न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी कमेटी की बैठक के दौरान भारत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को लेकर तीखा पलटवार किया। भारत के फर्स्ट सेक्रेटरी रघु पुरी ने पाकिस्तान के उस दावे को भ्रामक बताया, जिसमें उसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी जीत का दावा किया था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान चाहे तो बमबारी से क्षतिग्रस्त एयरफील्ड और गड्ढों वाले रनवे को अपनी जीत मानकर खुश हो सकता है।
बैठक में भारत ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने लंबे समय तक जिन आतंकवादी संगठनों को समर्थन दिया, वही अब उसके लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती बन गए हैं। रघु पुरी ने कहा कि इस्लामाबाद खुद को आतंकवाद से लड़ने वाला देश और उसका पीड़ित बताता है, लेकिन इस दावे से उस भूमिका पर पर्दा नहीं पड़ता जो पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के संबंध में लगती रही है।

ऑपरेशन सिंदूर पर पाकिस्तान के दावों को भारत का जवाब
भारत के अनुसार, पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ा। खबरों के मुताबिक, भारतीय वायु सेना ने इस दौरान पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की।
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के प्रतिनिधि उस्मान जादून की भारत पर की गई टिप्पणियों के जवाब में पुरी ने कहा कि पाकिस्तान की जीत की कहानी वास्तविकता से मेल नहीं खाती। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि क्षतिग्रस्त एयरफील्ड और रनवे पर बने गड्ढे पाकिस्तान को जीत का प्रतीक लगते हैं, तो वह इस व्याख्या का आनंद ले सकता है।
भारत की टिप्पणी का मकसद पाकिस्तान के दावों को चुनौती देना और आतंकवाद के मुद्दे पर उसका रिकॉर्ड सामने रखना था। हालांकि, सैन्य कार्रवाई और उसके परिणामों को लेकर दोनों देशों के बयानों में अंतर रहा है।

“आतंकवाद का राक्षस अब पाकिस्तान के भीतर भी”
अपने वक्तव्य में रघु पुरी ने पाकिस्तान के आतंकवाद-विरोधी रुख पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने खुद को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अग्रिम पंक्ति का देश और पीड़ित के रूप में पेश किया है, जबकि उसके यहां पनपे आतंकवादी नेटवर्क अब खुद पाकिस्तान की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा बन रहे हैं।
पुरी ने आतंकवाद को “फ्रेंकस्टीन मॉन्स्टर” यानी ऐसा बेकाबू राक्षस बताया, जिसे बनाया तो गया, लेकिन बाद में उस पर नियंत्रण नहीं रहा। उनके अनुसार, यह खतरा पहले पड़ोसी देशों में हिंसा और अस्थिरता फैलाता रहा और अब पाकिस्तान के भीतर भी असर दिखा रहा है।
इस दावे के समर्थन में उन्होंने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज के हालिया बयान का उल्लेख किया। मरियम नवाज ने लाहौर में कहा था कि पंजाब को पड़ोसी देशों की तुलना में पाकिस्तान के दूसरे प्रांतों से अधिक खतरा है। उनके बयान को खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में जारी सुरक्षा चुनौतियों की ओर संकेत के तौर पर देखा गया।

पुरी ने मरियम नवाज के पिता और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के 2018 के एक इंटरव्यू का भी संदर्भ दिया। भारत का तर्क था कि पाकिस्तान के नेताओं के अपने बयान देश के भीतर आतंकवाद और सुरक्षा संकट की गंभीरता को उजागर करते हैं।
मसूद अजहर को लेकर भारत ने उठाए सवाल
भारत ने जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर का मुद्दा भी संयुक्त राष्ट्र में उठाया। रघु पुरी ने पाकिस्तान की ओर से अजहर को पकड़ने के लिए इनाम की राशि बढ़ाने के कदम का जिक्र करते हुए उसकी विश्वसनीयता पर सवाल किया।
पुरी ने कहा कि यदि मीडिया मसूद अजहर तक पहुंच सकता है और ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को लेकर उससे बात कर सकता है, तो पाकिस्तानी सरकार को भी उसके ठिकाने की जानकारी होनी चाहिए। इस टिप्पणी के जरिए भारत ने पाकिस्तान से यह स्पष्ट करने की मांग की कि अजहर की मौजूदगी और गतिविधियों को लेकर उसकी वास्तविक स्थिति क्या है।
मसूद अजहर भारत में कई आतंकी हमलों से जुड़े मामलों में वांछित है। भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर उसे और अन्य आतंकवादी संगठनों के नेताओं को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है। पाकिस्तान इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
आतंकवाद पर भारत का संदेश
संयुक्त राष्ट्र की बैठक में भारत का मुख्य संदेश यह था कि आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की आधिकारिक छवि और उसके भीतर की वास्तविक सुरक्षा स्थिति के बीच बड़ा अंतर है। ऑपरेशन सिंदूर पर पाकिस्तान के विजय-दावों को चुनौती देते हुए भारत ने मसूद अजहर का मामला भी उठाया और इस्लामाबाद से आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग दोहराई।






















