The Marvels of Robotic Surgery News: चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में आए दिन हो रही तकनीकी प्रगति ने उन मामलों का इलाज संभव बना दिया है, जिन्हें पहले अत्यंत जोखिमपूर्ण या असंभव माना जाता था। इसी कड़ी में फोर्टिस हॉस्पीटल, नोएडा ने एडवांस रोबोटिक सर्जरी की अद्भुत क्षमताओं का परचम लहराते हुए, 61 वर्षीय एक महिला का जटिल और दुर्लभ गाइनीकोलॉजिकल केस सफलतापूर्वक संभाला है। इस मरीज को गर्भाशय की एक ऐसी दुर्लभ प्री-कैंसरस कंडीशन थी, जो किसी भी समय गंभीर कैंसर का रूप ले सकती थी। मरीज की उम्र और कई गंभीर बीमारियों के चलते यह सर्जरी एक ‘ओपन चैलेंज’ थी, लेकिन रोबोटिक तकनीक और डॉक्टरों की विशेषज्ञता ने इसे सफल बना दिया।
एक दुर्लभ और खतरनाक बीमारी: एंडोमीट्रियल हाइपरप्लासिया विद एटिपिया
मरीज को जब अस्पताल में लाया गया, तो उसकी स्थिति चिंताजनक थी। जांच में पता चला कि वह ‘एंडोमीट्रियल हाइपरप्लासिया विद एटिपिया’ (Endometrial Hyperplasia with Atypia) से पीड़ित है। यह एक प्रकार की प्री-कैंसरस कंडीशन है, जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी दीवार की कोशिकाएं असामान्य रूप से और बहुत तेजी से बढ़ने लगती हैं। यदि समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह आसानी से गर्भाशय कैंसर (यूट्राइन कैंसर) में बदल सकती है।
चिकित्सा आंकड़ों के मुताबिक, यह कंडीशन बेहद दुर्लभ है। दुनियाभर में 1,00,000 महिलाओं में से केवल 133 महिलाएं ही इस विकार से ग्रस्त पाई जाती हैं। यह आंकड़ा और भी भयावह हो जाता है जब हम यह जानते हैं कि लगभग 15 प्रतिशत पोस्ट-मेनोपॉजल (रजोनिवृत्ति के बाद की) महिलाओं को यह समस्या परेशान करती है। इस मरीज के मामले में भी वह 6 साल पहले मेनोपॉजल हो चुकी थीं, लेकिन पिछले एक साल से उन्हें अनियमित ब्लीडिंग हो रही थी, जो इस गंभीर बीमारी का संकेत था।
मोटापा और गंभीर बीमारियों ने बढ़ाई इलाज की मुश्किलें
इस सर्जरी को और भी चुनौतीपूर्ण बनाती थी मरीज की शारीरिक स्थिति। 61 वर्षीय इस महिला का वजन 115 किलोग्राम और बीएमआई (BMI) 45 था, जो गंभीर मोटापे की श्रेणी में आता है। केवल मोटापा ही नहीं, बल्कि वह टाइप 2 डायबिटीज, हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप), और कोरोनरी आर्टरी डिजीज (हृदय की धमनियों की बीमारी) से भी जूझ रही थीं।
डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी दुविधा यह थी कि पारंपरिक ‘ओपन सर्जरी’ (जिसमें केटे का बड़ा चीरा लगाना पड़ता है) करना इतनी अधिक बीमारियों से ग्रस्त मरीज के लिए जानलेवा हो सकता था। मोटापे के कारण घाव भरने में देरी होती है और संक्रमण का खतरा बहुत बढ़ जाता है। वहीं, सामान्य लैप्रोस्कोपिक सर्जरी (लेजर सर्जरी) भी इतनी ज्यादा चर्बी के कारण तकनीकी रूप से असंभव थी, क्योंकि पेट के अंदर कैमरे और उपकरणों तक पहुंच बनाना बेहद मुश्किल था।
रोबोटिक सर्जरी: एक ‘गेम-चेंजर’ साबित हुआ
मरीज की जान बचाने और कैंसर बनने से पहले ही इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए, फोर्टिस नोएडा की मेडिकल टीम ने एक बड़ा फैसला किया। डॉ. अंजना सिंह (डायरेक्टर-ऑब्सटेट्रिक्स एंड गाइनीकोलॉजी) के नेतृत्व में टीम ने तय किया कि अब वक्त आ गया है जब ‘रोबोटिक असिस्टेड हिस्टेरेक्टॉमी’ का सहारा लिया जाए।
रोबोटिक सर्जरी इस मामले में वरदान साबित हुई। इस तकनीक में सर्जन को 10 गुना ज्यादा मैग्निफाइड (बड़ा) 3डी व्यू मिलता है और रोबोटिक आर्म्स का उपयोग करके वे मानव हाथों से संभव न होने वाली कोणों (angles) पर ऑपरेशन कर सकते हैं। इससे मरीज के पेट पर काफी कम चीरा लगता है, खून का बहाव न के बराबर होता है और दर्द भी बहुत कम होता है।
सफल सर्जरी और तेज रिकवरी
यह ऑपरेशन लगभग 2 घंटे तक चला। इस दौरान डॉ. अंजना सिंह और उनकी टीम ने न केवल गर्भाशय (यूट्रस) को निकाला, बल्कि सावधानी वश दोनों डिंबग्रंथियों (ओवरीज) और फैलोपियन ट्यूब को भी हटा दिया, ताकि भविष्य में कैंसर का कोई खतरा न रहे।
मरीज की हृदय संबंधी समस्याओं और भारी वजन को देखते हुए सर्जरी के बाद उन्हें एक दिन के लिए आईसीयू (Intensive Care Unit) में रखा गया, ताकि उनके ऑक्सीजन स्तर और हृदय गति पर बारीकी से नज़र रखी जा सके। लेकिन रोबोटिक सर्जरी के फायदों के चलते, मरीज ने तेजी से रिकवरी किया। सर्जरी के महज पांच दिन बाद ही जब वह पूरी तरह से स्थिर और दर्द-मुक्त हो गईं, तो उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
विशेषज्ञों की राय
इस अद्भुत सफलता पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. अंजना सिंह, डायरेक्टर, ऑब्सटेट्रिक्स एंड गाइनीकोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा ने कहा, “यह तकनीकी रूप से हमारे करियर की सबसे जटिल सर्जरी में से एक थी। मरीज का बीएमआई 45 था और उन्हें हृदय रोग जैसी गंभीर समस्याएं थीं। पेट पर जमी अत्यधिक चर्बी के कारण सर्जिकल फील्ड तक पहुंचना बेहद मुश्किल था। अगर हम पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करते, तो रिस्क काफी ज्यादा होता।”
उन्होंने आगे बताया, “रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी ने इस पूरे मामले में ‘गेम-चेंजर’ की भूमिका निभाई। इस टेक्नोलॉजी की वजह से हमें वह सटीकता मिली जो इस केस की जरूरत थी। यह मामला साबित करता है कि आधुनिक चिकित्सा तकनीक के सहारे हम उन मरीजों का भी सफल इलाज कर सकते हैं, जिनके लिए पहले सर्जरी असंभव मानी जाती थी।”























