Find out who named the storm ‘Arnab’: बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवात अर्नब ने 28 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश और यनम के तटीय इलाकों में दस्तक दी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस तूफान ने बापटला और विशाखापट्टनम के बीच तट को पार किया। इस दौरान इसकी अधिकतम निरंतर हवा की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे तक दर्ज की गई, जबकि हवा के झोंके 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचे। तट पार करने के बाद तूफान की तीव्रता धीरे-धीरे कम होने लगी।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चक्रवातों के नाम कौन तय करता है और अर्नब नाम का चयन कैसे हुआ?
दरअसल, Cyclone Arnab का नाम बांग्लादेश ने सुझाया था। उत्तरी हिंद महासागर में बनने वाले चक्रवातों के लिए नामों की एक आधिकारिक सूची तैयार की जाती है। इसी सूची के निर्धारित क्रम के अनुसार इस तूफान को अर्नब नाम दिया गया। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (ESCAP) की क्षेत्रीय व्यवस्था के तहत इन नामों का इस्तेमाल किया जाता है।

अर्नब नाम का क्या है मतलब?
अर्नब नाम का संबंध बंगाली भाषा से बताया जाता है। इसका अर्थ महासागर या समुद्र होता है। बंगाल की खाड़ी में बने इस चक्रवात के लिए इस नाम का इस्तेमाल क्षेत्रीय नामकरण सूची के अनुसार किया गया है।
यह समझना जरूरी है कि चक्रवात का नाम उसकी ताकत, गति या उससे होने वाले नुकसान को देखकर नहीं रखा जाता। नाम पहले से तय सूची से चुना जाता है। इसलिए अर्नब नाम का इस्तेमाल होने का यह मतलब नहीं है कि तूफान की प्रकृति या गंभीरता का आकलन उसके नाम से किया जा सकता है।
चक्रवातों को नाम देने का प्रमुख उद्देश्य उनकी पहचान आसान बनाना है। इससे मौसम विभाग, प्रशासन, मीडिया और आम लोगों के बीच चेतावनियों और मौसम संबंधी सूचनाओं का संचार अधिक स्पष्ट तरीके से किया जा सकता है।

चक्रवातों का नामकरण कैसे होता है?
उत्तरी हिंद महासागर में बनने वाले चक्रवातों का नामकरण एक क्षेत्रीय व्यवस्था के अंतर्गत किया जाता है। इसमें भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका सहित कुल 13 देश शामिल हैं। इस क्षेत्र में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर आते हैं।
इस व्यवस्था में प्रत्येक सदस्य देश नामों का एक निर्धारित समूह सुझाता है। इन नामों को आधिकारिक सूची में शामिल किया जाता है और चक्रवातों को सूची में तय क्रम के अनुसार नाम दिया जाता है। जब किसी मौसम प्रणाली की तीव्रता निर्धारित मानदंडों तक पहुंचती है और उसे चक्रवात के रूप में नाम देने की स्थिति बनती है, तब संबंधित सूची से अगला नाम इस्तेमाल किया जाता है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन की आधिकारिक सूची में बांग्लादेश के सुझाए नामों में अर्नब भी शामिल है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य किसी एक देश के बजाय पूरे क्षेत्र में मौसम संबंधी सूचनाओं को एक समान पहचान देना है। आधिकारिक सूची और नामों का क्रम देखने के लिए WMO की उत्तरी हिंद महासागर चक्रवात नामकरण सूची देखी जा सकती है।
आंध्र प्रदेश में कहां पहुंचा Cyclone Arnab?
भारत मौसम विज्ञान विभाग के 28 अक्टूबर 2026 के बुलेटिन के मुताबिक, अर्नब ने आंध्र प्रदेश और यनम के तट को बापटला तथा विशाखापट्टनम के बीच पार किया। लैंडफॉल के दौरान तूफान का केंद्र नरसापुर के पूर्व-उत्तरपूर्व में लगभग 20 किलोमीटर, यनम से करीब 40 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम और काकीनाडा से लगभग 60 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था।
तूफान के तट पार करने के बाद यह आंध्र प्रदेश के तटीय हिस्सों की ओर बढ़ा। मौसम विभाग ने इसके आगे बढ़ने के साथ कमजोर होने का पूर्वानुमान दिया। हालांकि, किसी चक्रवात के लैंडफॉल के बाद भी तेज हवाओं और भारी बारिश का खतरा तुरंत खत्म नहीं होता।
ऐसे मौसम में स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से जारी ताजा निर्देशों पर ध्यान देना जरूरी होता है। IMD का आधिकारिक मौसम बुलेटिन इसकी स्थिति और गति से जुड़ी जानकारी का प्रमुख स्रोत है।
तूफान की रफ्तार कितनी थी और क्या हो सकता है असर?
अर्नब के तट पार करने के दौरान 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम निरंतर हवाएं और 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक के झोंके दर्ज किए गए। इतनी तेज हवाएं तटीय क्षेत्रों में पेड़ों, बिजली के खंभों, कमजोर इमारतों और अस्थायी ढांचों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
इसके साथ भारी बारिश होने पर निचले इलाकों में जलभराव, स्थानीय बाढ़ और यातायात में बाधा जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। समुद्र में ऊंची लहरों और तेज हवाओं के कारण मछुआरों तथा समुद्र के आसपास काम करने वाले लोगों के लिए भी जोखिम बढ़ जाता है। हालांकि, नुकसान की वास्तविक स्थिति इलाके, बारिश की मात्रा, हवा की अवधि और स्थानीय तैयारियों पर निर्भर करती है। इसलिए पूरे राज्य में एक समान प्रभाव मानना उचित नहीं होगा।

























