ऋषी तिवारी
ईरान के साथ चल रहे तेज युद्ध के बीच इजरायल द्वारा मुसलमानों की सबसे पवित्र मस्जिदों में से एक ‘अल-अक्सा मस्जिद’ को पिछले 16 दिनों से बंद रखने के फैसले से मध्य पूर्व में तूफान खड़ा हो गया है। रमजान के पवित्र महीने में इजरायल की इस कार्रवाई से न केवल फिलिस्तीनी मुसलमानों में आक्रोश है, बल्कि सऊदी अरब और UAE समेत आठ मुस्लिम देशों ने भी इजरायल पर जमकर हमला बोला है। अरब लीग ने साफ शब्दों में कहा है कि इजरायल के पास मुसलमानों को इबादत करने से रोकने का कोई अधिकार नहीं है।
अरब लीग का बयान- अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
अरब देशों के समूह अरब लीग ने रविवार को एक बयान जारी कर इजरायल के इस फैसले की कड़ी निंदा की। बयान में कहा गया, “यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है और यह क्षेत्रीय तथा वैश्विक शांति और सुरक्षा पर गंभीर असर डाल सकता है।” अरब लीग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह यरुशलम के पवित्र स्थलों पर इजरायल की कथित अवैध कार्रवाइयों को रोकने के लिए उस पर दबाव डाले ताकि इबादत की आजादी सुनिश्चित हो सके।
ईरान से जंग और अल-अक्सा का बंद होना
जानकारी के मुताबिक, 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से इजरायल ने कब्जे वाले पूर्वी यरुशलम में स्थित अल-अक्सा मस्जिद को सील कर दिया है। यह बंदी अब तक 16-17 दिनों से जारी है, जिसे 1967 के बाद रमजान के दौरान सबसे लंबी बंदी माना जा रहा है। इजरायल का तर्क है कि ईरान से मिसाइल हमलों के खतरे और सुरक्षा कारणों के चलते उसने यह कदम उठाया है।
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सड़कों पर पढ़ी जा रही हैं नमाज
इस बंदी का असर यह हुआ है कि अल-अक्सा परिसर पूरी तरह खाली पड़ा हुआ है। हजारों फिलिस्तीनी मुसलमानों को पुराने शहर की सड़कों और दीवारों के आसपास ही नमाज अदा करनी पड़ रही है। रमजान के आखिरी दस दिनों में ‘लैलतुल कद्र’ जैसी विशेष रात और ‘इतिकाफ’ जैसी इबादतें भारी असर के कारण प्रभावित हुई हैं। वहीं, वेस्ट बैंक स्थित इब्राहीमी मस्जिद में भी केवल 50 नमाजियों को ही प्रवेश दिया जा रहा है।
मुस्लिम दुनिया में आक्रोश, हमास ने दी ‘युद्ध की घोषणा’ जैसी चेतावनी
अरब लीग के अलावा, कतर, जॉर्डन, इंडोनेशिया, तुर्की, पाकिस्तान, सऊदी अरब, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे आठ प्रमुख अरब-इस्लामी देशों ने संयुक्त रूप से इजरायल की निंदा की है। OIC और अन्य संगठन: ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC), मुस्लिम वर्ल्ड लीग और अफ्रीकन यूनियन ने भी इसे इबादत की आजादी पर हमला बताया। हमास और फिलिस्तीनी अथॉरिटी: फिलिस्तीनी अथॉरिटी ने इसे खतरनाक उदाहरण बताया, जबकि हमास ने मस्जिद बंद करने के फैसले को ‘युद्ध की घोषणा’ जैसा कदम करार दिया है।






















