दिल्ली के पश्चिमी इलाके उत्तम नगर से शिक्षा व्यवस्था और सरकारी नियमों को ताक पर रखने का एक बड़ा मामला सामने आ रहा है। मोहन गार्डन (Mohan Garden), बुद्ध बाजार (Budhh Bazar) और इसके आस-पास के कई इलाकों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) की सरेआम धज्ज़ियां उड़ाई जा रही हैं। सरकार और कोर्ट की सख्त पाबंदी के बावजूद, कई सरकारी और नामी प्राइवेट स्कूलों के टीचर्स अपने घरों पर अवैध रूप से कोचिंग और ट्यूशन का बड़ा नेटवर्क चला रहे हैं।
स्थानीय सूत्रों और अभिभावकों से मिली जानकारी के मुताबिक, कानूनी कार्रवाई और नौकरी जाने के डर से इन शिक्षकों ने अब कानून की आंख में धूल झोंकने के लिए ‘हेर-फेर’ के नए-नए तरीके (Hacks) निकाल लिए हैं।
बिना बोर्ड और बैनर की ‘गुप्त पाठशालाएं’
मोहन गार्डन और बुद्ध बाजार की तंग गलियों में शाम होते ही बच्चों की भारी भीड़ देखी जा सकती है। हैरानी की बात यह है कि जिन घरों में ये बच्चे पढ़ने जाते हैं, वहां बाहर कोई बोर्ड, पोस्टर या बैनर नहीं लगा है। टीचर्स बेहद सतर्कता से बच्चों को सीधे घर के अंदर बुलाते हैं। पड़ोसियों को शक न हो, इसलिए बच्चों को गाड़ियाँ दूर खड़ी करने की हिदायत दी जाती है।
कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए शिक्षकों के 3 बड़े ‘हेर-फेर’
- कागजों पर परिवार के सदस्यों का नाम: यदि शिक्षा विभाग या विजिलेंस की टीम कभी औचक निरीक्षण (Surprise Raid) करती है, तो शिक्षक तुरंत कह देते हैं कि ट्यूशन वे नहीं, बल्कि उनकी बेरोजगार पत्नी, पति या भाई पढ़ा रहे हैं।
- ‘फ्री पढ़ाई’ और रिश्तेदारी का बहाना: रंगे हाथों पकड़े जाने पर टीचर्स अक्सर बच्चों को अपना दूर का रिश्तेदार या पड़ोसी बता देते हैं और दावा करते हैं कि वे कोई फीस नहीं ले रहे हैं, बल्कि सिर्फ मुफ्त में मदद कर रहे हैं।
- सिर्फ कैश (Cash) में लेन-देन: डिजिटल इंडिया के इस दौर में भी इन ट्यूशन सेंटर्स पर फीस का लेन-देन सिर्फ नकद (Cash) में होता है। बैंक ट्रांसफर या UPI पेमेंट से पूरी तरह परहेज किया जाता है ताकि किसी भी तरह का डिजिटल सबूत (Financial Record) न छूटे।
RTE एक्ट और CBSE नियमों का सीधा उल्लंघन
आपको बता दें कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) की धारा 28 के तहत किसी भी इन-सर्विस सरकारी या प्राइवेट स्कूल शिक्षक के ट्यूशन पढ़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके अलावा, CBSE और शिक्षा निदेशालय (DoE) के नियम भी इसकी इजाजत नहीं देते। इसके बावजूद उत्तम नगर के इस इलाके में यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है।
अभिभावकों का आरोप है कि कुछ शिक्षक स्कूलों में जानबूझकर पूरा कोर्स नहीं कराते, जिससे बच्चों पर उनके घर आकर ट्यूशन पढ़ने का मानसिक और परोक्ष दबाव बनता है। अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद दिल्ली शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन मोहन गार्डन और बुद्ध बाजार के इन ‘ट्यूशन माफियाओं’ पर क्या सख्त कदम उठाता है।
























