Nashik Aghori Puja Fraud News : आज के डिजिटल युग में लोगों की मानसिक कमजोरी और अंधविश्वास का फायदा उठाने वाले ढोंगी बाबाओं के तरीके लगातार बदल रहे हैं। अब ये ठग पारंपरिक तरीकों से हटकर सोशल मीडिया और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर अपना शिकार ढूंढ रहे हैं। नासिक के इंदिरानगर पुलिस थाने में एक ऐसे ही सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ है, जहां एक ढोंगी बाबा ने ‘अघोरी पूजा’ और ‘गुप्तधन’ के जाल में फंसाकर दो भाइयों से न सिर्फ लाखों रुपये की ठगी की, बल्कि उनकी कीमती जमीन भी हड़प ली। महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (अंनिस) के सक्रिय हस्तक्षेप और पुलिस की कार्रवाई के बाद आरोपी ढोंगी बाबा कमलेश अधिकारी और उसकी पत्नी गौरी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
माता-पिता के निधन के बाद बिखरे परिवार ने उठाया गलत कदम
मामला सोलापुर जिले के लऊल गांव के रहने वाले मदन देवकर और ज्ञानेश्वर देवकर नामक दो भाइयों का है। वर्ष 2021 में इन दोनों भाइयों के माता-पिता का एक महीने के अंदर-अंदर निधन हो गया। परिवार के दो चिरागों के एक साथ बुझ जाने से मदन और ज्ञानेश्वर मानसिक रूप से एकदम स्तब्ध और भयभीत हो गए। इस अकाल मृत्यु के कारण को लेकर उनके मन में कई तरह के डर और सवाल थे। वे किसी ऐसे अलौकिक या दैवीय उपाय की तलाश में थे, जिससे उनके परिवार पर लगे किसी ‘श्राप’ या ‘बुरी आत्मा’ का प्रभाव खत्म हो सके।
यूट्यूब बना शिकारियों का जाल
इसी दौरान भाइयों की नजर यूट्यूब पर नासिक के पाथर्डी फाटा क्षेत्र में अपना आश्रम चलाने वाले कमलेश अधिकारी के वीडियोज पर पड़ी। कमलेश खुद को बड़ा आध्यात्मिक गुरू और अघोरी साधना का ज्ञाता बताता था। यूट्यूब के जरिए ही दोनों भाइयों का उससे संपर्क बन गया। जब कमलेश ने भाइयों की पूरी कहानी सुनी, तो उसने समझ लिया कि उसे मिला एक आसान शिकार।
भय और अंधविश्वास का खेल: गुप्तधन और अतृप्त आत्माओं का डर
कमलेश अधिकारी ने पहले तो दोनों भाइयों को भयभीत किया। उसने उन्हें बताया कि उनके माता-पिता की अचानक मौत का कारण कोई सामान्य बीमारी नहीं, बल्कि उनके परिवार पर पिछले जन्म का भारी पाप है। उसने यह भी दावा किया कि उनकी खेती की जमीन के नीचे एक विशाल ‘गुप्तधन’ दबा हुआ है और उस धन की रक्षा अतृप्त और खतरनाक आत्माएं कर रही हैं। कमलेश ने डराया कि उन्हीं आत्माओं ने उनके माता-पिता की जान ली और अगर जल्दी कोई उपाय नहीं किया गया, तो अब दोनों भाइयों की भी मौत हो सकती है।
श्मशान घाट पर हुई खौफनाक ‘अघोरी पूजा’
डर के माहौल में भाईयों की समझ पूरी तरह ठिकाने लग गई। कमलेश ने दोष निवारण के नाम पर उन्हें उज्जैन ले जाने का प्लान बनाया। यहां एक श्मशान भूमि में जलती चिताओं के पास चार दिनों तक खौफनाक अघोरी पूजा कराई गई। इस पूजा के दौरान विभिन्न पशुओं की बलि देने का भी आरोप लगाया गया है। इन तथाकथित धार्मिक अनुष्ठानों के नाम पर कमलेश ने दोनों भाइयों से करीब डेढ़ लाख रुपये नकद वसूल लिए।
शराब को प्रसाद बनाकर पिलाया, जबरदस्ती कराया घरेलू काम
