दिल्ली में लगातार बढ़ रही वाहन चोरी की घटनाओं के बीच दिल्ली पुलिस ने एक त्वरित और तगड़ी कार्रवाई की है। पश्चिमी जिला (वेस्ट डिस्ट्रिक्ट) पुलिस ने 21 से 24 अक्टूबर के बीच चलाए गए स्पेशल अभियान ‘ऑपरेशन चक्र-2’ के दौरान महज 72 घंटों में 185 चोरी के वाहन बरामद किए और 46 ऑटो-लिफ्टरों को हिरासत में लिया। यह आंकड़ा इसलिए भी अहम है, क्योंकि इतनी बड़ी बरामदगी इस बात का सबूत है कि सही रणनीति और तेज़ अमल से शहर में दोपहर वाहनों पर संकट कम किया जा सकता है।
‘ऑपरेशन चक्र-2’ क्या है और कैसे तैयार हुआ?
पश्चिमी जिले में स्कूटी और बाइक चोरी की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, जिसके बाद पुलिस ने यह टाइम-बाउंड अभियान तैयार किया। जिले के 12 थानों से दो-दस डेडिकेटेड टीमें गठित की गईं — कुल 30 टीमें। इनमें स्पेशल स्टाफ, एंटी-नारकोटिक्स यूनिट और अन्य ऑपरेशनल टीमें भी शामिल रहीं।
पश्चिमी जिले के डीसीपी दिनेश कुमार ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय में प्रेस को बताया कि अभियान की नींव में दो चीज़ें रहीं सीसीटीवी फुटेज विश्लेषण और ह्यूमन इंटेलिजेंस। चोरी की घटनाओं के रूट और पैटर्न की पड़ताल कर आरोपियों की पहचान की गई, फिर तालमेल के साथ छापेमारी कर गिरफ्तारियां हुईं।
जांच में सामने आया कि इनमें से 91 वाहन पश्चिमी जिले से ही चोरी हुए थे, जबकि 94 वाहन दिल्ली के दूसरे जिलों के थे। कुछ वाहन दिल्ली के बाहर से भी मिले, जिनमें सोनीपत शामिल है। अन्य जिलों और राज्यों के वाहनों की जानकारी संबंधित पुलिस इकाइयों को भेज दी गई है, ताकि इन्हें असली मालिकों तक पहुंचाया जा सके।
चोरी के पीछे कई मकसद: ‘फन राइड’ से लेकर फिरूसे बेचने तक
पूछताछ में हर आरोपी का मकसद अलग-अलग सामने आया। कुछ ने अपराध के बाद वाहन सुनसान जगहों पर पार्क कर दिया, कुछ ने उन्हें बेच डाला, तो कई वाहन पेट्रोल खत्म होने पर रास्ते में ही छोड़ दिए गए। सबसे हैरान करने वाली परत यह है कि कुछ कम उम्र के युवकों ने बस ‘फन राइड’ के चस्के के लिए वाहन चुराए और दूसरे इलाके में जाकर छोड़ आए। विकासपुरी पुलिस ने एक आरोपी से पूछताछ के बाद पांच और चोरी के वाहन अलग-अलग ठिकानों से बरामद किए, जिन्हें वह अपराध के बाद छिपाकर रखा हुआ था।
रिसीवर नेटवर्क और गिरोह कनेक्शन पर क्या बोली पुलिस?
डीसीपी दिनेश कुमार के मुताबिक गिरफ्तार 46 आरोपियों में कोई रिसीवर शामिल नहीं है। हालांकि, चोरी के कुछ वाहन रिसीवरों के कब्जे से ज़रूर बरामद हुए हैं और उनके खिलाफ अलग से कानूनी कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल किसी बड़े गिरोह या साझा नेटवर्क की कड़ी नहीं मिली है — यानी अलग-अलग आरोपी अपने-अपने स्तर पर अपराध करते थे। पुलिस ने कहा है कि पूछताछ के आधार पर वाहनों की बरामदगी और गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी रहेगा।

























