Hitendra Thakur said: महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद पहली बार मतदाता सूची को लेकर बड़ा राजनीतिक भूचाल उठ खड़ा हुआ है। बहुजन विकास आघाड़ी (बविआ) के अध्यक्ष और वसई के विधायक हितेंद्र ठाकुर ने भारत निर्वाचन आयोग तथा महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर इस पूरी प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है। उनका आरोप है कि SIR के पहले चरण में वसई विधानसभा क्षेत्र—जिसमें नालासोपारा के बड़े हिस्से शामिल हैं—से करीब 3 लाख मतदाताओं के नाम हटाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यानी वह क्षेत्र जहां पहले लगभग 6 लाख मतदाता दर्ज थे, वहां अब सिर्फ 3 लाख के हिसाब से सूची तैयार हो रही है।
आबादी बढ़ रही है, मतदाता आधे क्यों? हितेंद्र ठाकुर का सीधा सवाल
हितेंद्र ठाकुर ने अपने पत्र में चुनाव आयोग से पूछा है कि जिस वसई-विरार क्षेत्र में हर साल नए आवासीय प्रोजेक्ट उभर रहे हैं, रेल और मेट्रो जैसे बुनियादी ढांचे का विस्तार हो रहा है और मुंबई-ठाणे से हजारों परिवार रहने आए हैं, वहां मतदाताओं की संख्या बढ़ने के बजाय आधी कैसे हो गई? उनके मुताबिक पिछले दो वर्षों में यहां मतदाताओं में 50 हजार से अधिक की बढ़ोतरी होनी चाहिए थी, लेकिन उल्टा हुआ और तीन लाख नाम कटने का प्रस्ताव आया। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि आदिवादी बहुल इलाकों और सामान्य वार्डों में ऐसे बिना भेदभाव नाम हटाने का आधार क्या था, जबकि नए मतदाताओं के पंजीकरण के आंकड़े बेहद कम हैं।
हितेंद्र ठाकुर ने एक और गंभीर बात उठाई है—वसई-विरार में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान वोटिंग प्रतिशत गिरती चली गई थी। उनका दावा है कि तब भी कई पात्र मतदाताओं के नाम सूची से गायब थे, और अब SIR के नाम पर उन्हीं लोगों को और बाहर किया जा रहा है।
सिर्फ वसई नहीं, ठाणे-पालघर में भी 7 लाख से ज्यादा नाम कटने का प्रस्ताव
यह विवाद सिर्फ नालासोपारा या वसई तक सीमित नहीं है। राज्य चुनाव आयोग के मुताबिक पालघर जिले में 7.47 लाख और ठाणे जिले में 8.78 लाख मतदाताओं के नाम हटाने का प्रस्ताव है, जिनमें वसई विधानसभा क्षेत्र के 3.27 लाख नाम शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि पालघर जिले में कुल मतदाता करीब 12.75 लाख हैं—यानी आधे से भी ज्यादा नाम कटने की कगार पर हैं।
बता दें कि चुनाव आयोग ने 27 अक्टूबर 2025 को महाराष्ट्र समेत 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की घोषणा की थी। आयोग का तर्क है कि शहरीकरण, पलायन, एक ही व्यक्ति का कई जगह नाम दर्ज होना और अपात्र नामों के चलते सूची में बड़े पैमाने पर शुद्धि जरूरी है। लेकिन हितेंद्र ठाकुर का कहना है कि जिस तरीके से यह पुनरीक्षण हो रहा है, उससे आम मतदाता का वोट का अधिकार छिन सकता है।
विधायक की चेतावनी— नाम नहीं लौटे तो आंदोलन और कोर्ट भी
हितेंद्र ठाकुर ने साफ कहा है कि यदि आघाड़ी की प्रतिनिधिमंडलों को मतदान केंद्रों पर मिले विवरण से संतुष्ट नहीं किया गया और पात्र मतदाताओं के नाम सूची में बहाल नहीं हुए, तो बविआ इस मुद्दे पर आंदोलन तक करेगी और जरूरत पड़ी तो न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा। वसई-विरार में उनकी पकड़ लंबे समय से मजबूत रही है, इसलिए इस मुद्दे को आगामी महानगरपालिका चुनावों से पहले बड़ी राजनीतिक लड़ाई का रूप लेने की आशंका जताई जा रही है।

























