SIR पर सुप्रीम कोर्ट में आयोग का बड़ा खुलासा

SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि तीनों आदेश सर्वसम्मति से लिए गए। जानिए Form 6, सुनवाई और ECINet पर आयोग की सफाई।

ज्ञानेश कुमार पर आरोपों का चुनाव आयोग ने दिया जवाब

HIGHLIGHTS

  • Form 6 विवाद पर चुनाव आयोग ने तोड़ी चुप्पी
  • CEC को हटाने की मांग पर आयोग का जवाब
  • SIR के तीनों आदेशों पर आयोग का बड़ा दावा
  • सुप्रीम कोर्ट में आयोग ने बताई SIR की पूरी प्रक्रिया

वोटर लिस्ट की जांच यानी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठे सवालों पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। आयोग ने हलफनामे में उन आरोपों को खारिज किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने SIR से जुड़े फैसले अकेले लिए। आयोग के मुताबिक, इस प्रक्रिया से संबंधित तीनों आदेश सभी सदस्यों की सहमति से जारी किए गए थे।

हलफनामे में आयोग ने Form 6 में कथित बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया और सुनवाई के नियमों पर भी स्पष्टीकरण दिया। आयोग ने कहा कि फाइल पर किसी आयुक्त की टिप्पणी, सवाल या सुझाव को अपने आप आयोग का अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। दशहरे की छुट्टियों के कारण फिलहाल संक्षिप्त जवाब दाखिल किया गया है। आयोग ने मामले में विस्तृत बिंदुवार जवाब देने की अनुमति भी मांगी है।

SIR के तीनों आदेश सर्वसम्मति से जारी हुए: चुनाव आयोग

चुनाव आयोग के अनुसार, जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में SIR को लेकर जारी किए गए तीनों आदेश आयोग ने सर्वसम्मति से मंजूर किए थे। हलफनामे को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी मिली है।

आयोग ने फैसले लेने की प्रक्रिया समझाते हुए कहा कि संबंधित फाइल पहले एक चुनाव आयुक्त, फिर दूसरे आयुक्त और अंत में मुख्य चुनाव आयुक्त के पास जाती है। जरूरत पड़ने पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भी मंजूरी ली जाती है और बाद में उसे फाइल में दर्ज किया जाता है।

आयोग का कहना है कि फाइल पर विचार-विमर्श के दौरान किसी सदस्य की टिप्पणी या सुझाव निर्णय की अंतिम स्थिति नहीं बताता। इसलिए किसी एक टिप्पणी के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि फैसला किसी एक अधिकारी या आयुक्त ने लिया था।

28 जुलाई के आदेश और काम के बंटवारे पर आयोग की सफाई

हलफनामे में आयोग ने 28 जुलाई के एक आदेश का भी उल्लेख किया। आयोग के मुताबिक, काम के बंटवारे से संबंधित यह आदेश प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अतिरिक्त सचिव ने जारी किया था। अगले दिन दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस विषय पर कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा।

आयोग ने बताया कि 30 जुलाई को दोनों चुनाव आयुक्तों के संयुक्त निर्देश के बाद यह आदेश लागू नहीं हुआ। आयोग ने इस घटनाक्रम को हलफनामे में शामिल करते हुए आदेश की स्थिति स्पष्ट की है।

Form 6 में बदलाव नहीं, घोषणापत्र अलग दस्तावेज

Form 6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नया नाम जुड़वाने के लिए किया जाता है। इस फॉर्म में बदलाव किए जाने के आरोपों पर चुनाव आयोग ने कहा कि Form 6 में कोई संशोधन नहीं किया गया है। आयोग के मुताबिक, फॉर्म में बदलाव करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि SIR के दौरान इस्तेमाल होने वाला घोषणापत्र Form 6 से अलग दस्तावेज है। हालांकि, ऑनलाइन आवेदन में दोनों को जिस तरह दिखाया जा रहा था, उससे यह भ्रम पैदा हो सकता था कि Form 6 में बदलाव किया गया है।

इस भ्रम को दूर करने के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था में Form 6 और घोषणापत्र को अलग-अलग दिखाया गया है। आयोग के अनुसार, यह प्रस्तुति कागजी फॉर्म में मौजूद व्यवस्था के अनुरूप है।

पुराने रिकॉर्ड का मिलान न होने पर क्या होगा?

SIR के दौरान कुछ मतदाताओं के पुराने रिकॉर्ड का मौजूदा मतदाता सूची से मिलान नहीं हो पाया है। इस स्थिति में हर मतदाता को सुनवाई के लिए कार्यालय बुलाने की जरूरत नहीं होगी, ऐसा आयोग ने हलफनामे में कहा है।

आयोग के मुताबिक, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ऐसे मतदाताओं के घर जाकर जरूरी दस्तावेज जुटाएंगे। सुनवाई केवल विशेष मामलों में होगी। जहां संभव होगा, वहां ऑनलाइन सुनवाई को प्राथमिकता दी जाएगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य उन मतदाताओं की जानकारी और दस्तावेजों की जांच करना है जिनके पुराने रिकॉर्ड का मिलान नहीं हो पा रहा। आयोग ने कहा है कि सुनवाई सभी मामलों में अनिवार्य नहीं होगी।

ECINet पर नाम जोड़ने या हटाने के लिए ERO का आदेश जरूरी

ECINet सिस्टम को लेकर आयोग ने कहा कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के आदेश के बिना मतदाता सूची में कोई नाम न जोड़ा जाता है और न हटाया जाता है। यानी नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया तय प्रशासनिक मंजूरी के तहत होती है।

आयोग ने इस प्रक्रिया की जांच के लिए IIT और IISc के विशेषज्ञों की एक समिति भी बनाई है। समिति का काम सिस्टम और उससे जुड़ी प्रक्रिया की समीक्षा करना है।

CEC को हटाने की मांग पर आयोग का जवाब

मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज पर रोक लगाने से संबंधित याचिका पर आयोग ने कहा कि ऐसी मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। आयोग के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया जैसी है।

आयोग ने यह भी कहा कि उसने अपनी कोई आंतरिक फाइल या नोट मीडिया को जारी नहीं किया था। हलफनामे में दिए गए जवाब के अलावा आयोग ने मामले में विस्तृत बिंदुवार पक्ष रखने की अनुमति मांगी है।

Sandhya Samay News

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