Land encroachment at Ayodhya Gurukul: रामनगरी की वैदिक शिक्षा की धरोहर बने निशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। धर्मनगरी के राम पथ पर स्थित इस सौ साल पुराने गुरुकुल के प्राचार्य, व्यवस्थापक और छात्रों ने आरोप लगाया है कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दौरान अस्थायी पार्किंग के लिए दी गई जमीन पर अब स्थायी रूप से कब्जा कर लिया गया है। पीड़ित पक्ष ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर भूमि कब्जामुक्त कराने की मांग की है।
पार्किंग से शुरू हुआ ‘कब्जे’ का सिलसिला
प्राचार्य के मुताबिक, राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर भारी भीड़ और वाहनों को देखते हुए प्रशासन को गुरुकुल के विशाल प्रांगण की जमीन कुछ दिनों के लिए अस्थायी पार्किंग हेतु उपलब्ध कराई गई थी। उद्देश्य था श्रद्धालुओं को सुविधा देना। लेकिन आरोप है कि उसके बाद यह जमीन कभी खाली नहीं हुई। महज एक किलोमीटर दूर स्थित राम मंदिर से सटे इस परिसर में अब नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस की गाड़ियां लगातार खड़ी की जा रही हैं।
गुरुकुल पक्ष का कहना है कि जो जमीन कुछ दिनों के लिए दी गई थी, वहां अब दो साल बीत चुके हैं और पूरा प्रांगण सरकारी व गैर-सरकारी वाहनों का अड्डा बन गया है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई, शास्त्रार्थ और खेलकूद की गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
1925 में स्थापित, 200 छात्र सीख रहे हैं चारों वेद
यह कोई आम विद्यालय नहीं, बल्कि सन 1925 में स्थापित प्राचीन निशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय है, जो लगभग एक सदी से नि:शुल्क रूप से संस्कृत, ज्ञान, संस्कृति और मंत्र शिक्षा दे रहा है। व्यवस्थापक अरुण मित्र शास्त्री ने बताया कि इस समय करीब 200 विद्यार्थी यहां रहकर चारों वेदों की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
शास्त्री जी के अनुसार, गुरुकुल के पास कभी अपना खेल का मैदान हुआ करता था, जहां विद्यार्थी न सिर्फ खेलते थे, बल्कि खेती कर सब्जियां भी उगाते थे — जो गुरुकुल शिक्षा के स्वावलंबी मॉडल का हिस्सा थी। लेकिन धीरे-धीरे कुछ लोगों की नजर इस कीमती जमीन पर पड़ी और वह धीरे-धीरे महाविद्यालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर चली गई। आरोप यह भी है कि अब भूमि के साथ-साथ गुरुकुल भवन पर भी कुछ लोगों की लगाम नहीं लग रही है।
छात्रों की आवाज: ‘हमें हमारा खेल का मैदान वापस दो’
मामले का विद्यालय के छात्रों ने घोर विरोध किया है। वेद पढ़ने वाले ये बाल-वैदिक साफ शब्दों में अपनी मांग रख रहे हैं कि उनका खेल का मैदान उन्हें वापस किया जाए। गुरुकुल परंपरा में खुले आंगन और मैदान ही कक्षा का विस्तार होते हैं, इसलिए प्रांगण पर कब्जा सीधे उनकी शिक्षा पर प्रहार माना जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि लगभग एक वर्ष पूर्व देश के प्रसिद्ध उद्योगपति अदानी इस ऐतिहासिक महाविद्यालय में भी आए थे और उन्होंने यहां एक विशाल कक्ष का निर्माण भी कराया था। इससे गुरुकुल की महत्ता का अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह संस्था राष्ट्रीय स्तर पर कितनी प्रतिष्ठित है।
प्रशासन का कहना — भूमि की जांच जारी
मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि गुरुकुल की इस भूमि की जांच की जा रही है। राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जल्द ही जमीन का मालिकाना हक तय किया जाएगा और जो भी पक्ष कानूनन सही पाया जाएगा, उसे न्याय दिया जाएगा। हालांकि, गुरुकुल पक्ष जल्दबाजी की मांग कर रहा है, क्योंकि देरी हर दिन छात्रों के नुकसान की हो रही है।
आगे क्या? राम पथ पर ‘संस्कृति बनाम कब्जे’ की जंग
राम मंदिर के बाद अयोध्या में भूमि के दाम आसमान छू रहे हैं और यही वजह है कि राम पथ से सटी संस्थागत जमीनें अवैध कब्जे की निशाने पर हैं। इस मामले में अब देखना दिलचस्प होगा कि जिला प्रशासन कितनी जल्दी 100 साल पुराने गुरुकुल को उसकी जमीन लौटाता है, और क्या CM योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद गुरुकुल के आंगन में फिर से वैदिक मंत्रों के साथ छात्रों के खेल की गूंज सुनाई देगी।



























