दिल्ली नगर निगम ने अपने पार्षदों और संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) आधार पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। निगम ने एक नई स्वास्थ्य नीति को मंजूरी देते हुए इन वर्गों को केंद्र सरकार की प्रतिष्ठित स्वास्थ्य योजना CGHS (Central Government Health Scheme) की दरों पर उपचार का अधिकार दे दिया है। यह सुविधा न केवल लाभार्थियों को, बल्कि उनके पात्र आश्रितों को भी उपलब्ध होगी।
पहली बार शुरू हुई ऐसी योजना
निगम के अधिकारियों के अनुसार, MCD के इतिहास में यह पहला अवसर है जब इस तरह की स्वास्थ्य सुविधा शुरू की गई है। इस नीति के लागू होने से पार्षद और निगम के संविदा कर्मचारी अब MCD से संचालित किसी भी अस्पताल में जाकर CGHS दरों के अनुसार इलाज करवा सकेंगे। इन दरों को केंद्र सरकार निर्धारित करती है, जिसका सीधा लाभ यह होता है कि उपचार की लागत काफी हद तक कम हो जाती है और मरीजों पर आर्थिक दबाव नहीं पड़ता।
नीति का मुख्य उद्देश्य
इस पहल के पीछे निगम की सोच साफ है — किसी भी मेडिकल आपात स्थिति में पार्षदों और संविदा कर्मचारियों को किफायती और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके। अक्सर देखा गया है कि संविदा कर्मचारियों के पास नियमित कर्मचारियों जैसी स्वास्थ्य बीमा सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं, जिसके कारण इमरजेंसी में उन्हें महंगे निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। नई नीति इसी कमी को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
स्टैंडिंग कमेटी चेयरपर्सन ने व्यक्त किया विश्वास
इस फैसले की जानकारी देते हुए MCD स्टैंडिंग कमेटी की चेयरपर्सन सत्या शर्मा ने कहा कि इस पहल का लक्ष्य पार्षदों, संविदा कर्मचारियों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि संविदा कर्मचारी निगम की विभिन्न सेवाओं को संचालित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए यह नीति उनके लिए विशेष रूप से महत्व रखती है।
शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रावधान की घोषणा पहले MCD के बजट में की जा चुकी थी और अब इसे औपचारिक नीति के रूप में लागू कर दिया गया है। CGHS दरों पर उपचार मिलने से कर्मचारियों और उनके परिवारों पर इमरजेंसी इलाज और अन्य स्वास्थ्य जरूरतों के दौरान पड़ने वाला वित्तीय बोझ काफी कम होगा।
कर्मचारियों की भलाई पर है पूरा फोकस
सत्या शर्मा ने जोर देकर कहा कि स्टैंडिंग कमेटी का ध्यान सिर्फ पार्षदों के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि निगम के कर्मचारियों की भलाई भी उनकी प्राथमिकता है। उनके अनुसार, संविदा कर्मचारी निगम के दैनिक कामकाज को सुचारु रूप से चलाने में अहम योगदान देते हैं। इस पहल के साथ रुकने का इरादा नहीं है — आगे भी उनके कल्याण के लिए और अन्य आवश्यक सुविधाओं को आसान बनाने के लिए कदम उठाए जाते रहेंगे।
CGHS दरें क्यों खास हैं?
CGHS यानी केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना के तहत जो दरें तय की जाती हैं, वे निजी अस्पतालों की तुलना में काफी कम होती हैं। इन दरों में जांच, इलाज, सर्जरी और अस्पताल में भर्ती होने से जुड़े खर्चों की सीमा तय रहती है। जब कोई अस्पताल CGHS दरों पर इलाज करता है, तो मरीज को निजी दरों से कई गुना सस्ता उपचार मिल जाता है। MCD की नई नीति में भी यही फॉर्मूला अपनाया गया है।
लाभ कैसे और कहां मिलेगा?
नीति के अनुसार, योजना का लाभ चाहने वाले लाभार्थी MCD से जुड़े किसी भी अस्पताल में जाकर CGHS दरों पर अपना इलाज करवा सकेंगे। अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे निगम के विभिन्न विभागों में कार्यरत हजारों संविदा कर्मचारियों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। साथ ही उनके पात्र आश्रित — जैसे पत्नी, बच्चे और निर्भर सदस्य — भी इस सुविधा का दायरा में आएंगे।
मच्छर जनित बीमारियों पर भी MCD सतर्क
इस फैसले से पहले, दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने सोमवार को वेक्टर-जनित (मच्छर जनित) बीमारियों — जैसे डेंगू और मलेरिया — से निपटने के लिए निगम की तैयारियों की समीक्षा की थी। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को जन-प्रतिनिधियों के साथ मिलकर काम करने का निर्देश दिया।
मेयर ने फील्ड टीमों को हिदायत दी कि वे मच्छरों के प्रजनन स्थलों पर विशेष नजर रखें और कंस्ट्रक्शन साइट्स, धार्मिक स्थलों, पार्कों, स्कूलों तथा हेल्थ सेंटरों पर टारगेटेड फॉगिंग का अभियान चलाएं। निगम के अनुसार, अब तक 1,197 से अधिक जगहों पर कीटनाशक का छिड़काव और फॉगिंग की जा चुकी है।

























