दिल्ली की तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेलों में विदेशी कैदियों की संख्या बढ़कर 766 हो गई है। RTI से मिले आंकड़ों के मुताबिक, इनमें 721 विचाराधीन कैदी हैं, जबकि केवल 37 विदेशी नागरिकों को सजा सुनाई गई है। देशवार आंकड़ों में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या भी सामने आई है।
दिल्ली की जेलों में बंद विदेशी नागरिकों को लेकर एक RTI रिपोर्ट में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। राजधानी की तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेलों में 31 अगस्त 2026 तक कुल 766 विदेशी नागरिक बंद थे। इनमें से अधिकांश ऐसे कैदी हैं, जिनके मामलों में अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विदेशी कैदियों में सिर्फ 37 लोगों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई थी।
इस रिपोर्ट में पाकिस्तान और बांग्लादेश के नागरिकों से जुड़े आंकड़े भी खास हैं। दिसंबर 2025 के देशवार आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली की जेलों में बंद विदेशी सजायाफ्ता कैदियों में 12 पाकिस्तानी और तीन बांग्लादेशी नागरिक शामिल थे। वहीं, बांग्लादेश के कुल 11 नागरिक जेलों में बंद दर्ज किए गए थे। ये आंकड़े विदेशी कैदियों की संख्या के साथ-साथ उनके कानूनी मामलों की स्थिति को भी समझने का अवसर देते हैं।
दिल्ली की जेलों में कितने विदेशी कैदी बंद हैं?
RTI से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली की जेलों में विदेशी कैदियों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है। वर्ष 2021 में यह संख्या 659 थी, जो दिसंबर 2025 तक बढ़कर 718 हो गई। इसके बाद 31 अगस्त 2026 तक विदेशी कैदियों की कुल संख्या 766 दर्ज की गई।
इन आंकड़ों की तुलना करने पर पता चलता है कि 2021 के मुकाबले अगस्त 2026 तक विदेशी कैदियों की संख्या में 107 की वृद्धि हुई। हालांकि, केवल कैदियों की संख्या बढ़ने से किसी खास राष्ट्रीयता के लोगों की आपराधिक गतिविधियों या दोषसिद्धि के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
766 विदेशी कैदियों में 721 विचाराधीन
दिल्ली की जेलों में बंद विदेशी नागरिकों के आंकड़ों का सबसे अहम पहलू विचाराधीन कैदियों की बड़ी संख्या है। 31 अगस्त 2026 तक कुल 766 विदेशी नागरिकों में से 721 विचाराधीन कैदी थे। यानी लगभग 94 फीसदी विदेशी कैदियों के मामलों में अंतिम न्यायिक फैसला नहीं आया था। इसके मुकाबले, केवल 37 विदेशी नागरिकों को सजा सुनाई गई थी। शेष कैदी अन्य श्रेणियों में दर्ज थे।
विचाराधीन कैदी वे होते हैं, जिनके खिलाफ मामला अदालत में लंबित रहता है और जिनकी दोषसिद्धि पर अंतिम फैसला नहीं हुआ होता। इसलिए जेल में बंद होने को अपने आप में अपराध साबित होने के बराबर नहीं माना जा सकता। किसी व्यक्ति की कानूनी स्थिति का आकलन उसके मामले और अदालत के फैसले के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
पाकिस्तानी नागरिकों से जुड़े आंकड़े क्या बताते हैं?
दिसंबर 2025 के आंकड़ों में पाकिस्तानी नागरिकों की मौजूदगी और उनकी कानूनी स्थिति से जुड़ी जानकारी सामने आई थी। उस समय दिल्ली की जेलों में बंद विदेशी सजायाफ्ता कैदियों में 12 पाकिस्तानी नागरिक शामिल थे। उपलब्ध देशवार आंकड़ों के अनुसार, विदेशी सजायाफ्ता कैदियों में पाकिस्तानी नागरिकों की संख्या सबसे अधिक थी।
एक अन्य अहम जानकारी विदेशी हिरासत में रखे गए लोगों को लेकर है। दिसंबर 2025 तक दिल्ली की जेलों में इस श्रेणी में दर्ज सभी सात विदेशी नागरिक पाकिस्तानी थे।
यह श्रेणी सामान्य विचाराधीन या सजायाफ्ता कैदियों से अलग होती है। इसमें प्रशासनिक अथवा निवारक आदेशों के तहत हिरासत में रखे गए लोग शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर संबंधित व्यक्तियों के मामलों की अलग-अलग कानूनी परिस्थितियों के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
बांग्लादेश के 11 नागरिक जेल में, तीन को मिली सजा
दिसंबर 2025 तक दिल्ली की जेलों में बांग्लादेश के कुल 11 नागरिक बंद थे। इनमें आठ विचाराधीन कैदी और तीन सजायाफ्ता कैदी शामिल थे। उस समय दिल्ली की जेलों में बंद 718 विदेशी नागरिकों की कुल संख्या में बांग्लादेशी नागरिकों की हिस्सेदारी लगभग 1.5 फीसदी थी।
नाइजीरियाई नागरिकों की संख्या से तुलना करें तो स्थिति काफी अलग दिखाई देती है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली की जेलों में नाइजीरिया के 361 नागरिक बंद थे। यह संख्या कुल विदेशी कैदियों के लगभग आधे के बराबर थी और बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या से करीब 33 गुना अधिक थी।
यह तुलना बताती है कि दिल्ली की जेलों में विदेशी नागरिकों की राष्ट्रीयता के आधार पर संख्या में काफी अंतर है। हालांकि, किसी देश के नागरिकों की जेलों में मौजूद संख्या को उस देश के सभी नागरिकों के व्यवहार या आपराधिक प्रवृत्ति का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता।
घुसपैठ और SIR की बहस के बीच आंकड़ों का क्या मतलब है?
देश में अवैध प्रवास, घुसपैठ और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राजनीतिक बहस के बीच बांग्लादेशी नागरिकों से संबंधित ये आंकड़े चर्चा का विषय बन सकते हैं।
लेकिन दिल्ली की जेलों में बंद बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या को भारत में रह रहे कुल बांग्लादेशी नागरिकों या अवैध प्रवासियों की संख्या का संकेतक नहीं माना जा सकता। जेलों से जुड़े आंकड़े केवल एक सीमित प्रशासनिक और न्यायिक स्थिति की जानकारी देते हैं। इनसे देश में अवैध रूप से रह रहे लोगों की कुल संख्या निर्धारित नहीं होती।
इसी तरह, विचाराधीन कैदियों की संख्या को दोषसिद्धि के आंकड़ों से अलग समझना जरूरी है। अंतिम फैसला आने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी मान लेना न्यायिक प्रक्रिया की मूल भावना के विपरीत होगा।

























