BJP’s Major Strategic Meeting:दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली कांग्रेस और INDIA गठबंधन की महारैली से पहले भाजपा ने अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। आज गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की अध्यक्षता में पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्रियों की अहम बैठक हुई। इसमें विपक्ष के SIR विरोधी अभियान, चुनाव आयोग को लेकर लगाए जा रहे आरोपों, संगठन की आगामी गतिविधियों और वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर चर्चा की गई।
इस बैठक को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब कांग्रेस समेत INDIA गठबंधन के दल चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, बीजेपी भी विपक्ष के आरोपों का राजनीतिक जवाब देने और अपने संगठन को मजबूत करने की तैयारी में जुटी है।
भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्रियों की बैठक में किन मुद्दों पर हुआ मंथन?
भाजपा मुख्यालय में हुई बैठक में पार्टी के संगठनात्मक कामकाज, आगामी कार्यक्रमों और राजनीतिक परिस्थितियों की समीक्षा की गई। पार्टी नेतृत्व का जोर संगठन की गतिविधियों को प्रभावी बनाने और आने वाले चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर रहा।
बैठक में राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष के साथ स्मृति ईरानी, विनोद तावड़े, सुनील बंसल, बिप्लब कुमार देब, सतीश पूनिया, संजय भाटिया और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। चर्चा का एक प्रमुख विषय विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के बीच बीजेपी की रणनीति और आगामी चुनावी चुनौतियों की तैयारी रहा। पार्टी की ओर से संगठनात्मक प्राथमिकताओं और आगामी कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया गया। हालांकि, बैठक में लिए गए सभी निर्णयों का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
1 नवंबर की कांग्रेस महारैली पर भाजपा की नजर
दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर 2026 को कांग्रेस और INDIA गठबंधन की ओर से ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली आयोजित की जाएगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य SIR प्रक्रिया, कथित वोट चोरी और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष की चिंताओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है। रैली में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं के शामिल होने की संभावना है।
कांग्रेस ने इस आयोजन को बड़े राजनीतिक प्रदर्शन के रूप में तैयार किया है। ऐसे में भाजपा नेतृत्व इस रैली के राजनीतिक प्रभाव और विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों को लेकर सतर्क है। पार्टी की रणनीति में अपने पक्ष को जनता तक पहुंचाना, संगठनात्मक स्तर पर सक्रियता बढ़ाना और चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
SIR विवाद पर आमने-सामने BJP और कांग्रेस
मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR इस समय बीजेपी और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेता इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं और कथित अनियमितताओं की जांच तथा जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।वहीं, भाजपा विपक्ष के आरोपों का विरोध करते हुए अपने राजनीतिक अभियान के जरिए जवाब देने की कोशिश कर रही है।
पार्टी की ओर से ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा भी शुरू की गई है। इस अभियान के माध्यम से भाजपा विपक्ष की राजनीति पर सवाल उठाने और अपना पक्ष रखने में जुटी है। दोनों पक्षों के बीच जारी यह राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। खासकर रामलीला मैदान की महारैली के बाद SIR, चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दे राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में रह सकते हैं।
कांग्रेस का 10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य
कांग्रेस ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी की है। पार्टी की ओर से दावा किया गया है कि इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से करीब 10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, रैली में पार्टी के सांसदों, विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
INDIA गठबंधन के सहयोगी दल भी आयोजन में भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, 10 लाख लोगों की संख्या आयोजकों का लक्ष्य है, वास्तविक उपस्थिति का आंकड़ा रैली के बाद ही स्पष्ट होगा। कांग्रेस इस रैली के जरिए चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों का मुद्दा उठाना चाहती है। वहीं, बीजेपी के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष का यह अभियान जनता के बीच कितना प्रभाव पैदा करता है।
2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी भी अहम
नितिन नबीन की अध्यक्षता में हुई बैठक का दूसरा बड़ा पहलू आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियां हैं। पार्टी नेतृत्व ने वर्ष 2027 में होने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक गतिविधियों और चुनावी रणनीति पर चर्चा की। इन चुनावों के लिहाज से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा जैसे राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियां महत्वपूर्ण हैं।
आज भाजपा मुख्यालय में राष्ट्रीय महामंत्रियों के साथ बैठक कर आगामी कार्ययोजना एवं संगठन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की। https://t.co/Ue6b0DvpKr
— Nitin Nabin (@NitinNabin) October 29, 2026
इन राज्यों में पार्टी की संगठनात्मक स्थिति, स्थानीय मुद्दों और चुनावी समीकरणों के आधार पर आगे की रणनीति तैयार करना भाजपा के लिए अहम रहेगा। चुनावी तैयारियों के तहत बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाना और पार्टी के कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से लागू करना महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं हो सकती हैं। हालांकि, बैठक के बाद किसी विस्तृत चुनावी ब्लूप्रिंट की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
5 नवंबर से शुरू होने वाले कार्यक्रमों पर भी रहेगा फोकस
भाजपा की आगामी संगठनात्मक गतिविधियां भी पार्टी की रणनीति का हिस्सा हैं। आने वाले कार्यक्रमों के जरिए पार्टी अपने राजनीतिक संदेश को जनता तक पहुंचाने और कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने पर जोर दे सकती है। विपक्ष की महारैली के बाद राजनीतिक माहौल किस दिशा में जाता है, इस पर भी दोनों पक्षों की नजर रहेगी। बीजेपी के लिए संगठनात्मक मजबूती और चुनावी तैयारी के साथ-साथ विपक्ष के आरोपों का जवाब देना अहम होगा। दूसरी ओर, कांग्रेस और INDIA गठबंधन इस रैली के जरिए अपने मुद्दों को व्यापक समर्थन दिलाने की कोशिश करेंगे।
























