विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि आने वाले दशकों में भारत की प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि वे ज्ञान को कितनी प्रभावी रूप से समाज, उद्योग और सरकार के लिए समाधानों में बदल पाते हैं। इसी जिम्मेदारी और दृष्टि को आगे बढ़ाते हुए गिटम यूनिवर्सिटी ने 4 से 6 मार्च 2026 तक सीएआर 2026 (कॉन्क्लेव ऑन अकादमिक रिसर्च) का सफल आयोजन किया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण और उद्देश्य
गिटम स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की ओर से आयोजित इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य मूलभूत अनुसंधान, उद्योग की जरूरतों और भविष्य की प्रतिभाओं के विकास के बीच संबंधों को मजबूत करना था। इस मंच पर शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और उद्योग विशेषज्ञों ने कंप्यूटिंग तथा उससे जुड़े क्षेत्रों में उभरते विकास पर गहन चर्चा की।
प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने किया उद्घाटन
उद्घाटन सत्र में कई विशिष्ट मेहमानों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसमें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के प्रोफेसर डॉ. बी. सुंदर राजन, एल एंड टी टेक्नोलॉजी सर्विसेज के ग्लोबल प्रैक्टिस हेड – मोबिलिटी डॉ. गुरु प्रसाद ए. एस., और गिटम यूनिवर्सिटी के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. बसवराज जी. के. प्रमुख वक्ताओं के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में गिटम के संकाय नेतृत्व ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिनमें स्कूल के निदेशक प्रो. वामसीधर वाई., प्रोफेसर प्रो. आई. जीना जैकब, और डीन प्रो. एस. अरुण कुमार शामिल थे। प्रो. मोहन के. जी. ने सीएआर 2026 के समन्वयक के रूप में इस कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
तकनीकी सत्र और मुख्य विषय
तीन दिनों तक चले इस कार्यक्रम में विद्वतापूर्ण चर्चाओं और तकनीकी सत्रों का आयोजन हुआ, जहां शोधकर्ताओं ने कंप्यूटिंग सिस्टम, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, इंटेलिजेंट मोबिलिटी और अन्य संबंधित तकनीकी क्षेत्रों में हो रहे समकालीन विकास पर अपने शोध प्रस्तुत किए। इन सत्रों का मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना था कि अकादमिक अनुसंधान वास्तविक तकनीकी चुनौतियों का समाधान प्रदान कर सके और प्रयोगशालाओं के शोध व्यावहारिक उपयोग में आ सकें।
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विश्वविद्यालयों की बदलती भूमिका
गिटम यूनिवर्सिटी चार दशकों से अधिक समय से ईमानदारी, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी से प्रेरित ज्ञान की खोज पर केंद्रित है। हाल के वर्षों में विश्वविद्यालय ने बहुविषयक अनुसंधान सहयोग और उद्योग व वैज्ञानिक संस्थानों के साथ मजबूत सहभागिता पर जोर दिया है। डिजिटल परिवर्तन, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और वैज्ञानिक नवाचार जैसे क्षेत्रों में भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकताएं अब विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग पर निर्भर हैं। सीएआर 2026 जैसे मंचों के माध्यम से गिटम इन संबंधों को मजबूत बनाने और दीर्घकालिक राष्ट्रीय प्रगति के लिए आवश्यक बौद्धिक और तकनीकी आधार तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है।

























