ऋषी तिवारी
आप पार्टी ने दिल्ली में बीजेपी सरकार के एक साल के कार्यकाल को लेकर बड़ा हमला बोला है। पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को निशाने पर लेते हुए उनसे दर्जन भर तीखे सवाल पूछे हैं। उन्होंने सरकार की कथित विफलताओं और लापरवाही का हवाला देते हुए जवाब देने की मांग की है।
जनकपुरी ‘डेथ पिट’ पर सीधा हमला
सौरभ भारद्वाज ने सबसे पहले जनकपुरी में हुई हादसे का हवाला दिया, जहां सड़क में बने गड्ढे में गिरने से एक बाइक सवार युवक की मौत हो गई। उन्होंने सीएम से सवाल पूछा कि जनकपुरी में सड़क में खोदे गए गड्ढे में गिरकर हुई बाइक सवार युवक की मौत पर सरकार के मंत्रियों ने झूठ क्यों बोला कि सुरक्षा के सारे इंतजाम थे? जबकि स्पष्ट है कि यह मौत सरकार की लापरवाही के चलते हुई।
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उन्होंने आरोप लगाया कि हादसे के बाद मंत्रियों और दिल्ली पुलिस ने क्राइम सीन के साथ छेड़छाड़ की। सौरभ भारद्वाज ने पूछा, “सरकार के मंत्रियों और दिल्ली पुलिस ने जनकपुरी ‘डेथ पिट’ के क्राइम सीन पर लीपापोती क्यों की? गरीब मजदूर को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन मुख्य ठेकेदार को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिन 6 पुलिस थानों ने पीड़ित परिवार की शिकायत दर्ज नहीं की, उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई और मुख्यमंत्री पीड़ित परिवारों से मिलने क्यों नहीं गईं?
‘नकली यमुना’ और प्रदूषण पर घिरी सरकार
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने तीखे हमले में सौरभ भारद्वाज ने ‘नकली यमुना’ के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने पूछा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने ‘नकली यमुना’ क्यों बनाई? उन्होंने सवाल किया, “नकली यमुना के लिए फिल्टर्ड पानी की मेनलाइन को काटकर पानी लाने का आधिकारिक निर्देश किसने दिया?”
प्रदूषण के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार घेरा। उन्होंने पूछा कि दिवाली की रात AQI मॉनिटरिंग स्टेशन बंद क्यों किए गए और वॉटर स्प्रिंकलर का इस्तेमाल करके असली एक्यूआई आंकड़ों के साथ हेरफेर क्यों की गई? साथ ही, केंद्र सरकार के विशेषज्ञों की राय के बावजूद कृत्रिम बारिश पर पैसा खर्च करने का फैसला भी उन्होंने सवालों के घेरे में लिया।
प्राइवेट स्कूलों की फीस और ‘सांठ-गांठ’ का आरोप
सौरभ भारद्वाज ने निजी स्कूलों में फीस वृद्धि के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने पूछा कि कितने प्राइवेट स्कूलों ने बढ़ी हुई फीस माता-पिता को वापस दी है? सरकार के वादे और कोर्ट के आदेश के बावजूद प्राइवेट स्कूलों की ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है? उन्होंने तीखा सवाल पूछा कि मुख्यमंत्री और भरत अरोड़ा के बीच क्या सांठ-गांठ है? भरत अरोड़ा प्राइवेट स्कूल एक्शन कमेटी के चेयरमैन भी हैं और बीजेपी की एकेडमिक सेल के प्रमुख भी। मुख्यमंत्री इसे कैसे समझाएंगी?”
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बस मार्शल और अस्पतालों का निजीकरण
अंत में, सौरभ भारद्वाज ने सरकार के चुनावी वादों को याद कराते हुए पूछा कि बीजेपी के वादा करने के बावजूद 10 हजार बस मार्शलों की नौकरी अब तक बहाल क्यों नहीं की गई? साथ ही, हजारों करोड़ रुपए से बने सरकारी अस्पतालों का निजीकरण करने के फैसले पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता इन सभी मुद्दों पर साफ जवाब चाहती है और मुख्यमंत्री से इन सवालों का विस्तार से जवाब देने की मांग की है।






















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