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योगी आदित्यनाथ के बयान से सहमत हुए मौलाना रजवी

UP News:मौलाना रजवी ने समझाया कि मुसलमान शांति और सुकून हासिल करने के लिए मस्जिद या घर में नमाज अदा करता है। शरियत के मुताबिक, अगर भीड़ बढ़ जाए तो इमाम बदलकर दूसरी, तीसरी, चौथी या पांचवीं जमात (शिफ्ट) में नमाज पढ़ने की व्यवस्था की जाती है।

योगी सरकार के निर्देशों पर मुस्लिम धर्मगुरु की मुहर

HIGHLIGHTS

  • बकरीद से पहले मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का बड़ा बयान
  • सड़कों पर नमाज पर योगी सरकार का समर्थन
  • बोले- मस्जिदों में शिफ्ट से पढ़ें नमाज
  • मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने दी नसीहत
  • सार्वजनिक जगहों पर न करें कुर्बानी

UP News: ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने सोमवार को बरेली में एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर अपनी सहमति जताई, जिसमें उन्होंने सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ने की बात कही थी। मौलाना रजवी ने कहा कि इस्लामी शरियत में भी भीड़ को देखते हुए ‘शिफ्ट’ सिस्टम की व्यवस्था है, ताकि किसी भी प्रकार का ट्रैफिक बाधित न हो और आम जनता को परेशानी न हो।

आगामी 28 तारीख को ईद-उल-अजहा (बकरीद) के त्योहार को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि नमाज सार्वजनिक स्थानों या सड़कों पर नहीं, बल्कि मस्जिदों और ईदगाहों में ही ‘शिफ्ट’ से अदा की जाए। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने इस बयान का समर्थन करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का यह बयान खुद इस्लाम के सिद्धांतों के अनुरूप है।

शरियत में है शिफ्ट की व्यवस्था, ट्रैफिक नहीं रोकने का हुक्म

मौलाना रजवी ने समझाया कि मुसलमान शांति और सुकून हासिल करने के लिए मस्जिद या घर में नमाज अदा करता है। शरियत के मुताबिक, अगर भीड़ बढ़ जाए तो इमाम बदलकर दूसरी, तीसरी, चौथी या पांचवीं जमात (शिफ्ट) में नमाज पढ़ने की व्यवस्था की जाती है।” उन्होंने आगे कहा कि इसका मकसद यही है कि सड़कों पर जाम न लगे और किसी आम राहगीर को परेशानी न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी मुसलमान जानबूझकर सड़क पर नमाज नहीं पढ़ता, क्योंकि इबादत में ‘खुशू’ और ‘खुजू’ (एकाग्रता और शांति) जरूरी है, जो सड़क पर संभव नहीं है।

कुर्बानी को लेकर जारी किए गए विशेष दिशा-निर्देश

बकरीद के मौके पर कुर्बानी को लेकर भी मौलाना ने समाज के लिए कुछ महत्वपूर्ण गाइडलाइन जारी कीं। उन्होंने कहा कि हालांकि कुर्बानी एक पुरानी परंपरा है और पूरे शान-शौकत के साथ होगी, लेकिन इसके लिए सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

उनकी ओर से जारी गाइडलाइन में मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  1. निजी स्थान पर ही कुर्बानी: लोगों से अपील की गई है कि वे सार्वजनिक सड़कों, गलियों, चौराहों या खुले में कुर्बानी बिल्कुल न करें। कुर्बानी केवल अपने घरों या निजी स्थानों पर ही की जाए।
  2. आपत्ति से बचाव: कुर्बानी करने वाली जगह को चारों ओर से ढका हुआ होना चाहिए, ताकि बाहर से गुजरने वाले किसी भी व्यक्ति को इससे कोई आपत्ति न हो।
  3. सफाई और अवशेषों का निस्तारण: मौलाना ने हिदायत दी कि कुर्बानी के बाद जानवर के बचे हुए अवशेषों (अपशिष्ट) को वहीं पर गड्ढा खोदकर दफन कर दिया जाए। इससे सफाई बनी रहेगी और किसी को कोई शिकायत नहीं होगी।
  4. प्रतिबंधित पशुओं पर रोक: उन्होंने मुस्लिम समाज से पुरजोर अपील की है कि सरकार द्वारा प्रतिबंधित किसी भी पशु की कुर्बानी न की जाए। कानून व्यवस्था और साफ-सफाई का ध्यान रखना सबकी जिम्मेदारी है।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि इस्लाम एक शांति प्रिय धर्म है और यह ‘आराम फरमान’ करता है। सरकार की कानून व्यवस्था और सफाई व्यवस्था में सहयोग करना हर मुसलमान का फर्ज है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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