खडकवासला बांध में पिछले कई दिनों से दूषित सीवेज मिलने की शिकायत का मुद्दा पुणे महानगरपालिका की मुख्य सभा में उठाया गया। राष्ट्रवादी कांग्रेस के नगरसेवक अमोल बालवडकर ने प्रशासन से प्रदूषण के स्रोत का तत्काल पता लगाने और उसे रोकने की मांग की। उन्होंने महापौर और मनपा आयुक्त को वॉटर प्यूरिफायर भेंट कर पेयजल की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की ओर ध्यान दिलाया।
विपक्ष के नेता निलेश निकम के नेतृत्व में अमोल बालवडकर और राष्ट्रवादी कांग्रेस के अन्य नगरसेवकों ने इस मामले पर प्रशासन से जवाबदेही की मांग की। उनका कहना था कि पुणेकरों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना महानगरपालिका की जिम्मेदारी है। बांध के पानी में सीवेज मिलने की शिकायत गंभीर है, क्योंकि दूषित जल का असर नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
खडकवासला बांध के पानी की गुणवत्ता पर चिंता
खडकवासला बांध पुणे के जलापूर्ति तंत्र का अहम हिस्सा है। ऐसे में बांध में सीवेज मिलने की शिकायत ने पानी की गुणवत्ता और उसकी नियमित निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। नगरसेवकों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने और जांच में देरी न करने की अपील की।
बालवडकर ने कहा कि नागरिकों को केवल आश्वासन देना पर्याप्त नहीं है। प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि दूषित पानी का स्रोत कहां है और उसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। जब तक कारण का पता नहीं चलता और समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक पेयजल की सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंता बनी रहेगी।
“पुणेकरों को आश्वासन नहीं, शुद्ध पानी चाहिए”
अमोल बालवडकर ने कहा कि पुणेकरों को आश्वासन नहीं, बल्कि शुद्ध पेयजल चाहिए। उनके अनुसार, नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे पर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता। पानी की गुणवत्ता की जांच, प्रदूषण के स्रोत की पहचान और जरूरी सुधारात्मक कार्रवाई तुरंत होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि शुद्ध पेयजल नागरिकों का अधिकार है और इस अधिकार की रक्षा के लिए आवाज उठाना जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है। वॉटर प्यूरिफायर भेंट करने के जरिए उन्होंने प्रशासन का ध्यान इस बात की ओर आकर्षित किया कि सुरक्षित पानी सुनिश्चित करने के लिए प्रतीकात्मक कदमों के साथ-साथ व्यावहारिक कार्रवाई भी जरूरी है।
सीवेज का स्रोत खोजकर तुरंत रोकने की मांग
नगरसेवकों ने मांग की कि खडकवासला बांध में दूषित सीवेज पहुंचने के स्रोत का तत्काल पता लगाया जाए। जांच में यह भी स्पष्ट किया जाए कि सीवेज किस रास्ते से जलस्रोत तक पहुंच रहा है और उसे रोकने के लिए कौन-से उपाय किए जा सकते हैं। स्रोत की पहचान के बाद संबंधित निकायों को समयबद्ध तरीके से सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने पेयजल की नियमित जांच कराने पर भी जोर दिया। पानी के नमूनों की गुणवत्ता की निगरानी से किसी संभावित समस्या का समय रहते पता लगाया जा सकता है। नागरिकों को पानी की स्थिति और जांच के निष्कर्षों की जानकारी देना भी जरूरी है, ताकि लोगों में अनावश्यक भ्रम न फैले और वे भरोसेमंद सूचना के आधार पर सावधानी बरत सकें।
नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम
दूषित पानी से स्वास्थ्य को खतरा न हो, इसके लिए प्रशासन को एहतियाती उपाय करने चाहिए—यह मांग भी सभा में रखी गई। नगरसेवकों के अनुसार, जांच और रोकथाम की कार्रवाई के दौरान पानी की गुणवत्ता पर विशेष नजर रखी जानी चाहिए। यदि जांच में किसी स्थान या आपूर्ति व्यवस्था में समस्या सामने आती है, तो संबंधित क्षेत्र के नागरिकों को समय पर सूचना दी जानी चाहिए।
बालवडकर ने यह भी मांग की कि मामले की जांच में जो लोग या संस्थाएं जिम्मेदार पाए जाएं, उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए। उनके मुताबिक, जवाबदेही तय किए बिना ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति रोकना मुश्किल होगा।



























