Maharashtra News: महाराष्ट्र के नागपुर में किन्नर समाज के भीतर एक अनोखा और गंभीर विवाद सामने आया है। हत्या के आरोपी और हाल ही में जेल से रिहा हुए किन्नर उत्तम बाबा सेनापति को ‘पीठाधीश्वर’ की गद्दी पर बिठाने के विरोध में शहर भर के किन्नर गुट सड़कों पर उतर आए हैं। विरोध इतना तेज हुआ कि पुलिस को कई इलाकों में भारी बंदोबस्त करना पड़ा और बुधवार देर रात से शहर का इलाका एक पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।
VHP ऑफिस और होटल के बाहर जमा हुई भीड़
बताया जा रहा है कि गुरुवार को महामंडलेश्वर हिमांगी सखी के हाथों उत्तम बाबा की ताजपोशी का कार्यक्रम रखा गया था। जैसे ही इस खबर ने जोर पकड़ा, बुधवार रात्रि से ही बड़ी संख्या में किन्नर पारडी स्थित विश्व हिंदू परिषद (VHP) कार्यालय के बाहर जमा हो गए। यहां जमकर नारेबाजी हुई और कार्यक्रम को रद्द करने की मांग उठाई गई।
इसके अलावा, जैसे ही हिमांगी सखी के रामदासपेठ स्थित होटल तुली इम्पीरियल में ठहरने की जानकारी मिली, तो बुधवार दोपहर से ही किन्नरों के कई गुट वहां पहुंचने लगे। शाम तक होटल के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। दोनों जगह तनाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने अतिरिक्त बल तैनात कर दिया और देर रात तक अधिकारी मोर्चा संभाले हुए थे।
क्यों है उत्तम बाबा के खिलाफ इतनी नाराजगी?
विरोध प्रदर्शन कर रहे किन्नर समाज के लोगों का कहना है कि एक हत्या के आरोपी को इतने बड़े धार्मिक और सामाजिक पद पर बैठाना समाज की गरिमा के खिलाफ है। दरअसल, उत्तम बाबा का नाम पहले भी कई विवादों में रहा है। करीब 10 साल पहले नागपुर के किन्नर समाज में उसकी दबदबेदार हिस्सेदारी थी, लेकिन धंधे की पैसों की बंटवारे को लेकर गुटबाजी शुरू हो गई।
इसी रंजिश के चलते वर्ष 2019 में उत्तम बाबा पर अपने ही चेले ‘चमचम गजभिये’ की हत्या करने का आरोप लगा था। इस मामले में उसे गिरफ्तार किया गया और करीब सात साल जेल में बिताने के बाद हाल ही में उसे जमानत मिली है। जेल से रिहा होने के कुछ ही दिनों बाद उसे पीठाधीश्वर बनाने की तैयारी ने समाज के गुस्से में आग ही के काम किया।
समाज के चारों बड़े डेरे एकजुट
नागपुर शहर में किन्नरों के चार प्रमुख डेरे हैं और सभी इस फैसले के खिलाफ एकजुट नजर आ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि समाज के भीतर सहमति बनाए बिना और परंपराओं को ताक पर रखकर ऐसा कोई फैसला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किन्नर समाज की प्रमुख नेता विद्या कांबले ने भी इस कार्यक्रम की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि समाज की गरिमा और मर्यादा को ध्यान में रखते हुए ही ऐसे निर्णय लिए जाने चाहिए।























