Delhi News: दक्षिण दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास शनिवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया, जब सैदुलाजाब इलाके में एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इस घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग दहशत में आ गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार मलबे के नीचे कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अभी तक आधिकारिक रूप से कुल प्रभावित लोगों की संख्या की पुष्टि नहीं हो सकी है।
घटना कैसे हुई
जानकारी के अनुसार यह हादसा शाम करीब 7:44 बजे हुआ, जब इमारत अचानक गिरने लगी और कुछ ही पलों में पूरी संरचना मलबे के ढेर में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इमारत इतनी तेजी से गिरी कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ ही सेकंड में वहां कंक्रीट, ईंटों और लोहे की सरियों का बड़ा ढेर बन गया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि हादसे के बाद तेज आवाज सुनाई दी, जिसके बाद आसपास के लोग तुरंत मौके की ओर दौड़ पड़े। कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट और टॉर्च की मदद से रेस्क्यू टीम को रास्ता दिखाने में सहायता की।
रेस्क्यू ऑपरेशन तुरंत शुरू
घटना की सूचना मिलते ही फायर डिपार्टमेंट और राहत दल तुरंत मौके पर पहुंच गए। फायर सर्विसेज को पहली कॉल लगभग 7:44 बजे प्राप्त हुई थी, जिसके बाद कुछ ही समय में कई दमकल गाड़ियां और राहत वाहन घटनास्थल पर भेजे गए।
रात का समय होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में कठिनाइयां आईं, जिसके चलते एक वाटर टेंडर के साथ-साथ लाइट वैन भी भेजी गई ताकि मलबे में रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था हो सके। राहत कार्य फिलहाल तेजी से जारी है और मलबा हटाने का काम मशीनों और हाथों दोनों की मदद से किया जा रहा है।
अब तक 4 लोगों को बचाया गया
प्रारंभिक राहत कार्य में रेस्क्यू टीम ने मलबे से कम से कम चार लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। इन सभी को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। हालांकि उनकी स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
अधिकारियों के अनुसार, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मलबे के अंदर और कितने लोग फंसे हो सकते हैं, लेकिन आशंका है कि संख्या अधिक हो सकती है क्योंकि घटना के समय इमारत में लोग मौजूद थे।
निर्माणाधीन इमारत और कोचिंग सेंटर की जानकारी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जिस इमारत में हादसा हुआ वह पूरी तरह तैयार नहीं थी। ग्राउंड फ्लोर पर एक कोचिंग इंस्टीट्यूट चल रहा था, जबकि ऊपरी मंजिलों पर निर्माण कार्य जारी था। इसी कारण यह आशंका जताई जा रही है कि हादसे के समय कोचिंग में छात्र और ऊपर निर्माण कार्य में लगे मजदूर मौजूद हो सकते हैं। हालांकि, प्रशासन ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
राहत कार्य में चुनौतियां
सैदुलाजाब इलाके की गलियां संकरी होने के कारण राहत कार्य में काफी बाधाएं आ रही हैं। बचाव दल को घटनास्थल तक उपकरण और भारी मशीनें पहुंचाने में कठिनाई हो रही है। इसके बावजूद फायर ब्रिगेड और रेस्क्यू टीम लगातार मलबे को हटाने का काम कर रही है।
स्थानीय प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया है और लोगों से अपील की है कि वे घटनास्थल पर अनावश्यक रूप से एकत्र न हों, ताकि राहत कार्य बिना किसी रुकावट के चल सके।
प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर
घटना के तुरंत बाद डिवीजनल ऑफिसर (DO) रविंदर सिंह, एडीओ संतोष कुमार और एसटीओ फूल सिंह मीणा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। पूरी रेस्क्यू टीम उनकी देखरेख में काम कर रही है।
प्रशासन ने आसपास की इमारतों की भी जांच शुरू कर दी है ताकि किसी अन्य संभावित खतरे को रोका जा सके। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
स्थानीय लोगों की मदद
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने भी राहत कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कई लोग अपने स्तर पर पानी, रोशनी और प्राथमिक सहायता सामग्री लेकर पहुंचे और बचाव टीम की मदद की। संकरी गलियों के बावजूद लोगों ने रास्ता खाली कराने में भी सहयोग किया।
जांच के आदेश संभव
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, हादसे के कारणों की जांच की जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि निर्माण कार्य के दौरान किसी तरह की लापरवाही तो नहीं बरती गई। शुरुआती तौर पर संरचनात्मक कमजोरी या निर्माण नियमों के उल्लंघन की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और मलबे के हर हिस्से की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक पूरा मलबा हटाकर गहन जांच नहीं कर ली जाती, तब तक स्थिति को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है।





















