उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में एक बार फिर से बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सहारनपुर से कांग्रेस के दिग्गज नेता और सांसद इमरान मसूद के दामाद शायान मसूद ने पार्टी का दामन छोड़ दिया है। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) की सदस्यता ग्रहण की है। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने यूपी के पश्चिमी क्षेत्र की सियासत में हलचल मचा दी है। शायान मसूद ने कांग्रेस को अलविदा कहने और सपा का रुख करने के पीछे की कई अनसुनी वजहें और अपनी भविष्य की रणनीति को विस्तार से साझा किया है।
भाजपा को हराना ही असली मकसद, कुर्सी की नहीं है चिंता
शायान मसूद ने अपने इस बड़े फैसले को लेकर स्पष्ट किया कि उनकी राजनीति किसी विशेष पद या सत्ता के लालच पर आधारित नहीं है। उनका एकमात्र और सबसे बड़ा लक्ष्य उत्तर प्रदेश में भाजपा को रोकना है। उन्होंने कहा कि 2027 का आगामी विधानसभा चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरी तरह से ताक पर रखकर भाजपा को परास्त करने को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
क्यों चुना समाजवादी पार्टी का रास्ता?
जब सवाल उठा कि देश में कांग्रेस को ही प्रमुख विपक्ष माना जाता है, तो ऐसे में यूपी में सपा का क्यों रुख किया? इस पर शायान ने बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। 2022 के विधानसभा चुनावों और हालिया 2024 के लोकसभा चुनावों के नतीजों को देखें तो साफ जाहिर होता है कि यूपी में भाजपा को असली और सबसे कड़ी चुनौती सपा ही दे रही है। उनका मानना है कि मौजूदा समय में राज्य में बीजेपी को सत्ता से हटाने की सबसे अधिक क्षमता अखिलेश यादव की पार्टी के पास मौजूद है, इसलिए यह कदम उठाया गया है।
परिवार और विचारधारा के बीच तालमेल की कमी?
सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि जब उनसे उनके ससुर और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बारे में सवाल पूछा गया, तो शायान ने स्पष्ट किया कि दोनों के बीच राजनीतिक और वैचारिक दृष्टिकोण में अंतर है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि परिवार की रिश्तेदारी और राजनीतिक सोच अलग-अलग हो सकती है। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने पारिवारिक कर्तव्य के नाते इमरान मसूद की जीत के लिए पूरी ताकत से मैदान में काम किया था। लेकिन अब जब बात राज्य की राजनीति और 2027 के लक्ष्य की है, तो उन्होंने अपने विचारों के अनुरूप रास्ता चुना है।
युवाओं, किसानों और प्रशासनिक ज्यादती बनी कांग्रेस छोड़ने की वजह
शायान मसूद ने अपने इस सियासी सफर के पीछे कई ऐसे मुद्दे गिनाए, जिन्होंने उन्हें आंतरिक रूप से झकझोर दिया। युवाओं का गुस्सा राज्य सरकार पर लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों और बेरोजगारी को लेकर सरकार की नाकामी को कड़ी चोट पहुंचाई। उन्होंने कहा कि सड़कों पर उतरे युवाओं की आवाज को कोई नहीं सुन रहा।
आज लखनऊ में सहारनपुर के श्री शादान मसूद जी, श्री शायान मसूद जी एवं उनके साथियों ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने के उपरांत माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी से शिष्टाचार मुलाक़ात की। pic.twitter.com/HaRGoZWxyc
— Samajwadi Party (@samajwadiparty) August 20, 2026
किसान आंदोलनमें आ रही चुनौतियों और किसान आंदोलनों के दौरान सरकार के रवैये ने भी उन्हें विचार करने पर मजबूर किया। उन्होंने स्थानीय स्तर पर सहारनपुर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद से जुड़े कुछ युवाओं के खिलाफ प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई को ज्यादती बताया। उनका कहना है कि इस तरह के माहौल ने उनके भीतर के कार्यकर्ता को और अधिक आक्रामक बना दिया, जिसके लिए उन्हें एक बड़े और मजबूत चेहरे की तलाश थी।
अखिलेश यादव पर भरोसा और 2027 की तैयारी
समाजवादी पार्टी में उनके शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि वह तुरंत कोई टिकट मांग रहे हैं। शायान ने साफ शब्दों में कहा कि 2027 के चुनाव में पार्टी जिस भी भूमिका या जिम्मेदारी के साथ उन्हें मैदान में उतारे, वह उसे निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्हें अखिलेश यादव की नेतृत्व क्षमता पर पूरा विश्वास है। उन्होंने कहा कि चाहे गठबंधन के समीकरण कैसे भी रहें, वह पार्टी के हर फैसले का सम्मान करेंगे, क्योंकि उनका अंतिम लक्ष्य केवल एक है— ‘2027 में भाजपा को हराना’।

























