स्वतंत्रता सेनानी और समाजसेवी अयोध्या प्रसाद सिंह की 35वीं पुण्यतिथि तिलक मैदान में फिल्म अभिनेता हीरो राजन कुमार के आवास पर श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने उनके देशप्रेम, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान और समाजसेवा को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह की शुरुआत अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ भाजपा नेता शालिग्राम केसरी ने की। राधा केयर डेंटल क्लिनिक के डॉ. उदय शंकर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर शहीद स्मारक प्रबंध समिति, मुंगेर के अध्यक्ष देवकी मंडल, बाफ्टा के कोषाध्यक्ष मधुसूदन आत्मीय, अधिवक्ता सुनील कुमार, फिल्म अभिनेता हीरो राजन कुमार और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में लिया था हिस्सा
मुख्य अतिथि डॉ. उदय शंकर ने अपने संबोधन में कहा कि अयोध्या प्रसाद सिंह के मन में युवावस्था से ही देशभक्ति की भावना प्रबल थी। वर्ष 1942 में महात्मा गांधी के आह्वान पर जब ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ आंदोलन की लहर उनके इलाके तक पहुंची, तब अयोध्या बाबू अपने साथियों के साथ स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गए। उन्होंने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया और अपने जीवन को राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित रखा।
वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं है। उनके साहस, त्याग और देश के प्रति समर्पण से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। अयोध्या प्रसाद सिंह का जीवन भी इसी भावना का उदाहरण है—उन्होंने आजादी की लड़ाई में भाग लेने के साथ-साथ स्वतंत्रता के बाद अपने गांव और समाज के विकास के लिए काम किया।
शिक्षा के लिए दान की निजी जमीन
शहीद स्मारक प्रबंध समिति, हेरुदियारा, मुंगेर के अध्यक्ष देवकी मंडल ने बताया कि देश की आजादी के बाद अयोध्या बाबू ने अपने गांव में शिक्षा का प्रसार करने के उद्देश्य से अपनी निजी जमीन दान कर दी थी। इसी जमीन पर आज जगन्नाथ उच्च विद्यालय, टेटिया बंबर स्थित है। यह पहल बताती है कि वे शिक्षा को समाज की उन्नति का महत्वपूर्ण आधार मानते थे।
देवकी मंडल के अनुसार, अयोध्या प्रसाद सिंह ने मुंगेर के श्री कृष्ण सेवा सदन पुस्तकालय के निर्माण में भी आर्थिक सहयोग दिया था। पुस्तकालय की शिलापट्ट पर आज भी उनका नाम अंकित है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति और उनके योगदान को संजोने के लिए एक स्मारिका 26 जनवरी 2027 को प्रकाशित की जाएगी। इस स्मारिका के जरिए स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन और संघर्ष से जुड़ी जानकारी लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
समाजसेवा और पारिवारिक विरासत को किया याद
अधिवक्ता सुनील कुमार ने कहा कि अयोध्या प्रसाद सिंह के पोते, बाफ्टा से सम्मानित फिल्म अभिनेता हीरो राजन कुमार, अपने दादा की विरासत को संजोकर रखे हुए हैं। सुनील कुमार के मुताबिक, हीरो राजन कुमार हर वर्ष अपने आवास परिसर में अयोध्या बाबू की जयंती और पुण्यतिथि पर कवि सम्मेलन तथा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करते हैं। उन्होंने इसे अपने दादा के प्रति गहरे प्रेम और सम्मान का प्रतीक बताया।
अध्यक्षीय संबोधन में शालिग्राम केसरी ने अयोध्या बाबू के मानवीय और सामाजिक कार्यों को याद किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या प्रसाद सिंह ने मानव सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी। गांव-समाज के दिवंगत लोगों के अंतिम संस्कार की सुविधा के लिए उन्होंने अपनी जमीन पर शवदाह गृह बनवाया था। केसरी ने कहा कि ऐसे समाजसेवी और स्वतंत्रता सेनानी को याद करना सभी के लिए गौरव की बात है।
नई पीढ़ी तक पहुंचेगा स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति को जीवित रखना समाज की साझा जिम्मेदारी है। अयोध्या प्रसाद सिंह का जीवन देशभक्ति, शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और जनसेवा का संदेश देता है। उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम ने उपस्थित लोगों को उनके योगदान को याद करने और आने वाली पीढ़ियों तक उनकी प्रेरक विरासत पहुंचाने का अवसर दिया।
समारोह में शहीद स्मारक प्रबंध समिति के अध्यक्ष देवकी मंडल, बाफ्टा के कोषाध्यक्ष मधुसूदन आत्मीय, अधिवक्ता सुनील कुमार, हीरो राजन कुमार सहित दर्जनों गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने अयोध्या बाबू को श्रद्धा-सुमन अर्पित कर उनके कार्यों को नमन किया।



























