Nath Sammelan Nashik : नाथ पंथ की अमर विरासत और वैचारिक परंपरा को समर्पित दो दिवसीय भव्य ‘नाथ सम्मेलन’ का आयोजन 10 और 11 मई को निफाड में किया जा रहा है। अखिल भारतीय श्री स्वामी समर्थ गुरुपीठ (त्र्यंबकेश्वर) और श्री स्वामी समर्थ सेवा केंद्र (निफाड) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महाकुंभ का उद्घाटन संकेश्वर मठ के जगद्गुरु शंकराचार्य सच्चिदानंद अभिनव विद्या नरसिंह भारती के करकमलों से होगा। आयोजन के स्वागताध्यक्ष वि. दा. व्यवहारे और समन्वयक मिलिंद चवंडके ने बताया कि वैनतेय विद्यालय के प्रांगण में होने वाले इस आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
शोभायात्रा में निकलेगी नवनाथों की धरती की चादर
सम्मेलन के पहले दिन (10 मई) सुबह 6 बजे अभिषेक और नाथपंथी ‘होम-हवन’ के साथ आध्यात्मिक शुरुआत होगी। इसके बाद सुबह 8 बजे एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस यात्रा का मुख्य आकर्षण नवनाथों के जागृत स्थानों की पवित्र मृत्तिका और साढ़े तीन शक्तिपीठों के कुंकुम से भरे कलश होंगे, जिन्हें महिलाएं मंगल कलश के रूप में धारण करेंगी। राज्यभर से आए हजारों श्रद्धालु इस यात्रा में सम्मिलित होंगे। सुबह 11 बजे जगद्गुरु शंकराचार्य के हाथों सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन होगा। इस दौरान त्र्यंबकेश्वर गुरुपीठ के चंद्रकांत मोरे और सांसद भास्कर भगरे प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
नाथ पंथ के विभिन्न आयामों पर चर्चा
उद्घाटन के बाद दोपहर के सत्र में देशभर से आए विद्वान नाथपंथ के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालेंगे। डॉ. कुशल नाथ मित्र ‘नाथ पंथ और मच्छिंद्रनाथ’ पर, भूषण स्वामी ‘नाथ संप्रदाय और समर्थ संप्रदाय के अंतसंबंध’ पर और डॉ. निता पाटिल ‘नाथपंथ और स्त्री शक्ति’ पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगी। इसके अलावा अनिल बैंकिल ‘आदिनाथ तंत्रविषय’ पर मार्गदर्शन देंगे।
सम्मेलन के दूसरे दिन (11 मई) सुबह 9 बजे से वैचारिक सत्र जारी रहेंगे। इस दौरान मिलिंद बडके, ब्रह्मानंद स्वामी, महत शिव रूपानंद स्वामी, टी. एन. परदेशी और श्रीपाद कुलकर्णी जैसे विद्वान नाथ संप्रदाय और वारकरी संप्रदाय के बीच के गहरे संबंधों पर चर्चा करेंगे।
21 हजार श्रद्धालु करेंगे सामूहिक नवनाथ पारायण
इस दो दिवसीय आध्यात्मिक आयोजन का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक आकर्षण दोपहर 2:30 बजे रहेगा। इस समय लगभग 21 हजार महिला और पुरुष श्रद्धालु एक साथ बैठकर ‘सामूहिक संक्षिप्त नवनाथ पारायण’ करेंगे। इस दृश्य को अत्यंत पावन और दुर्लभ बताया जा रहा है। शाम 4 बजे त्र्यंबकेश्वर गुरुपीठ के गुरुमाऊली अण्णासाहेब मोरे की पावन उपस्थिति और आशीर्वाद से इस भव्य सम्मेलन का समापन समारोह संपन्न होगा।























