CTI sent a letter to Sonia Gandhi: दिवाली की सबसे बड़ी खरीदारी के दौर के ठीक बीच राजधानी के व्यापारी समुदाय की टेंशन बढ़ गई है। दरअसल, 1 नवंबर 2025 को रामलीला मैदान में कांग्रेस की दिल्ली रैली प्रस्तावित है, जिसके चलते पुरानी और मध्य दिल्ली के बाजारों में करोड़ों रुपये के रोजाना कारोबार पर संकट के बादल छा गए हैं। व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख दिवाली के बाद स्थानांतरित करने की अपील की है।
आपातकाल के 50 साल पर आयोजित हो रही महारैली
“सत्याग्रह: 50 साल, एक नौजवान के नाम” नाम से आयोजित होने वाली यह रैली आपातकाल (25 जून 1975) की 50वीं बरसी के मौके पर दी जा रही है। सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की शिरकत की संभावना है। पार्टी का अनुमान है कि रैली में 10 लाख से अधिक कार्यकर्ता पहुंच सकते हैं, और इसी भीड़ से व्यापारियों को सबसे बड़ा खतरा है।
व्यापारियों की चिंता क्यों बढ़ी है?
CTI के अनुसार रामलीला मैदान के चारों ओर पांच किलोमीटर के घेरे में लगभग 20 बड़े थोक और खुदरा बाजार बसे हैं, जहां से रोजाना 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है। पत्र में व्यापारियों ने ये बड़ी बातें उठाई हैं:
- 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दिवाली है, ऐसे में 1 नवंबर सामान की आपूर्ति और खरीद के लिहाज से सीजन का सबसे अहम दिन है।
- 10 लाख लोगों को लाने के लिए 15 हजार से 20 हजार वाहनों की जरूरत पड़ सकती है, जबकि मैदान के पास भारी-भरकम बसों की पार्किंग की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।
- 31 अक्टूबर की दोपहर से ही सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और बदरपुर बॉर्डर पर वाहनों की आवाजाही बढ़ने और शाम तक मध्य दिल्ली के मार्गों पर बैरिकेडिंग की आशंका जताई गई है।
इन 20 बाज़ारों पर पड़ सकता है सीधा असर
CTI के पत्र में चांदनी चौक, खारी बावली, सदर बाजार, भगीरथ पैलेस, गांधी नगर, करोल बाग, नया बाजार, किनारी बाजार, दरीबा कलां, फतेहपुरी, तिलक बाजार, जामा मस्जिद, पहाड़गंज, दरियागंज, कनॉट प्लेस, जनपथ, पालिका बाजार, लाजपत राय मार्केट, चावड़ी बाजार, बल्लीमारान, कश्मीरी गेट और गफ्फार मार्केट जैसे व्यापारिक केंद्रों का जिक्र किया गया है।
संगठन का दावा है कि इन बाजारों में रोजाना दिल्ली के 56 औद्योगिक क्षेत्रों से करीब पांच हजार ट्रक और टेंपो माल लेकर आते हैं, वहीं लगभग तीन हजार ट्रक एनसीआर और दूसरे राज्यों को सामान रवाना करते हैं। यातायात ठप होने पर त्योहारों का सामान समय पर दुकानों तक नहीं पहुंचेगा, जिसका सीधा झटका दिवाली की बिक्री को लगेगा।
जेएलएन मार्ग से चांदनी चौक तक जाम की आशंका
पत्र में कहा गया है कि जेएलएन मार्ग, बहादुर शाह जफर मार्ग, नेताजी सुभाष मार्ग, अजमेरी गेट और चांदनी चौक रोड जैसे रूटों पर रैली वाले दिन भारी रुकावट आ सकती है। व्यापारियों ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए कार्यक्रम का हवाला देते हुए बताया कि महज पांच से सात हजार लोगों की मौजूदगी में भी मध्य दिल्ली में लगभग आठ घंटे जाम रहा था। ऐसे में 10 लाख लोगों वाली रैली का अंदाजा लगाया जा सकता है। खबरों के मुताबिक कुछ ट्रांसपोर्टर 31 अक्टूबर से ही दिल्ली में गाड़ी भेजने को लेकर असमंजस में हैं।
CTI की दो मांगें — दिवाली के बाद रैली या बुराड़ी मैदान
सोनिया गांधी के नाम पत्र में CTI ने दो विकल्प रखे हैं:
- पहला विकल्प: रैली को 10-11 नवंबर के बाद करने की अपील, ताकि धनतेरस से भाई दूज तक का कारोबारी सीजन बाधित न हो।
- दूसरा विकल्प: अगर तारीख नहीं बदली जा सकती, तो रैली का स्थल रामलीला मैदान की जगह बुराड़ी मैदान किया जाए, जहां करीब 15 हजार वाहनों की पार्किंग संभव है।
राहुल गांधी को पहले भी लिखा जा चुका है पत्र, CAIT भी उठा रहा है मुद्दा
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने साफ किया कि संगठन किसी पार्टी की रैली के खिलाफ नहीं है, बल्कि कारोबारियों की आजीविका की रक्षा चाहता है। उन्होंने बताया कि संगठन पहले राहुल गांधी को भी पत्र भेज चुका है। वहीं व्यापारी संगठन CAIT ने भी डीसीपी (ट्रैफिक) को पत्र लिखकर रैली की तारीख बदलने की मांग की है। कांग्रेस की ओर से इस मामले पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



























