312 सीटों की जीत याद दिलाकर अमित शाह ने दिया बड़ा संदेश

UP Election 2027: यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अमित शाह ने लखनऊ में भाजपा कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र दिया। 2017 की 312 सीटों वाली जीत याद दिलाकर 2027 में फिर सरकार बनाने का किया आह्वान।

2027 चुनाव से पहले अमित शाह का बड़ा ऐलान

HIGHLIGHTS

  • अमित शाह ने लखनऊ से भरी हुंकार
  • 2027 में फिर बनेगी भाजपा सरकार!
  • लखनऊ में अमित शाह का शक्ति प्रदर्शन,
  • 2850 नेताओं के सामने बनाया चुनावी प्लान

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। चुनाव में अभी समय बाकी है, लेकिन भाजपा ने अपनी चुनावी तैयारियों को लेकर संगठन को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। इसी सिलसिले में लखनऊ में आयोजित भाजपा उत्तर प्रदेश प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र दिया। अपने संबोधन में उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव में मिली ऐतिहासिक सफलता का जिक्र करते हुए कार्यकर्ताओं से एक बार फिर उसी प्रदर्शन को दोहराने की अपील की है।

अमित शाह ने साफ संकेत दिया कि 2027 का विधानसभा चुनाव पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसकी तैयारी बूथ स्तर से ही शुरू करनी होगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत उसका संगठन और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता हैं।

अमित शाह बोले- 312 सीटों की ऐतिहासिक जीत को मत भूलिए

लखनऊ में भाजपा कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करते हुए अमित शाह ने 2017 के विधानसभा चुनाव का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी को ऐतिहासिक जीत दिलाने में कार्यकर्ताओं की सबसे बड़ी भूमिका रही थी।

अमित शाह ने कार्यकर्ताओं से कहा कि 2017 में पार्टी ने करीब 40 फीसदी वोट हासिल करते हुए 312 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को लगभग 41 फीसदी वोट मिले और पार्टी ने बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की।

उन्होंने कार्यकर्ताओं को इसी प्रदर्शन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। शाह के मुताबिक, अगर पार्टी के नेता और कार्यकर्ता पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरें तो 2027 में भी बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बना सकती है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को अर्जुन की तरह अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना होगा। चुनाव में जीत हासिल करने के लिए संगठन को मजबूत करना और जनता के बीच लगातार सक्रिय रहना जरूरी है।

‘भाजपा के मालिक देवतुल्य कार्यकर्ता हैं’

अमित शाह ने अपने भाषण की शुरुआत पार्टी कार्यकर्ताओं को सम्मान देते हुए की। उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं को पार्टी की असली ताकत बताते हुए ‘मालिक’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के मालिक देवतुल्य कार्यकर्ताओं को मेरा राम-राम। इस संबोधन के जरिए शाह ने संगठन में कार्यकर्ताओं की अहमियत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी में कोई भी नेता कार्यकर्ता से बड़ा नहीं है।

पार्टी का हर पदाधिकारी सबसे पहले एक कार्यकर्ता है और संगठन की सफलता के पीछे बूथ स्तर पर मेहनत करने वाले लोगों का योगदान है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अभी से कमर कसने की अपील की। उनके संबोधन का मुख्य संदेश यही रहा कि पार्टी की चुनावी रणनीति का केंद्र संगठन और जमीनी कार्यकर्ता होने चाहिए।

राम मंदिर और कारसेवकों का जिक्र कर सपा पर साधा निशाना

अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर भी तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के दौरान हुई गोलीबारी की घटना का जिक्र करते हुए तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार को निशाने पर लिया।

अमित शाह ने कहा कि आज का दिन उस घटना की याद दिलाता है, जब मुलायम सिंह यादव की सरकार के दौरान रामभक्तों और कारसेवकों पर गोलियां चलाई गई थीं। उन्होंने इस घटना को याद करते हुए कहा कि सरयू नदी का पानी रामभक्तों के खून से लाल हो गया था। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए गृह मंत्री ने सवाल किया कि आखिर समाजवादी पार्टी किस आधार पर उत्तर प्रदेश में दोबारा सरकार बनाने का दावा कर रही है?

उन्होंने भाजपा सरकार को लेकर भरोसा जताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में पार्टी की सरकार ‘अंगद का पैर’ बन चुकी है, जिसे कोई हिला नहीं सकता। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि बीजेपी को एक बार फिर सत्ता में लाने के लिए पूरी मजबूती के साथ काम करना होगा।

कल्याण सिंह और अयोध्या आंदोलन का भी किया उल्लेख

अमित शाह ने अपने भाषण में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और अयोध्या आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कल्याण सिंह ने अपनी सरकार की चिंता किए बिना अयोध्या में कारसेवा होने दी थी।

उनके संबोधन में राम मंदिर आंदोलन और भाजपा की राजनीतिक यात्रा के पुराने घटनाक्रमों को भी प्रमुखता मिली। अमित शाह के इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के वैचारिक मुद्दों और राजनीतिक संदेश को कार्यकर्ताओं तक पहुंचाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

2,850 नेताओं और पदाधिकारियों की मौजूदगी में बनी रणनीति

लखनऊ में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की इस बड़ी बैठक में संगठन और सरकार से जुड़े करीब 2,850 प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री, दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, सांसद, विधायक, जिलाध्यक्ष तथा विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारी मौजूद रहे।

इतनी बड़ी संख्या में पार्टी के प्रमुख नेताओं और संगठनात्मक पदाधिकारियों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि बीजेपी आगामी चुनाव को लेकर संगठनात्मक स्तर पर गंभीर तैयारी कर रही है।

बैठक में सरकार की उपलब्धियों, संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की भूमिका और आगामी राजनीतिक चुनौतियों को लेकर चर्चा हुई। पार्टी के सामने प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में संगठन को सक्रिय रखने और जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की चुनौती भी है।

2027 में भाजपा के सामने क्या होंगी बड़ी चुनौतियां?

उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए आसान नहीं माना जा रहा है। साल 2017 में पार्टी ने 312 सीटों के साथ शानदार जीत हासिल की थी। वहीं 2022 में सत्ता बरकरार रखने के बावजूद उसकी सीटों की संख्या घटकर 255 रह गई थी। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन करते हुए भाजपा के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी।

ऐसे में भाजपा के लिए 2027 में अपनी सरकार बचाए रखना सबसे बड़ा लक्ष्य होगा। पार्टी को संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ सामाजिक समीकरणों, क्षेत्रीय मुद्दों, विपक्ष की रणनीति और जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता पर भी ध्यान देना होगा।

अमित शाह का लखनऊ में दिया गया संबोधन इसी व्यापक चुनावी तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने 2017 की जीत का उदाहरण देकर कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि संगठन की एकजुटता और जमीनी मेहनत से बड़ी से बड़ी राजनीतिक चुनौती का सामना किया जा सकता है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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