99 साल की उम्र में हेल्गा ने रचा अनोखा इतिहास

An elderly woman's remarkable feat: ब्रिटेन की 99 वर्षीय हेल्गा डफी ने उड़ते बाइप्लेन के पंख पर आठ मिनट तक विंग वॉक कर दुनिया की सबसे उम्रदराज महिला विंग वॉकर का रिकॉर्ड बनाया। जानिए उनकी प्रेरणादायक कहानी।

99 साल की दादी ने उड़ते विमान पर किया हैरतअंगेज स्टंट

HIGHLIGHTS

  • 99 साल में बनाया रिकॉर्ड, अब 100 पर फिर चुनौती
  • बेट्टी से प्रेरित होकर हेल्गा ने तोड़ा उम्र का रिकॉर्ड
  • विमान के पंख पर बंधकर उड़ीं 99 साल की दादी
  • 99 साल की हेल्गा ने आसमान में रचा वर्ल्ड रिकॉर्ड

An elderly woman’s remarkable feat: उम्र बढ़ने के साथ बहुत से लोगों के लिए चलना-फिरना और रोजमर्रा के काम चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। ऐसे में हवा में उड़ते विमान के पंख पर खड़े होकर रोमांचक स्टंट करने की कल्पना भी शायद कम ही लोग करें। लेकिन ब्रिटेन में रहने वाली 99 वर्षीय हेल्गा डफी ने यह कर दिखाया। उन्होंने उड़ते बाइप्लेन के ऊपरी पंख पर सुरक्षा उपकरणों के साथ विंग वॉक किया और दुनिया की सबसे उम्रदराज महिला विंग वॉकर बनकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया।

हेल्गा का यह कारनामा केवल उम्र के लिहाज से ही खास नहीं है। उन्होंने घुटनों की परेशानी और ऑस्टियोआर्थराइटिस के बावजूद अपनी इच्छा पूरी की। इस चुनौती के जरिए उन्होंने चैरिटी के लिए भी धन जुटाया। उनकी कहानी बताती है कि सपने देखने की कोई उम्र नहीं होती—हालांकि किसी भी जोखिम भरे काम में उचित तैयारी और सुरक्षा सबसे जरूरी है।

उड़ते बाइप्लेन के पंख पर आठ मिनट

हेल्गा डफी मूल रूप से जर्मनी की रहने वाली हैं और फिलहाल विल्टशायर के डेविजेस स्थित एक केयर होम में रहती हैं। उन्होंने यह रिकॉर्ड ग्लॉस्टरशायर के सिरेनसेस्टर स्थित आरएफसी रेंडकॉम्ब एयरफील्ड पर बनाया। वहां उन्हें एक बाइप्लेन के ऊपरी पंख पर विशेष सुरक्षा उपकरणों की मदद से बांधा गया। इसके बाद विमान ने उड़ान भरी और हेल्गा ने हवा में करीब आठ मिनट बिताए।

रिकॉर्ड के लिए कम से कम पांच मिनट तक उड़ान में बने रहना जरूरी था। हेल्गा ने यह समय पूरा कर लिया और तय सीमा से अधिक देर तक हवा में रहीं। विमान के पंख पर विंग वॉक करना एक जोखिम भरा करतब है, इसलिए इसमें प्रशिक्षित टीम, सावधानीपूर्वक योजना और सुरक्षा इंतजामों की अहम भूमिका होती है।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, हेल्गा ने 16 अक्टूबर 2026 को यह उपलब्धि हासिल की। उस दिन उनकी उम्र 99 साल और 21 दिन थी। रिकॉर्ड के बाद गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अधिकारी विल मनफोर्ड ने उन्हें प्रमाणपत्र सौंपा। यह सर्टिफिकेट अब उनके केयर होम में रखा गया है।

