UP’s ‘Zero Poverty Campaign’ News: यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में गरीबी उन्मूलन के महाअभियान को एक नई दिशा दी है। ‘जीरो पॉवर्टी अभियान’ को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री योगी ने स्पष्ट तौर पर अधिकारियों को बताया है कि उनका संकल्प केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य का हर एक पात्र परिवार सरकारी लाभकारी कार्यक्रमों से गहराई से जुड़ा होना चाहिए। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए राज्य ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के तहत एक विशेष टास्क फोर्स बनाने के निर्देश दिए गए हैं, जो लक्षित परिवारों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करेगी।
जीरो पॉवर्टी अभियान: आंकड़े और लक्ष्य
इस अभियान की सफलता और भविष्य की रणनीति की समीक्षा के दौरान सामने आए आंकड़े बेहद प्रेरणादायक हैं। अब तक प्रदेश भर में लगभग 12.50 लाख परिवारों का व्यापक सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। इस सर्वेक्षण से जो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, उनके अनुसार:
- आवास योजनाएं: करीब 9 लाख परिवार ऐसे हैं जो प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए पूरी तरह से योग्य हैं। वहीं, लगभग 5 लाख अन्य परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना के जरिए छत का सपना पूरा किया जाएगा।
- स्वास्थ्य सुरक्षा: इन परिवारों में से अभी 6.67 लाख परिवारों के पास आयुष्मान भारत (मुफ्त इलाज) कार्ड नहीं है। इन्हें तत्काल ढांचे में लाया जाएगा।
- रोजगार और कौशल: लगभग 5 लाख लोगों का पंजीकरण भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में हो चुका है, जबकि बाकी का कार्य जारी है। साथ ही, 10.60 लाख परिवारों से कम से कम एक सदस्य को कौशल विकास प्रशिक्षण से जोड़ने की बड़ी योजना बनाई गई है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ शब्दों में हिदायत दी है कि इन सभी लाभार्थियों के लिए ‘अंत्योदय कार्ड’ बनाना पहली प्राथमिकता है, ताकि योजनाओं का लाभ चरणबद्ध और पारदर्शी तरीके से मिल सके।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर अति-प्राथमिकता: एक्सप्रेसवे और लॉजिस्टिक हब
- गरीबी उन्मूलन के साथ-साथ प्रदेश की बुनियादी ढांचे की रफ्तार को और तेज करने पर जोर दिया गया। यूपी में चल रही प्रमुख एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की भूमि अधिग्रहण की प्रगति पर संतोष जताते हुए भविष्य का रोडमैप तैयार किया गया।
- फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 88.45 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है।
- झांसी लिंक एक्सप्रेसवे (72.71%), आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक (63%) और जेवर लिंक एक्सप्रेसवे (59.35%) की भूमि भी तैयार है।
सीएम योगी ने मेरठ-हरिद्वार, विंध्य, विंध्य-पूर्वांचल सहित सभी प्रस्तावित एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स के लिए 31 जुलाई तक भूमि उपलब्ध कराने का सख्त टारगेट दिया है। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण में भूमिस्वामियों के साथ सीधा संवाद स्थापित कर ट्रांसपेरेंसी बनाए रखी जाए।
इसके अलावा, ग्रेटर नोएडा में विकसित हो रहे मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब की सराहना करते हुए बताया गया कि 323 हेक्टेयर में से 301 हेक्टेयर जमीन सरकार को मिल चुकी है। पांच बड़ी कंपनियों ने लॉजिस्टिक पार्क के लिए पंजीकरण करा लिया है और आवंटन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
लखनऊ नाइट सफारी और औद्योगिक विकास
पर्यटन और मनोरंजन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि सामने आई है। लखनऊ नाइट सफारी प्रोजेक्ट को लेकर 15 जुलाई को भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) से कानूनी मंजूरी मिल गई है। सीएम ने अधिकारियों को तल्ख लहजे में कहा कि अब किसी भी तरह की औपचारिकता में देरी बर्दाश्त नहीं होगी और इसे समय से जमीन पर उतारा जाएगा।
औद्योगिक क्षेत्र में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए मॉडल बिल्डिंग बायलॉज में जरूरी बदलाव को तुरंत अंतिम रूप देने के आदेश दिए गए। लखनऊ टेक्सटाइल पार्क को प्रदेश के वस्त्र उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र बनाने के लक्ष्य के साथ निर्माण कार्य में और तेजी लाने पर जोर दिया गया। वहीं, बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) में भूमि अधिग्रहण में किसी भी तरह की देरी को नामंजूर किया गया।
सुरक्षा, बिजली और जन कल्याण की चुनौतियां
बुनियादी ढांचे के साथ जनसुरक्षा को लेकर भी सरकार सख्त नजरिया अपना रही है। सभी सरकारी और निजी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और बड़े होटलों में वैध फायर एनओसी (Fire NOC) की जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। जहां भी अग्नि सुरक्षा के मानक कम पाए जाएंगे, वहां तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। लखनऊ नगर निगम क्षेत्र में सीवर लाइनों और मैनहोल के ऊपर से गुजर रही हाई-टेंशन बिजली की लाइनों को हटाने के लिए विद्युत और नगर निगम विभागों को तालमेल करने को कहा गया है।

बिजली वितरण व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सभी फीडरों का गहन विश्लेषण करने का आदेश दिया गया है। बिजली की आपूर्ति, बकाया वसूली, ट्रांसमिशन लॉस और ओवरलोड की स्थिति को देखते हुए एक सुधारात्मक रोडमैप बनाने पर बल दिया गया। तकनीकी दक्षता और वित्तीय अनुशासन को बराबर का दर्जा दिया जाएगा।
























