यूपी सरकार की लापरवाही, मृत महिला को भेजा नोटिस, मचा हड़कंप

18 महीने पहले मर चुकी कर्मचारी को भेजा अल्टीमेटम

UP News: कहते हैं कि सरकारी तंत्र की फाइलें कभी नहीं मरतीं, लेकिन उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में इस कहावत को पलटा देने वाला मामला सामने आया है। यहां बाल विकास विभाग ने एक ऐसी महिला कर्मचारी को नोटिस थमा दिया है, जिसकी मृत्यु हुए लगभग 18 महीने बीत चुके हैं। विभाग ने मृतका से ड्यूटी पर न आने का जवाब मांगते हुए 2 दिन के अंदर उपस्थित होने का अल्टीमेटम दिया है। इस संवेदनहीनता और बड़ी लापरवाही से पूरे जनपद में हड़कंप मच गया है।

एक हाथ में तस्वीर, दूसरे में डेथ सर्टिफिकेट लेकर बेबस पति

बता दें कि मामला पनवाड़ी विकासखंड के नैपुरा गांव का है। यहां आंगनबाड़ी केंद्र में सहायिका के पद पर तैनात पार्वती की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। पार्वती के पति किशुनलाल के हाथों में आज भी अपनी पत्नी की तस्वीर और डेथ सर्टिफिकेट है, लेकिन विभाग के इस फरमान ने उनके जख्मों पर नमक छिड़क दिया है।

पति किशुनलाल का दावा है कि उसने पत्नी के निधन के 8 दिन के भीतर ही विभाग में मृत्यु प्रमाण पत्र जमा कर दिया था। लेकिन तमाम दस्तावेज होने के बावजूद 18 महीने बाद पनवाड़ी की बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) यासमीन जहां के हस्ताक्षर से एक नोटिस जारी किया गया।

‘2 दिन में उपस्थित हो, वरना होगी सेवा समाप्त’

इस नोटिस में मृतका पार्वती पर आरोप लगाया गया है कि निरीक्षण के दौरान आंगनबाड़ी केंद्र बंद मिला। नोटिस में साफ लिखा गया है कि अगर मृतका 2 दिन के भीतर हॉट-कुक्ड योजना के बिल-वाउचर और रिकॉर्ड के साथ कार्यालय में उपस्थित नहीं हुई, तो उसकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी।

बेटे का तंज- ‘अब स्वर्ग जाकर मां से पूछूंगा ड्यूटी क्यों नहीं आई’

विभाग की इस बेरुखी पर मृतका के बेटे महेश ने कड़ा तंज कसा। उसने कहा, “अब मैं यह नोटिस लेकर स्वर्ग में अपनी मां के पास जाऊंगा और उनसे पूछूंगा कि वह ड्यूटी पर क्यों नहीं जा रही हैं।”

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18 महीने तक किसी ने डकारा तो मानदेय?

ग्रामीणों और परिजनों के मन में अब एक बड़ा सवाल उठ रहा है। उनका शक है कि कहीं पार्वती के नाम पर पिछले 18 महीनों से कोई और तो मानदेय नहीं डकार रहा था? आखिर डेढ़ साल तक विभाग को अपनी कर्मचारी की मौत की खबर तक कैसे नहीं लगी? जब तक यह नोटिस आया, तब तक तो इसका मतलब है कि कर्मचारी जिंदा ही मान ली गई थी।

डिजिटल इंडिया में सवालिया निशान

वहीं, परिजनों ने इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी से करने का मन बना लिया है। हालांकि, इस पूरे प्रकरण ने ‘डिजिटल इंडिया’ के दावों पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। आखिर जिम्मेदार अधिकारियों ने बिना रिकॉर्ड देखे एक मृतका के नाम नोटिस कैसे जारी कर दिया? अब देखना यह होगा कि किसी की मौत पर इस भद्दे मजाक के बाद यूपी सरकार विभाग के इन लापरवाह अफसरों पर कोई कार्रवाई करेगी या फिर मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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