Noida News: नोएडा में अब दिशा-निर्देश बोर्ड खुद ही राहत की बात बन गए हैं। यह बोर्ड, जो कभी शहर की सड़कों पर यात्रियों, वाहन चालक और आपातकालीन सेवाओं के लिए मार्गदर्शन का काम करते थे, आज बदहाली का प्रतीक बन चुके हैं। इन बोर्डों की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि न तो ये सही तरीके से संकेत दे पा रहे हैं और न ही शहर की सड़कों पर यातायात व्यवस्था को सुगम बना पा रहे हैं।
क्षतिग्रस्त और उपेक्षित दिशा-निर्देश बोर्ड
नोएडा के कई सेक्टरों में, जिनमें सेक्टर 15, 27, 41, 55, 100, 104, 62, 70, 74, 77, 93 और 137 शामिल हैं, इन दिशा-निर्देश बोर्डों की हालत जर्जर हो चुकी है। कई बोर्ड पोल से टूटकर जमीन पर पड़े हैं, जबकि अनेक बोर्ड जंग की चपेट में आ गए हैं। इन पर लगा रंग फिका हो चुका है और लिखावट लगभग मिट चुकी है, जिससे इनका उद्देश्य ही समाप्त हो गया है। कई जगहों पर तो बोर्ड तो हैं, लेकिन उनका उपयोगिता शून्य हो चुका है। इन्हें देखकर यह समझना मुश्किल है कि पहले ये किस रास्ते का संकेत देते थे।
नोएडा प्राधिकरण ने इन दिशा-निर्देश बोर्डों को लगाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए थे। इन बोर्डों का उद्देश्य था यात्रियों को सही मार्गदर्शन देना और शहर में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाना। लेकिन समय के साथ इन बोर्डों की देखभाल और रखरखाव में लापरवाही बरती गई। परिणामस्वरूप, अधिकांश बोर्ड जर्जर हो गए और उनका कोई लाभ नहीं रह गया। शहर के विकास के साथ-साथ इन बोर्डों का मरम्मत और पुनर्स्थापना भी जरूरी थी, लेकिन प्राधिकरण की उदासीनता के कारण ये खामोशी से अपनी उपयोगिता खोते गए।
जनता और आपातकालीन सेवाओं को हो रही परेशानी
अधिकांश सेक्टरों में क्षतिग्रस्त दिशा-निर्देश बोर्डों की वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नई जगहों पर आने वाले यात्रियों और राहगीरों के लिए सही दिशा का पता नहीं चल पा रहा है। खासतौर पर, आपातकालीन सेवाओं के लिए यह स्थिति खतरनाक साबित हो रही है। एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन सेवाएं जब सही स्थान तक नहीं पहुंच पाती हैं, तो यह मानव जीवन के लिए खतरा बन जाता है। कई बार शिकायतें भी प्राधिकरण को भेजी गई हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई अभी तक देखने को नहीं मिली है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे वर्षों से इन क्षतिग्रस्त बोर्डों को ठीक कराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले हैं। सेक्टर 55 के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष सत्यनारायण का कहना है कि यदि समय रहते इन बोर्डों की मरम्मत हो जाती, तो लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति को नुकसान से बचाया जा सकता था। वहीं, सेक्टर 74 के अध्यक्ष वीके गुप्ता कहते हैं कि यह सरकारी धन की बर्बादी है कि इतने खर्च के बावजूद इन बोर्डों की देखभाल नहीं हो सकी।
अधिकारियों का प्रयास और दिशा-निर्देश
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जा रहा है। इंदु प्रकाश सिंह, ओएसडी, नोएडा प्राधिकरण ने बताया कि संबंधित विभाग को निर्देश दे दिए गए हैं और इस विषय में विस्तृत जानकारी मांगी गई है। उनका कहना है कि जल्द ही इन बोर्डों की मरम्मत और पुनर्स्थापना का काम शुरू किया जाएगा ताकि शहर में यातायात व्यवस्था बेहतर बनाई जा सके।
शहर के नागरिकों और अधिकारियों का मानना है कि इन दिशा-निर्देश बोर्डों का पुनर्निर्माण और नियमित रखरखाव बेहद जरूरी है। इससे न केवल यातायात व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि शहर की छवि भी बेहतर बनेगी। इसके साथ ही, अधिकारियों को चाहिए कि वे इन बोर्डों की नियमित जांच और मरम्मत का कार्य सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति न बने।
























