JK Tyre Price Hike: अगर आप आने वाले दिनों में अपनी कार या दूसरी गाड़ियों के टायर बदलवाने की योजना बना रहे हैं, तो आपका बजट बढ़ सकता है। देश की प्रमुख टायर निर्माता कंपनियों में शामिल JK टायर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में टायरों की कीमतों में 4 से 5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने की योजना बनाई है।
कंपनी के मुताबिक, कच्चे माल की बढ़ती लागत और माल ढुलाई महंगी होने के कारण कीमतों में संशोधन जरूरी हो गया है। इसका असर नए टायर खरीदने वाले ग्राहकों के साथ-साथ वाहन मालिकों के मेंटेनेंस खर्च पर भी पड़ सकता है।
JK Tyre Price Hike: कितनी बढ़ेंगी टायरों की कीमतें?
JK टायर के प्रबंध निदेशक अंशुमान सिंघानिया के अनुसार, कंपनी अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान टायरों के दाम में 4-5 प्रतिशत तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी करने की तैयारी कर रही है। कंपनी इससे पहले भी चालू वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों में कीमतें बढ़ा चुकी है।
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, पहली तिमाही में टायरों की कीमतों में करीब 5 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में लगभग 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी। अब तीसरी तिमाही में प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर ग्राहकों को टायर खरीदने के लिए पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।
हालांकि, अलग-अलग टायरों की कीमतों में वास्तविक बढ़ोतरी उनके आकार, श्रेणी और मॉडल के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए अपनी गाड़ी के लिए नया टायर खरीदने से पहले अधिकृत डीलर से मौजूदा कीमत की जानकारी लेना उपयोगी रहेगा।
कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से कंपनियों पर दबाव
टायर निर्माण उद्योग में कच्चे माल की कीमतें कंपनियों की लागत निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाती हैं। रबर, पेट्रोकेमिकल आधारित सामग्री और अन्य औद्योगिक इनपुट की लागत बढ़ने से टायर बनाने का खर्च भी बढ़ जाता है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में माल ढुलाई और कंटेनर फ्रेट की दरें बढ़ने से कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ता है।
JK टायर प्रबंधन के मुताबिक, मौजूदा समय में कच्चे माल की लागत ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कारोबारी माहौल भी चुनौतीपूर्ण है। सप्लाई चेन में आने वाली बाधाएं और परिवहन खर्च में बढ़ोतरी कंपनियों की लागत को प्रभावित कर रही हैं।
कंपनी का कहना है कि तीसरी तिमाही में कच्चे माल की पूरी बास्केट की लागत में 4-5 प्रतिशत तक अतिरिक्त बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। ऐसे में कीमतों में संशोधन के जरिए बढ़ती लागत के कुछ प्रभाव को कम करने की कोशिश की जा रही है।
JK टायर के मुनाफे में 71.5% की गिरावट
टायरों की कीमतें बढ़ाने की योजना के बीच JK टायर के वित्तीय नतीजे भी चर्चा में हैं। जुलाई से सितंबर की तिमाही में कंपनी का समेकित शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 71.5 प्रतिशत घटकर 65.11 करोड़ रुपये रह गया।
कंपनी के मुनाफे में गिरावट के साथ उसके EBITDA मार्जिन पर भी दबाव देखने को मिला। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, EBITDA मार्जिन पिछले साल की समान अवधि के 13.3 प्रतिशत से घटकर 7.1 प्रतिशत पर आ गया।
EBITDA किसी कंपनी की ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन से पहले की कमाई को दर्शाता है। इसका मार्जिन कम होने का मतलब है कि कंपनी की परिचालन कमाई पर लागत का दबाव बढ़ा है।
JK टायर के प्रबंध निदेशक ने बताया कि दूसरी तिमाही में कच्चे माल की लागत पहली तिमाही की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत बढ़ गई थी। वहीं, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में कच्चे माल की लागत में कुल मिलाकर करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
बढ़ती लागत और मुनाफे में गिरावट के बीच कंपनी के लिए अपनी कीमतों और परिचालन खर्च के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण हो गया है।
कार और SUV मालिकों पर क्या होगा असर?
JK टायर की कीमतों में प्रस्तावित बढ़ोतरी का असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है, जो जल्द ही अपनी गाड़ी के टायर बदलवाने वाले हैं। हालांकि, वास्तविक खर्च इस बात पर निर्भर करेगा कि ग्राहक किस तरह का टायर खरीदता है और उसकी गाड़ी में कितने टायर बदले जाने हैं।
उदाहरण के लिए, यदि किसी टायर की मौजूदा कीमत 5,000 रुपये है, तो 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद उसकी कीमत लगभग 5,250 रुपये हो सकती है। इस स्थिति में एक टायर पर 250 रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे। चार टायर बदलवाने पर कुल अंतर 1,000 रुपये हो सकता है, बशर्ते सभी टायरों की शुरुआती कीमत समान हो और उन पर समान बढ़ोतरी लागू हो।
ध्यान देने वाली बात यह है कि यह केवल समझाने के लिए दिया गया उदाहरण है। यह JK टायर के किसी खास मॉडल की आधिकारिक कीमत नहीं है।
वाहन मालिकों के लिए बेहतर होगा कि वे टायर बदलवाने से पहले अलग-अलग अधिकृत विक्रेताओं से कीमतों की तुलना करें और टायर की वारंटी, निर्माण तिथि तथा उपयुक्त साइज की भी जांच करें।
बड़े रिम वाले टायरों की मांग में सुधार
बढ़ती लागत के बावजूद कंपनी को कुछ उत्पाद श्रेणियों में मांग बेहतर होने की उम्मीद है। JK टायर प्रबंधन के मुताबिक, बड़े रिम वाले टायरों की मांग में सुधार देखने को मिल रहा है। यह मांग नई गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले ओरिजिनल इक्विपमेंट (OE) टायरों और रिप्लेसमेंट बाजार, दोनों में बढ़ रही है।
OE टायर वे होते हैं, जो वाहन निर्माता कंपनियां नई गाड़ियों में लगाती हैं। वहीं, रिप्लेसमेंट टायर उन ग्राहकों के लिए होते हैं, जिन्हें इस्तेमाल के दौरान पुराने या घिस चुके टायर बदलवाने पड़ते हैं।
बड़े रिम वाले टायरों की मांग में सुधार कंपनी के उत्पाद मिश्रण को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि, बढ़ती लागत का असर कितना कम होगा, यह आने वाली तिमाहियों में कंपनी के प्रदर्शन और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।



























