छत पर पेड़, अंदर पानी — जंगल की ट्रेनें बनीं मिस्ट्री

Old trains hidden in the forest: जंगल में छिपी पुरानी ट्रेनें दिखाने वाला वीडियो वायरल हो गया है। मकड़जाल में जकड़ी सीटें, पेड़ों से ढके डिब्बे और दशकों पुराने रेल इंजन की पूरी कहानी यहां पढ़ें।

जंगल में छिपी मिलीं 100 साल पुरानी ट्रेनें, वीडियो हुआ वायरल

HIGHLIGHTS

  • पेड़ों से ढकी ट्रेनें जंगल में मिलीं, यकीन नहीं होगा
  • 100 साल पुरानी ट्रेनें जंगल में कैसे पहुंचीं? लोग हैरान
  • ये ट्रेनें नहीं, समय की कब्र है — वीडियो हुआ वायरल
  • जंगल में छिपी ट्रेनें, लोग बोले — हटाई क्यों नहीं गईं?

Old trains hidden in the forest: कल्पना कीजिए — घने पेड़ों के बीच से गुजरते हुए अचानक सामने खड़ी मिल जाए एक ट्रेन, जिसकी छत तक हरियाली ने कब्जा कर रखा हो और डिब्बों के दरवाजे दशकों से बंद पड़े हों। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा ही वायरल वीडियो लोगों का ध्यान खींच रहा है, जिसमें एक यूट्यूबर दावा करता है कि जंगल की गहराई में उसे 100 साल पुरानी ट्रेनें छिपी हुई मिलीं। इन जंगल में छिपी पुरानी ट्रेनों की वीडियो देखकर यूजर्स बार-बार यही सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर इतने भारी रेल डिब्बे इस अंजान जगह तक आए कहां से?

वायरल वीडियो में क्या दिखा?

‘Creepy law’ नाम के यूट्यूब चैनल पर अपलोड हुए इस वीडियो में एक शख्स बताता है कि वह विशेष रूप से इस जंगल में दफ्न पुरानी रेलगाड़ियों की तलाश में निकला है। थोड़ी दूर चलने के बाद पेड़ों के बीच से लोहे के ढांचे झांकने लगते हैं। शख्स बताता है कि इनमें से कुछ रेल इंजन वह पहले भी अपने वीडियो में दिखा चुका है, इसलिए इस बार वह यात्री डिब्बों को अंदर से दिखाना चाहता है।

एक डिब्बे के बंद दरवाजे के पास पहुंचकर वह पहले उसका नंबर कैमरे में दिखाता है। आसानी से अंदर घुसने का रास्ता न मिलने पर वह किसी दूसरे खुले हिस्से से डिब्बे के भीतर दाखिल होता है और वहीं से शुरू होती है असली हैरानी।

डिब्बों के अंदर का हाल

अंदर पहुंचते ही कैमरे में दिखता है वज्रपात करा देने वाला नजारा. फर्श पर धूल की मोटी परत, सीटों पर बरसों पुराने मकड़जाल और खिड़कियों से बहकर अंदर आए पत्ते यहां-वहां बिखरे हुए। कई जगह बारिश का पानी जमा होने से लोहे पर जंग की परतें बैठ चुकी हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह कि पुराने सीलिंग फैन अब भी छत से लटक रहे हैं।

शख्स के मुताबिक यह डिब्बा किसी लोकल ट्रेन का है, जिसमें वॉशरूम जैसी सुविधा शायद ही कभी रही हो। यानी यह कोई सामान ढुलाई वाला डिब्बा नहीं, बल्कि यात्रियों के बैठने का हिस्सा था।

पेड़-पौधों में इतनी दबी ट्रेन कि पहचान मुश्किल

आगे बढ़ने पर वीडियो में वह ट्रेन आती है जो लगभग पूरी तरह हरियाली में लिपटी है। ऊपर से देखने पर यह एक झाड़ीदार टीला लगता है, लेकिन नीचे झांकने पर ट्रेन के लोहे के पहिए साफ दिखते हैं। शख्स दर्शकों को ब्रेक सिस्टम, धातु के फ्रेम और अंडरगियर भी दिखाता है। कुछ पहिए पटरियों से उतरे हुए हैं, जिससे साफ अंदाजा होता है कि इस रैक को यहां बरसों पहले खड़ा कर दिया गया था और तब से किसी ने इसे छुआ तक नहीं।

गार्ड केबिन में मिला कंपनी के नाम वाला पुराना पंखा

खोज के दौरान शख्स एक डिब्बे के गार्ड केबिन तक भी पहुंचता है। वहां उसे पुरानी कुर्सी, बल्ब होल्डर, स्विच और एक पंखा मिलता है, जिस पर बनी कंपनी का नाम आज भी पढ़ा जा सकता है। इसके अलावा उसे कुछ ऐसे औजार भी दिखते हैं, जिनका इस्तेमाल कभी रेलवे के मेंटेनेंस काम में होता था। पूरा मंजर ऐसा है मानो किसी ने पूरी रेलगाड़ी को समय के कक्ष में बंद कर दिया हो।

छत पर चढ़कर दिखा लंबा रैक और दो इंजन

फिर शख्स एक डिब्बे की छत पर चढ़ जाता है। ऊंचाई से पूरा रैक काफी लंबा दिखता है और दूर दो बड़े इंजन-से जैसे ढांचे नजर आते हैं, जिन्हें देखकर उसकी हैरानी का ठिकाना नहीं रहता। हालांकि कमजोर पड़ चुकी छत के चलते वह वहां ज्यादा देर नहीं रुकता। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि जंग लगे लोहे और अस्थिर पहियों के बीच ऐसी जगहों पर जाना जोखिम भरा हो सकता है।

ये ट्रेनें जंगल में आईं कैसे? यूजर्स में छिड़ी बहस

वीडियो के अंत में शख्स का कहना है कि इस इलाके में ऐसी और भी पुरानी ट्रेनें और डिब्बे खड़े हैं, जिन्हें वह अगले वीडियो में दिखाएगा। कमेंट सेक्शन में लोगों के सवालों की भरमार है — कुछ पूछ रहे हैं “इन्हें यहां लाया कौन गया?” तो कोई लिख रहा है “इतने साल बाद भी इन्हें हटाया क्यों नहीं?”

दरअसल, दुनिया में ऐसी कई जगहें हैं जहां पुरानी ट्रेनों को छोड़ दिया जाता है। थाईलैंड के कांचनबुरी के जंगल में दशकों से जंग खा रही ट्रेनों का एक पूरा ग्रेवयार्ड है, जहां पेड़ों ने डिब्बों को निगल रखा है। इसी तरह बोलीविया के ऊयूनी में रेगिस्तान के बीच खड़ी पुरानी स्टीम इंजनों की जगह ‘ट्रेन सेमेट्री’ के नाम से मशहूर है। भारत में भी मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के पास एक ऐसा यार्ड है, जहां सौ से ज्यादा साल पुराने रेल बोगी सड़ों-गलों पड़े हैं।

Sandhya Samay News

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