नक्सली खत्म, लेकिन खतरा बाकी? बस्तर से पीएम मोदी का बड़ा संदेश

PM Modi in Bastar: बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दिवाली मनाते हुए पीएम मोदी ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान, जवानों के बलिदान और क्षेत्र में विकास की बात कही। उन्होंने कहा कि हिंसा खत्म होने के बाद अब वैचारिक स्तर पर भी चुनौती का सामना करना होगा।

बस्तर में जवानों संग दिवाली, पीएम मोदी ने ‘दिमागी नक्सल’ पर क्या कहा?

HIGHLIGHTS

  • जवानों संग दिवाली मनाकर पीएम मोदी ने विरोधियों पर साधा निशाना
  • नक्सल हिंसा से विकास तक, बस्तर में पीएम मोदी ने गिनाईं बड़ी बातें
  • बस्तर में बदले हालात, पीएम मोदी ने नक्सलवाद पर क्या दावा किया?
  • दिवाली पर बस्तर पहुंचे मोदी, सुरक्षा बलों के लिए कही ये बड़ी बात

PM Modi in Bastar: छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों के बीच दीपावली मनाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में मिली सफलता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जवानों के बलिदान और समर्पण से बस्तर में नक्सली आतंक का प्रभाव समाप्त हुआ है और क्षेत्र में विकास का नया दौर शुरू हुआ है। साथ ही उन्होंने चेताया कि हिंसा कम होने के बावजूद ऐसी विचारधारा और लोगों को उकसाने वाली गतिविधियों के प्रति सतर्क रहना जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके साथ बिताई गई हर दिवाली यादगार रही है। इस बार बस्तर आकर जवानों के साथ त्योहार मनाना उनके लिए खास है। कभी नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे इस इलाके में सुरक्षा बलों की कार्रवाई और लोगों की भागीदारी के कारण हालात बदले हैं। उनके अनुसार, अब बस्तर में शांति और विकास की नई संभावनाएं खुल रही हैं।

‘देश जवानों के बलिदान का ऋणी रहेगा’

मोदी ने आंतरिक सुरक्षा के लिए जान देने वाले CRPF, BSF, ITBP, SSB, IRB और राज्य पुलिस के जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने बस्तर फाइटर्स जैसी विशेष इकाइयों के कमांडो और महिला जवानों की भूमिका की भी सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि माओवादी आतंक के खिलाफ संघर्ष लंबा और कठिन रहा है। इसमें कई जवानों ने अपनी जान गंवाई, जबकि विस्फोटों और अन्य हमलों में अनेक कर्मियों को गंभीर चोटें आईं।

उन्होंने नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आम लोगों के दर्द का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, एक समय देश के करीब 20 राज्यों के 230 से अधिक जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे। कई इलाकों में डर का माहौल इतना गहरा था कि शाम होते ही जनजीवन ठहर जाता था। नक्सलियों ने लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों, यहां तक कि मतदान में हिस्सा लेने की स्वतंत्रता को भी प्रभावित किया।

नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में सुरक्षा बलों की भूमिका

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक साल में ड्यूटी के दौरान किसी CRPF जवान की मौत न होना सुरक्षा व्यवस्था में आए बदलाव का संकेत है। उन्होंने इसे सरकार की नीतियों और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति से जोड़ते हुए सुरक्षा बलों की सतर्कता और तैयारी को इसका अहम कारण बताया।

बस्तर में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान मोदी ने कहा कि हिंसक गतिविधियों का असर घटा है, लेकिन इसके साथ ही ऐसी सोच के खिलाफ भी काम करना होगा जो लोगों को भड़काती या विकास के रास्ते में बाधा डालती है। उन्होंने इस चुनौती को ‘दिमागी नक्सलवाद’ का नाम दिया। यह टिप्पणी राजनीतिक बहस का विषय भी बन सकती है, क्योंकि प्रधानमंत्री ने इसे केवल कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि विचारों से जुड़ी लड़ाई के रूप में पेश किया।

विकास, गरीबी और ‘राष्ट्र प्रथम’ का संदेश

मोदी ने कहा कि राष्ट्र प्रथम की भावना से काम करने पर देश की सुरक्षा मजबूत होती है और गरीब तथा वंचित लोगों तक विकास के अवसर पहुंचते हैं। उन्होंने नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ कार्रवाई के साथ गरीबी कम करने की दिशा में हुए काम का भी उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री ने विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में भारत में 50 करोड़ लोग भीषण गरीबी से बाहर आए हैं। उन्होंने कहा कि दशकों तक गरीबी हटाने के नारे दिए गए, लेकिन बड़े पैमाने पर बदलाव संभव नहीं हुआ। उनके मुताबिक, हाल के वर्षों में योजनाओं और प्रयासों से यह बदलाव सामने आया है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने दिवाली को परिवार और अपनापन बांटने का पर्व बताया। उन्होंने जवानों से कहा कि जो लोग देश की सीमाओं और भीतर सुरक्षा में तैनात हैं, वे भी उनके परिवार का हिस्सा हैं। उनका संदेश था कि देश के रक्षक त्योहार पर घर से दूर जरूर रहते हैं, लेकिन राष्ट्र उनके योगदान को याद रखता है।

पीएम मोदी ने जवानों के साथ कहां-कहां मनाई दिवाली?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 से सुरक्षा बलों के साथ दीपावली मनाने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में जाते रहे हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उन्होंने 2014 में सियाचिन, 2015 में पंजाब के खासा, 2016 में हिमाचल प्रदेश के सुमदो और 2017 में जम्मू-कश्मीर की गुरेज घाटी में जवानों के साथ त्योहार मनाया।

इसके बाद 2018 में वह उत्तराखंड के हर्षिल, 2019 में राजौरी, 2020 में जैसलमेर के लोंगेवाला बॉर्डर पोस्ट, 2021 में नौशेरा, 2022 में कारगिल और 2023 में हिमाचल प्रदेश के लेप्चा पहुंचे। 2024 में उन्होंने गुजरात के कच्छ क्षेत्र में सुरक्षा बलों के साथ दिवाली मनाई। 2025 में प्रधानमंत्री ने गोवा और कारवार के पास पश्चिमी समुद्री सीमा पर INS विक्रांत में नौसेना के जवानों के साथ दीपावली मनाई।

बस्तर में इस साल का संबोधन नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई, सुरक्षा बलों के बलिदान और क्षेत्रीय विकास के संदेश पर केंद्रित रहा। प्रधानमंत्री ने जहां अभियान में मिली सफलता को रेखांकित किया, वहीं यह भी कहा कि शांति बनाए रखने और विकास को आगे बढ़ाने के लिए सतर्कता जारी रहनी चाहिए।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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