संध्या समय न्यूज
कानपुर और कानपुर देहात के बाद अब नोएडा के रजिस्ट्री सिस्टम में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। आयकर विभाग ने नोएडा के सब-रजिस्ट्रार कार्यालय पर अचानक छापा मारा, जिसमें करीब 3,035 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ है। इस औचक कार्रवाई से कार्यालय में मौजूद अधिकारियों, कर्मचारियों और एजेंटों के होश उड़ गए।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, आयकर विभाग की टीम ने शुक्रवार सुबह नोएडा स्थित रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचकर डिजिटल डेटा, भौतिक दस्तावेजों और पुराने रिकॉर्ड की गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान विभाग को कई संपत्तियों की रजिस्ट्री में गंभीर खामियां मिलीं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कई दस्तावेजों में अमान्य, अधूरे या गलत पैन (PAN) नंबर दर्ज पाए गए, जबकि कुछ मामलों में तो पैन नंबर दर्ज ही नहीं किया गया था। ऐसे बड़े वित्तीय लेनदेन में पैन नंबर अनिवार्य होने के बावजूद इसकी अनदेखी करने के संकेत मिले हैं। अधिकारियों को आशंका है कि इन गड़बड़ियों के जरिए बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की गई है। जब टीम ने मौके पर मौजूद लोगों से इस संबंध में सवाल पूछे, तो वे कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।
जांच टीम में शामिल अधिकारी
इस संवेदनशील मामले की जांच के लिए आयकर विभाग ने एक विशेष टीम का गठन किया था, जिसमें ये प्रमुख अधिकारी शामिल रहे संयुक्त निदेशक डॉ. विजय सिंह, आयकर अधिकारी सुधीर कुमार, निरीक्षक आनंद कुमार और तेज बहादुर मिश्रा और स्टाफ सदस्य मनीष कुमार टीम ने रिकॉर्ड की गहन जांच कर कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं।
विभाग ने पहले भी भेजे थे नोटिस
सूत्रों का कहना है कि आयकर विभाग ने पहले भी रजिस्ट्री कार्यालय को रिकॉर्ड सुधारने और दोषपूर्ण पैन नंबरों को ठीक करने के लिए कई बार नोटिस जारी किए थे, लेकिन कार्यालय प्रशासन ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। अब विभाग इसे गंभीर लापरवाही मान रहा है और आशंका जताई जा रही है कि यह जानबूझकर की गई चोरी हो सकती है।
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आगे की कार्रवाई और असर
कानपुर के बाद नोएडा में इस तरह की गड़बड़ी सामने आने से पूरे प्रदेश के रजिस्ट्री विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अगर जांच में गड़बड़ियों की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और दस्तावेज तैयार करने वाले एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। संकेत मिल रहे हैं कि आयकर विभाग अब जिले के अन्य सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों के रिकॉर्ड की भी जांच कर सकता है, ताकि संपत्ति लेनदेन के वास्तविक आंकड़े सामने आएं और टैक्स चोरी पर अंकुश लगाया जा सके।
























