इंडिया गठबंधन के ‘दिल्ली चलो मार्च’ को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में एक बार फिर लोगों का सैलाब उमड़ा है और लोग लोकतंत्र को बचाने के लिए साथ खड़े हैं। एक्स पर साझा की गई पोस्ट में दीपके ने जंतर-मंतर को केवल एक प्रदर्शन स्थल नहीं, बल्कि विरोध की भावना का प्रतीक बताया।
दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर उन्हें लगता है कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाने या “छीनने” से आंदोलन खत्म हो जाएगा, तो यह उनकी भूल है। उनके मुताबिक, जंतर-मंतर एक जगह भर नहीं, बल्कि विरोध और लोकतांत्रिक आवाज उठाने की ऐसी भावना है जिसे कोई नहीं छीन सकता।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाने पर उठे सवाल
यह बयान ऐसे समय आया है जब जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित किए जाने को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज है। विपक्षी दलों ने इस फैसले और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। अभिजीत दीपके की टिप्पणी ने इसी बहस को नया राजनीतिक संदर्भ दिया है।
उनका संदेश मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित था कि विरोध का अधिकार किसी एक स्थान तक सीमित नहीं होता। प्रदर्शन स्थल बदलने से लोगों की असहमति या आंदोलन की भावना खत्म नहीं होती—यह बात उन्होंने अपने बयान में रेखांकित की।
SIR और CEC के मुद्दे पर विपक्ष का मार्च
सोमवार, 12 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन के नेताओं और सांसदों ने SIR तथा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) से जुड़े मुद्दों पर दिल्ली में मार्च किया। विपक्षी नेताओं ने बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट की ओर पैदल बढ़ना शुरू किया। मार्च का मकसद चुनाव आयोग से जुड़े मामलों को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराना और न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करना बताया गया।
विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की। रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका में ज्ञानेश कुमार सहित दोनों चुनाव आयुक्तों को प्रतिवादी बनाया गया है। राहुल गांधी समेत कुल 11 याचिकाकर्ता इस मामले में शामिल हैं।
19 दलों के नेता हुए शामिल
मार्च में इंडिया गठबंधन के 19 दलों के नेता शामिल हुए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने पैदल मार्च किया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव भी मार्च में मौजूद रहे।
कांग्रेस और सहयोगी दलों के नेताओं के साथ छात्र संगठन AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा भी मार्च में शामिल हुईं। विपक्षी दलों की इस भागीदारी को चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर साझा राजनीतिक विरोध के रूप में देखा जा रहा है।
पुलिस ने भगवान दास रोड पर रोका मार्च
सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ रहे नेताओं को पुलिस ने भगवान दास रोड पर रोक दिया। रास्ते में दो जगह बैरिकेड लगाए गए थे। घटनास्थल से मिली जानकारी के अनुसार, मार्च में शामिल कुछ कांग्रेस और अन्य दलों के कार्यकर्ताओं ने पहले बैरिकेड को हटा दिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के पास लगाए गए दूसरे बैरिकेड पर पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
मार्च के दौरान विपक्षी नेता एक ट्रक पर सवार होकर बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट की ओर रवाना हुए थे। इससे पहले नेता कॉन्स्टिट्यूशन क्लब से बसों में बाराखंबा रोड पहुंचे। वहां एकत्र होने के बाद उन्होंने पैदल मार्च शुरू किया। पुलिस की रोक के बाद मौके पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं और सुरक्षा बलों के बीच हलचल बनी रही।
विपक्ष का संदेश: विरोध की आवाज जारी रहेगी
इंडिया गठबंधन के मार्च और अभिजीत दीपके की प्रतिक्रिया के बीच एक साझा संदेश उभरकर सामने आया—विपक्ष चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात सार्वजनिक रूप से उठाना चाहता है। दीपके ने जंतर-मंतर को विरोध की भावना का प्रतीक बताते हुए कहा कि किसी स्थान को प्रदर्शन स्थल के रूप में हटाने से लोगों की आवाज समाप्त नहीं होती।
हालांकि, मार्च से जुड़े घटनाक्रम और याचिका पर आगे क्या कार्रवाई होती है, यह सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया और संबंधित पक्षों के जवाब पर निर्भर करेगा। फिलहाल, SIR, मुख्य चुनाव आयुक्त और जंतर-मंतर को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है।



























