्यक्रम का एक भावुक क्षण तब आया, जब अदिति महाविद्यालय में पढ़ रहे तमिलनाडु के विद्यार्थियों ने अपनी पारंपरिक नृत्य कला मंच पर प्रस्तुत की। उनकी प्रस्तुति ने यह दिखाया कि दिल्ली जैसे शहरों में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए युवा साथ पढ़ते और अपनी सांस्कृतिक पहचान को साझा करते हैं। आयोजन में हरियाणवी, पंजाबी और तमिल परंपराओं की प्रस्तुतियां आपसी सम्मान और अपनत्व का प्रतीक बनीं।
‘भारत के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में आए हैं’
गांधी भवन के निदेशक और युवा संगम फेज-7 के नोडल अधिकारी प्रोफेसर के.पी. सिंह ने तमिलनाडु से आए विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रतिभागी किसी पराए स्थान पर नहीं, बल्कि भारत के एक सुंदर हिस्से से दूसरे हिस्से में आए हैं। देश के अलग-अलग क्षेत्रों में भाषाएं और अभिव्यक्तियां भले बदलती हों, लेकिन भारतीयता का भाव सभी को जोड़ता है।
प्रो. सिंह ने तमिल भाषा और संस्कृति के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि तमिल भाषा की प्राचीन साहित्यिक परंपरा, शास्त्रीय संगीत, भक्ति और क्षेत्रीय रीति-रिवाज भारतीय संस्कृति को समृद्ध करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से दिल्ली प्रवास के दौरान कम से कम पांच मजबूत मित्रताएं बनाने और कार्यक्रम के बाद भी संपर्क बनाए रखने का आग्रह किया।
उन्होंने युवाओं को देश से प्रेम करने, उसे समझने और विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। उनके अनुसार, युवा संगम केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों को भाषाई और सांस्कृतिक रूप से जोड़ने का अवसर है। यह ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को अनुभव करने का व्यावहारिक माध्यम भी है।
साझा संस्कृति से मजबूत होगी राष्ट्रीय एकता
संयुक्त निदेशक, गांधी भवन, प्रोफेसर हंसराज सुमन ने कहा कि युवा संगम भारत को करीब से जानने और उसकी विविधता को अनुभव करने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि जब एक क्षेत्र के युवा दूसरे क्षेत्र की भाषा, परंपरा और विरासत को समझते हैं, तब एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना मजबूत होती है।
प्रो. सुमन के अनुसार, भारत की साझा संस्कृति अलग-अलग राज्यों में अपनी विशिष्टताओं के साथ मौजूद है। सांस्कृतिक कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने हरियाणा और पंजाब की एकता दिखाई, जबकि तमिलनाडु के प्रतिनिधियों ने भी स्थानीय विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। ऐसे आदान-प्रदान से मेजबान और अतिथि—दोनों पक्षों के युवा एक-दूसरे से सीखते हैं।
कार्यक्रम में प्रोफेसर गुरमोहिंद्र सिंह, प्रोफेसर भावना पाण्डेय, प्रोफेसर नीनू कुमार, डॉ. सुनील वर्मा और डॉ. अमरेंद्र पाण्डेय सहित शिक्षक और विश्वविद्यालय प्रतिनिधि उपस्थित रहे। युवा संगम से जुड़े शिक्षकों में प्रोफेसर चारू कालरा, प्रोफेसर मनोज कुमार कैन, डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, डॉ. अनिरुद्ध कुमार सुधांशु, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. आलोक कुमार, डॉ. अनवर जहां, डॉ. अनंथि वासुदेवन और डॉ. बसंता वी. गौरी भी शामिल हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय का युवा संगम फेज-7 सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, शैक्षणिक भ्रमण और संवाद के जरिए अलग-अलग राज्यों के युवाओं को जोड़ रहा है। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही है कि भाषाई और सांस्कृतिक विविधता भारत की ताकत है—और उसे समझने का सबसे प्रभावी तरीका आपसी मुलाकात, सहभागिता और मित्रता है।

























