संध्या समय न्यूज
Mumbai News : मानसून के मौसम के करीब आने के साथ ही बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की चिंताएं बढ़ गई हैं। शहर में बाढ़ जैसी स्थिति से बचाने वाली मीठी नदी की सफाई का काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है। नदी से गाद निकालने के लिए बीएमसी को अभी तक कोई ठेकेदार नहीं मिल पाया है, जिससे पूरी परियोजना अधर में लटकी हुई है।
तीन बार बढ़ाई गई तारीख, फिर भी कोई हकदार नहीं मिला
मीठी नदी की सफाई के लिए बीएमसी ने तीन चरणों में काम करने का फैसला किया था। इसके लिए 28 फरवरी को टेंडर निकाले गए थे, लेकिन 11 मार्च तक किसी भी ठेकेदार ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद प्रशासन ने तारीख बढ़ाकर 17 मार्च कर दी, लेकिन तब भी कोई बोलीदाता सामने नहीं आया। अब अंतिम उपाय के तौर पर टेंडर की तारीख 24 मार्च तक बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि अगर इस बार भी ठेकेदार नहीं मिला, तो बीएमसी खुद ही सफाई अभियान चलाएगी।

स्टैंडिंग कमेटी में हंगामा, प्रशासन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप
इस मुद्दे को लेकर बुधवार को बीएमसी की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। नगरसेवकों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पूछा कि अगर ठेकेदार नहीं मिल रहे हैं तो प्रशासन की वैकल्पिक योजना क्या है? कांग्रेस के नगरसेवक अशरफ आजमी ने चेतावनी दी कि अगर आने वाले मानसून में शहर जलमग्न हुआ, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी बीएमसी प्रशासन की होगी।
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वहीं, एमआईएम के नगरसेवक जमीर कुरैशी ने प्रशासन को घेरते हुए कहा कि पिछले घोटालों के कारण ठेकेदार डर के मारे आगे नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि मीठी नदी अब ‘तीखी नदी’ बन गई है। कांग्रेस की पार्षद डॉ. सईदा खान ने 2005 की त्रासदी का हवाला देते हुए समय रहते काम शुरू करने की मांग की।
पिछले घोटाले की छाया
सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2025 में मीठी नदी के गाद निकालने के मामले में 65 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश हुआ था, जिसमें बीएमसी के अधिकारियों और ठेकेदारों को गिरफ्तार किया गया था। इस रिकॉर्ड को देखते हुए ठेकेदार इस बार ठेका लेने से कतरा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि टेंडर की शर्तों में हाल ही में ढील दी गई है, लेकिन पर्याप्त समय न मिलने के कारण लोग आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
बीएमसी का बचाव
बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर ने बताया कि मानसून की तैयारियों के तहत नाला सफाई का काम शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा, “छोटे नालों की सफाई वार्ड स्तर पर की जा रही है, जबकि बड़े नालों को 6 जोन में बांटा गया है। सफाई कार्यों की रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए डैशबोर्ड लगाया जाएगा और 31 मई तक सारा काम पूरा किया जाएगा।” स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने अधिकारियों को अगली बैठक में विस्तृत जानकारी पेश करने के निर्देश दिए हैं।





















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