बिहार AIMIM में बगावत? राणा रंजीत ने खोला मोर्चा

बिहार में AIMIM नेता राणा रंजीत सिंह ने पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। जानिए वोट चोरी के मुद्दे पर उनकी नाराजगी, आदिल हसन से विवाद और ओवैसी की समावेशी राजनीति पर उठते सवाल।

बिहार AIMIM में अंदरूनी कलह, क्या टूटेगा राणा का साथ?

HIGHLIGHTS

  • वोट चोरी पर चुप्पी, ओवैसी से राणा के तीखे सवाल
  • AIMIM में आर-पार की लड़ाई, आदिल हसन से भिड़े राणा
  • ओवैसी की पार्टी में दरार? राणा के बयान से हलचल
  • AIMIM छोड़ेंगे राणा रंजीत? बिहार की सियासत में हलचल

बिहार में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। ढाका विधानसभा सीट से पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके राणा रंजीत सिंह ने पार्टी नेतृत्व के रवैये पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर विरोध कर रहे हैं, तब AIMIM सड़क पर उतरकर प्रदर्शन क्यों नहीं कर रही?

बता दें कि राणा रंजीत सिंह की नाराजगी ऐसे समय सामने आई है, जब उत्तर प्रदेश में आसिम वकार की नाराजगी को लेकर भी AIMIM चर्चा में रही। बिहार में राणा की आलोचना और पार्टी के एक अन्य नेता आदिल हसन के पलटवार ने संगठन के अंदर चल रही खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है। हालांकि, राणा रंजीत सिंह पार्टी छोड़ेंगे या संगठन में रहकर अपनी बात उठाते रहेंगे, इस पर अभी कोई स्पष्ट फैसला सामने नहीं आया है।

वोट चोरी के मुद्दे पर AIMIM से सवाल

बता दें कि राणा रंजीत सिंह ने पार्टी नेतृत्व से पूछा है कि विपक्ष के दूसरे दल जब चुनावी प्रक्रिया और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, तब AIMIM इस मुद्दे पर सक्रिय क्यों नहीं दिखती। उनके मुताबिक, ऐसे अहम राजनीतिक सवालों पर पार्टी की चुप्पी से उसके विरोधियों को यह कहने का मौका मिलता है कि AIMIM भाजपा के खिलाफ पर्याप्त मुखर नहीं है।

‘भाजपा की बी-टीम’ कहे जाने के आरोपों का AIMIM पहले भी विरोध करती रही है। राणा का तर्क है कि जब पार्टी विपक्ष के मुद्दों पर साथ दिखाई नहीं देती, तो उस आरोप को और हवा मिल सकती है। यह उनकी राजनीतिक राय है; पार्टी नेतृत्व की ओर से इस विवाद पर क्या जवाब दिया गया है, यह अलग से स्पष्ट होना बाकी है।

आदिल हसन के बयान से बढ़ा विवाद

बता दें कि राणा रंजीत सिंह की आलोचना के बाद बिहार AIMIM के नेता आदिल हसन ने उन पर पलटवार किया। रिपोर्ट के मुताबिक, हसन ने कहा कि जिसे पार्टी छोड़कर जाना है, वह जा सकता है, लेकिन बहानेबाजी नहीं करनी चाहिए। इसके जवाब में राणा ने आदिल हसन को चुनौती देते हुए कहा है कि बिहार से बंगाल तक AIMIM के नाम पर कथित उगाही के सबूत सामने लाने की बात कही है।

बता दें कि दोनों नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर हुई बयानबाजी ने पार्टी के अंदरूनी मतभेद को सार्वजनिक बहस में बदल दिया है। हालांकि, कथित उगाही से जुड़ा आरोप गंभीर है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि के बिना इसे तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता। फिलहाल विवाद के केंद्र में पार्टी की राजनीतिक सक्रियता, नेतृत्व की जवाबदेही और संगठन के भीतर असहमति को संभालने का तरीका है।

जाने कौन हैं राणा रंजीत सिंह?

बता दें कि राणा रंजीत सिंह पूर्वी चंपारण की ढाका विधानसभा सीट से AIMIM के उम्मीदवार रह चुके हैं। उनका संबंध बिहार के एक राजनीतिक परिवार से है। वह शिवहर के पूर्व सांसद दिवंगत सीताराम सिंह के पुत्र और मधुबन से भाजपा विधायक तथा बिहार सरकार के पूर्व मंत्री राणा रणधीर सिंह के छोटे भाई हैं। दोनों भाइयों की राजनीतिक राह अलग-अलग रही है और राणा रंजीत सिंह ने AIMIM के साथ अपनी पहचान बनाई है।

उनकी नाराजगी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि AIMIM बिहार में सीमांचल से आगे अपना जनाधार बढ़ाने और अलग-अलग समुदायों के नेताओं को साथ लाने की कोशिश करती रही है। ढाका जैसी मुस्लिम बहुल सीट से चुनाव लड़ने वाले एक गैर-मुस्लिम नेता की खुली आलोचना पार्टी की इस रणनीति पर सवाल खड़े कर सकती है।

AIMIM की समावेशी राजनीति के सामने चुनौती

बता दें कि AIMIM लंबे समय से अपनी पहचान को एक समुदाय तक सीमित न बताते हुए ‘जय भीम-जय मीम’ और सर्वसमाज की राजनीति की बात करती रही है। इस रणनीति में गैर-मुस्लिम नेताओं को आगे लाना भी शामिल रहा, ऐसे में राणा रंजीत सिंह का यह आरोप कि गैर-मुस्लिम नेताओं को चुनावी जरूरत के समय महत्व मिलता है, लेकिन संगठन और फैसलों में पर्याप्त जगह नहीं है।

हालांकि, एक नेता की नाराजगी से पूरी पार्टी की नीति या संगठन की स्थिति का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी और यह देखना अहम होगा कि AIMIM नेतृत्व इस असहमति पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या पार्टी के भीतर संवाद के जरिए विवाद सुलझाया जाता है।

क्या राणा रंजीत सिंह छोड़ेंगे AIMIM?

बता दें कि फिलहाल राणा रंजीत सिंह की ओर से पार्टी छोड़ने का स्पष्ट ऐलान सामने नहीं आया है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि वह निश्चित रूप से किसी दूसरे दल में शामिल होने जा रहे हैं। लेकिन उनकी सार्वजनिक आलोचना और आदिल हसन के साथ बढ़ती बयानबाजी ने इस संभावना पर चर्चा जरूर तेज कर दी है।

बिहार में AIMIM के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक ओर संगठन के भीतर मतभेदों को संभालना, दूसरी ओर सर्वसमाज की राजनीति के अपने दावे को व्यवहार में साबित करना। राणा रंजीत सिंह का अगला कदम और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया तय करेगी कि यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या बिहार में AIMIM की सियासी रणनीति पर असर डालता है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now