अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर नाराजगी जताई है। एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि दुनिया के कई संघर्षों को सुलझाने में उनकी भूमिका रही है और उन्हें केवल एक नहीं, बल्कि आठ नोबेल शांति पुरस्कार मिलने चाहिए थे। उन्होंने पुरस्कार पाने वाली भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद नवी पिल्ले पर भी टिप्पणी की और कहा कि उनके काम के बारे में आम लोगों को जानकारी नहीं है।
ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा कि उन्हें समझ नहीं आता कि पिल्ले को पुरस्कार क्यों दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिल्ले इजराइल की विरोधी हैं। हालांकि, उनके पोस्ट में पिल्ले के काम के बारे में कोई विस्तृत या प्रमाणित जानकारी नहीं दी गई। ट्रंप ने अपने दावों के समर्थन में उन संघर्षों की सूची भी साझा की, जिन्हें उनके अनुसार उन्होंने सुलझाया या शांत कराने में मदद की।
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने को ट्रंप ने खास उपलब्धि बताया। उन्होंने दावा किया कि इस संघर्ष को रुकवाना ही नोबेल शांति पुरस्कार के लिए पर्याप्त आधार है। ट्रंप ने यह भी कहा कि जिन देशों की उन्होंने मदद की, उनके नेताओं ने नॉर्वेजियन नोबेल समिति को पत्र लिखकर उनके प्रयासों का समर्थन किया था। इन दावों और संघर्षों में उनकी भूमिका को लेकर स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
“इतिहास में सबसे ज्यादा जानें बचाईं”
ट्रंप ने पोस्ट में कहा कि उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोका और मध्य पूर्व को बड़े विनाश से बचाया। उन्होंने दावा किया कि इतिहास में उनसे अधिक लोगों की जान किसी ने नहीं बचाई। साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान और रूस-यूक्रेन युद्ध समेत अन्य संघर्षों को सुलझाने या जीतने की दिशा में भी वे काम कर रहे हैं।
उन्होंने पिछले साल की नोबेल पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो का भी उल्लेख किया। ट्रंप के मुताबिक, मचाडो ने मीडिया से कहा था कि उन्होंने कई लड़ाइयां सुलझाईं और वे नोबेल शांति पुरस्कार के हकदार हैं। ट्रंप ने इसे पुरस्कार पाने वालों के समर्थन में अब तक की असाधारण पहल बताया।
बंधकों और कैदियों की रिहाई का दावा
ट्रंप ने इजराइल-हमास संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से सभी बंधकों को वापस लाया गया। उनके अनुसार, इनमें आखिरी 28 जीवित बंधक और कुछ मृत बंधकों के शव भी शामिल थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि हमास के साथ मिलकर इस कठिन प्रक्रिया को पूरा किया गया।
अपने पोस्ट में ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने में अपनी भूमिका का भी दावा किया और कहा कि वे वेनेजुएला को समृद्ध लोकतंत्र बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया तथा जापान और उत्तर कोरिया के बीच युद्ध टलने का श्रेय अपने प्रयासों को दिया। इन बयानों को ट्रंप के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए; हर दावे की पुष्टि अलग-अलग स्रोतों से होनी बाकी है।
NATO खर्च और राजनीतिक कैदियों पर भी बोले
ट्रंप ने कहा कि NATO देशों के रक्षा खर्च को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने, गठबंधन को मजबूत बनाने और रक्षा क्षमता बढ़ाने में वे सफल रहे हैं। उन्होंने पूर्वी यूरोप के देशों में 900 से अधिक राजनीतिक कैदियों की रिहाई के लिए बातचीत करने का दावा भी किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दुनिया के अलग-अलग देशों से 196 बंधकों को छुड़ाकर घर पहुंचाने में उनकी भूमिका रही है।

नोबेल समिति और नॉर्वे पर निशाना
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने प्रयासों के लिए संयुक्त राष्ट्र से मदद नहीं मांगी और न ही उन्हें वहां से कोई सहायता मिली। उनके मुताबिक, अमेरिका को—जिसका वे राष्ट्रपति के रूप में प्रतिनिधित्व करते हैं—नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था। उन्होंने पुरस्कार के फैसले को नॉर्वे के लिए ऐसा “दाग” बताया, जिसे मिटाया नहीं जा सकेगा।
ट्रंप की पोस्ट में कई बड़े अंतरराष्ट्रीय दावे किए गए हैं, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार किसी व्यक्ति को उसके अपने दावों के आधार पर नहीं दिया जाता। पुरस्कार का फैसला स्वतंत्र समिति करती है और उसके लिए नामांकन तथा चयन की गोपनीय प्रक्रिया होती है। इसलिए ट्रंप के दावों और पुरस्कार को लेकर उनकी नाराजगी को अलग-अलग तथ्यों के आधार पर परखना जरूरी है।


























