भारतीय युवा कांग्रेस ने आरएसएस मुख्यालय के बाहर मनुस्मृति की प्रतियों को जलाकर विरोध प्रदर्शित किया है। इस प्रदर्शन का नेतृत्व युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने किया। इस दौरान उन्होंने भाजपा और आरएसएस की विचारधारा को मनुस्मृति से प्रेरित बताया और इसकी निंदा की। पुलिस ने इस प्रदर्शन के चलते उदय भानु चिब समेत कई अन्य युवा नेताओं को डिटेन कर लिया है। इस घटना ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है और देश में संविधान और मनुस्मृति के बीच चल रही विचारधारा की लड़ाई को फिर से उजागर कर दिया है।
प्रदर्शन का कारण और पृष्ठभूमि
बता दें कि यह प्रदर्शन रविवार को दिल्ली के झंडेवालान क्षेत्र में हुआ। युवा कांग्रेस के नेताओं ने RSS मुख्यालय के बाहर मनुस्मृति की प्रतियों को आग के हवाले किया। इस कार्रवाई का मकसद भाजपा और RSS की विचारधारा के खिलाफ अपना असंतोष व्यक्त करना था। इस दौरान उन्होंने “मनुस्मृति नहीं, संविधान चाहिए” जैसे नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी भी अप्रिय घटना से निपटा जा सके। जैसे ही युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक रूप से मनुस्मृति की प्रतियों को आग में डालना शुरू किया, तो पुलिस ने तत्काल उन्हें रोकने का प्रयास किया और कुछ नेताओं को हिरासत में ले लिया।
विरोध के पीछे का विचार
युवा कांग्रेस के नेता उदय भानु चिब ने स्पष्ट रूप से कहा कि भाजपा और RSS की विचारधारा मनुस्मृति से प्रेरित है। उनका आरोप है कि मनुस्मृति पूरी तरह से दलित विरोधी और समाज को विभाजित करने वाली है। उनका कहना है कि यह विचारधारा देश के सामाजिक ताने-बाने को खराब कर रही है। चिब ने यह भी आरोप लगाया कि इस विचारधारा के चलते समाज में असमानताएं और भेदभाव बढ़ रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि संविधान से प्रेरित राष्ट्र का सामाजिक और आर्थिक विकास संभव है, जबकि मनुस्मृति जैसी विचारधारा समाज को पीछे धकेलती है।
खरगे के कार्यक्रम पर असंतोष
युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में हाल ही में आयोजित कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम का जिक्र किया। उन्होंने इस कार्यक्रम में हुए ‘हवन’ और ‘शुद्धीकरण’ को बेहद शर्मनाक बताया।
उनका कहना है कि यह कृत्य सिर्फ एक वरिष्ठ नेता का अपमान नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों दलित, पिछड़े वर्ग के लोगों और संविधान की आत्मा पर हमला है। चिब ने इस जातिवादी मानसिकता के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया और कहा कि देश को संविधान के मुताबिक चलना चाहिए, न कि मनुस्मृति की सोच के आधार पर।
प्रदर्शन की कार्रवाई
युवा कांग्रेस के नेता उदय भानु चिब ने अपने हाथ में संविधान की कॉपी लेकर RSS मुख्यालय के बाहर मनुस्मृति को जलाया। इस प्रदर्शन में उनके साथ युवा कांग्रेस के महासचिव हरि कृष्णा सहित कई अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे।
इस कार्रवाई का मकसद सामाजिक न्याय और समानता के पक्ष में अपनी आवाज उठाना था। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी की गई और समाज में फैले जातिवादी विचारधारा के विरोध में आवाज उठाई गई। पुलिस ने तुरंत ही इस प्रदर्शन को रोकने का प्रयास किया और कई नेताओं को हिरासत में ले लिया।
युवा कांग्रेस का संदेश
युवा कांग्रेस का कहना है कि वे इस जातिवादी मानसिकता के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे। उनका मानना है कि देश को संविधान के आधार पर ही आगे बढ़ना चाहिए। उनका यह भी मानना है कि मनुस्मृति जैसी विचारधारा समाज में भेदभाव, असमानता और सामाजिक विभाजन का कारण बन रही है।
#Newsflash: IYC कार्यकर्ताओं ने RSS मुख्यालय के बाहर जलाई मनुस्मृति की प्रतियां 🔥
हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी की सभा के बाद हवन और ‘शुद्धिकरण’ कर दलित समाज का अपमान किया गया, और BJP आज तक माफी मांगने, FIR करने को भी तैयार नही।
तो आज जवाब RSS के दरवाज़े… pic.twitter.com/smMZwkGG1n
— Indian Youth Congress (@IYC) August 30, 2026
युवा कांग्रेस का एसोशिएशन इस तरह के विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने का प्रयास कर रहा है। उनका उद्देश्य है कि देश का भविष्य संविधान के मूल्यों पर आधारित हो, न कि मनुस्मृति जैसी विभाजनकारी विचारधारा पर।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस प्रदर्शन के बाद राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। विपक्षी पार्टियों ने युवा कांग्रेस के इस कदम का समर्थन किया है। वहीं, भाजपा और RSS ने इस तरह के प्रदर्शन की निंदा की है। उनका कहना है कि यह देश में सांप्रदायिक और जातीय तनाव पैदा करने का प्रयास है। दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया के साथ ही यह विषय फिर से देश के सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन गया है।
इस पूरी घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत में संविधान की रक्षा और जातिवादी विचारधाराओं के खिलाफ सामाजिक चेतना कितनी जागरूक हो रही है। युवा कांग्रेस का यह विरोध प्रदर्शन सामाजिक न्याय और समानता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस तरह के कदम समाज में जागरूकता फैलाने और जाति आधारित विभाजन को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

