बेट्टी ब्रोमेज से मिली प्रेरणा

हेल्गा के विंग वॉक करने के फैसले के पीछे एक और साहसी महिला की कहानी है। उन्होंने 97 साल की बेट्टी ब्रोमेज को विंग वॉक करते देखा था। बेट्टी के कारनामे से प्रेरित होकर हेल्गा के मन में भी इस चुनौती को आजमाने की इच्छा हुई। उन्होंने तय किया कि वह भी यह कर सकती हैं।

उनकी उड़ान की योजना पहले उनके 99वें जन्मदिन, यानी 23 सितंबर, के आसपास थी। लेकिन तारीख आगे बढ़ने के बाद आखिरकार अक्टूबर में उनका सपना पूरा हुआ। पहले रिकॉर्ड बना चुकी बेट्टी ने भी हेल्गा को बधाई दी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि हेल्गा के 100 साल की होने पर वह रिकॉर्ड वापस लेने की कोशिश कर सकती हैं।

घुटनों की समस्या के बावजूद पूरा किया सपना

हेल्गा पहले नर्स के तौर पर काम कर चुकी हैं। उन्हें ऑस्टियोआर्थराइटिस और घुटनों की परेशानी है, फिर भी उन्होंने इस अनुभव को लेकर डर के बजाय उत्साह महसूस किया। उड़ान के बाद उन्होंने इसे अनोखा अनुभव बताया।

हेल्गा का संदेश है कि किसी काम को करने से पहले तुरंत यह नहीं मान लेना चाहिए कि वह नामुमकिन है। कोशिश करने के बाद ही पता चलता है कि हम क्या कर सकते हैं। उनकी बात को अंधाधुंध जोखिम लेने की सलाह नहीं समझना चाहिए। बल्कि यह याद दिलाती है कि उम्र या स्वास्थ्य की चुनौतियों के बीच भी नई चीजें आजमाने की इच्छा बनी रह सकती है—बशर्ते तैयारी, विशेषज्ञों की सलाह और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।

चैरिटी के लिए जुटाए 1,300 पाउंड से अधिक

हेल्गा का यह प्रयास सिर्फ रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं था। उनकी उड़ान के जरिए विल्टशायर एंड बाथ एयर एम्बुलेंस के लिए 1,300 पाउंड से अधिक की रकम जुटाई गई। यह राशि भारतीय मुद्रा में लगभग 1.64 लाख रुपये से ज्यादा बताई गई है। एयर एम्बुलेंस सेवा आपातकाल में मरीजों तक चिकित्सा सहायता पहुंचाने में मदद करती है।

इस खास मौके पर हेल्गा की भतीजियां जैकी रोज और जूली प्रीस भी मौजूद थीं। उन्होंने हेल्गा को स्वतंत्र और साहसी महिला बताया। सात भाई-बहनों में सबसे बड़ी हेल्गा ने कहा कि उन्हें लगता है, उनके पिता उनकी उपलब्धि पर गर्व करते।

प्रेरणा देती है हेल्गा डफी की कहानी

हेल्गा डफी वर्ल्ड रिकॉर्ड की यह उपलब्धि असाधारण है, लेकिन उनकी कहानी का संदेश केवल करतब तक सीमित नहीं। यह इस बात की याद दिलाती है कि बुजुर्ग लोगों के भी अपने सपने, रुचियां और नई चीजें करने की चाह होती है। उम्र के आधार पर उनकी क्षमताओं या इच्छाओं को कम आंकना ठीक नहीं।

हेल्गा ने अपने उत्साह को एक उद्देश्य से जोड़ा—रिकॉर्ड बनाया और चैरिटी के लिए धन जुटाया। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या बेट्टी ब्रोमेज 100 साल की उम्र में फिर से विंग वॉक करके रिकॉर्ड वापस पाने की कोशिश करेंगी। फिलहाल, हेल्गा की उड़ान साबित करती है कि नया अनुभव लेने का उत्साह जिंदगी के किसी भी पड़ाव पर बरकरार रह सकता है।

Sandhya Samay News

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