ऋषी तिवारी
आप पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने देश में गहराते एलपीजी (LPG) संकट पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी राजनीतिक बहस का विषय नहीं, बल्कि हर घर की व्यापक परेशानी से जुड़ा है।
उत्पादन में 50% गिरावट, बिगड़ते हालात
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि देश में एलपीजी का उत्पादन लगभग 50 प्रतिशत तक घट चुका है, जिसके कारण हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रसोई गैस जैसी बुनियादी जरूरत भी अब आम लोगों को आसानी से उपलब्ध नहीं हो रही है। इस कमी का सबसे गहरा असर आम जनता और छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है।
छोटे कारोबारों पर संकट के बादल
पूर्व सीएम ने स्थिति को विस्तार से समझाते हुए कहा कि होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, क्लाउड किचन और छोटे फूड कारोबार पूरी तरह से एलपीजी पर निर्भर करते हैं। सरकार के आदेश के बाद कई जगहों पर इन्हें सिलेंडर ही नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे महानगरों में हजारों छोटे कारोबार बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं, जहां कई जगहों पर महज 2 से 4 दिन का ही गैस स्टॉक बचा है।
लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी पर खतरा
इस संकट के गंभीर आर्थिक प्रभाव को रेखांकित करते हुए आप नेता ने कहा कि फूड इंडस्ट्री और उससे जुड़े कारोबारों में काम करने वाले बड़ी संख्या में लोग बेरोजगारी के डर में जी रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही इसका समाधान नहीं निकाला गया, तो लाखों परिवारों की आय का स्रोत खत्म हो सकता है, जो सीधे तौर पर लोगों की रोज़ी-रोटी पर खतरा मंडरा रहा है।
शादी का सीजन और सामाजिक संकट
केजरीवाल ने इस मुद्दे के सामाजिक पहलू को भी उठाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में शादी-ब्याह का सीजन चल रहा है। अगर गैस की आपूर्ति इसी तरह प्रभावित रही, तो लोगों को अपने पारिवारिक समारोह टालने पड़ सकते हैं। उनके मुताबिक यह स्थिति सिर्फ आर्थिक संकट तक सीमित नहीं है, बल्कि एक गंभीर सामाजिक संकट का रूप ले रही है।
गोविंदा-सुनीता की 39 साल पुरानी शादी में दरार? बेटी टीना ने खोला राज
सोशल मीडिया पर जनआक्रोश
उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी काफी गुंजाइश हुई है। #KejriwalOnLPGShortage ट्रेंड कर रहा है, जहां बड़ी संख्या में यूजर्स इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब रसोई गैस जैसी बुनियादी सुविधा दुर्लभ हो जाए, तो यह किसी राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि जनता का सवाल बन जाता है। लोग सरकार से जवाब मांग रहे हैं कि आखिर देश को एलपीजी की इतनी बड़ी कमी का सामना क्यों करना पड़ रहा है।




