उज्जैन के बाद भाइयों को नांदगांव तहसील के पिंपलखेड स्थित एक अन्य आश्रम में ले जाया गया। यहां भी उनके साथ अघोरी पूजा की गई, पशु बलि दी गई और चौंकाने वाली बात यह रही कि शराब को प्रसाद के रूप में पीड़ितों को पिलाया गया। इतना ही नहीं, त्र्यंबकेश्वर स्थित आश्रम में दोनों भाइयों को जबरदस्ती रोक लिया गया और उनसे मठ के घरेलू कामकाज तक करवाए गए। उन्हें दिनभर झाड़ू-पोंछा और सफाई का काम लेकर उसके गुलाम की तरह इस्तेमाल किया गया।
सबसे बड़ी ठगी: मठ निर्माण के नाम पर जमीन हड़पने का खेल
लेकिन इस पूरे खेल में सबसे चौंकाने वाला और सबसे बड़ा जुर्म तब सामने आया, जब जांच में पता चला कि कमलेश ने मठ निर्माण के नाम पर पीड़ित भाइयों की करीब दो एकड़ अमूल्य जमीन को धोखाधड़ी और बहला-फुसलाकर अपने और अपनी पत्नी के नाम करवा लिया। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस पूरे ठगी के खेल में कमलेश की पत्नी गौरी अधिकारी भी उसकी सहयोगी के रूप में सक्रिय रूप से शामिल थी। दोनों ने मिलकर इस जाल को साजा था।
अंनिस की पहल और पुलिस की सख्त कार्रवाई
लगातार हो रही ठगी, मानसिक प्रताड़ना और जमीन खोने के डर से तंग आकर आखिरकार दोनों भाइयों ने अपनी जान बचाने के लिए महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (अंनिस) के कार्यकर्ताओं से संपर्क किया। अंनिस ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया। अंनिस के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने पीड़ितों को साथ लेकर सीधे इंदिरानगर पुलिस थाने पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई।
प्रभारी पुलिस निरीक्षक मनोहर कारंडे ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई की। उन्होंने महाराष्ट्र में जादू-टोना और अंधविश्वास रोकने के लिए बने कड़े कानून (जादूटोना विरोधी कानून) के तहत कमलेश अधिकारी और उसकी पत्नी गौरी अधिकारी के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर दी है। पुलिस ने आरोपी ढोंगी बाबा को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की आगे की तफ्तीश सहायक पुलिस उपनिरीक्षक युवराज शिरसाठ की निगरानी में चल रही है, जिसमें आश्रम में हुई अन्य गतिविधियों और जमीन के लेन-देन की जांच शामिल है।
अंनिस ने दी यह अपील
इस कार्रवाई को अंजाम देने में अंनिस के डॉ. टी. आर. गोराणे, कृष्णा चांदगुडे, एडवोकेट बाबासाहेब ननावरे, अनुप खैरनार, महेंद्र दातरंगे, रंजन लोंढे और एडवोकेट सुशीलकुमार इंदवे जैसे समर्पित कार्यकर्ताओं की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है।
अंनिस ने समाज को सचेत करते हुए एक सलाहनीय अपील जारी की है। संगठन ने कहा है कि यदि किसी भी नागरिक ने ऐसे किसी ढोंगी बाबा, तांत्रिक या अघोरी के चक्कर में फंसकर ठगी का शिकार हुआ हो, या उसके साथ भय दिखाकर जमीन-जायदाद हड़पने का प्रयास हुआ हो, तो वह तुरंत अपने नजदीकी थाने या अंनिस के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करे। अंधविश्वास से खुद को दूर रखना ही इन ढोंगियों को नेस्तनाबूद करने का सबसे बड़ा हथियार है।























