संध्या समय न्यूज
महाराष्ट्र की राजनीति में राज्यसभा चुनाव की धुंध छंटने के साथ ही सत्ता और विपक्ष के बीच एक ‘मौन कूटनीतिक समझौता’ सामने आया है, लेकिन इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के विलय की संभावनाओं पर पानी फिर गया है। शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता जयंत पाटील ने बड़ा खुलासा करते हुए साफ कर दिया है कि पार्टी के दो धड़ों का एक होना अब संभव नहीं है। इस घोषणा के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि सुप्रिया सुले और सुनेत्रा पवार अब अलग-अलग राजनीतिक रास्तों पर चलेंगी।
राज्यसभा चुनाव: बीजेपी की रणनीति और पवार का सम्मान
राज्य की सात सीटों के लिए होने वाले राज्यसभा चुनाव में अब निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ है। महायुति को छह और महाविकास आघाड़ी (MVA) को एक सीट मिलेगी। विपक्ष की ओर से शरद पवार को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद भाजपा ने सातवां उम्मीदवार न उतारने का फैसला किया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शरद पवार के संसदीय जीवन के 60 वर्ष पूरे होने के मद्देनजर भाजपा ने उनके सम्मान में ‘खिड़की’ खुली रखी है। यह कदम सुप्रिया सुले के प्रति भविष्य की संभावनाओं को लेकर भी एक संदेश माना जा रहा है।
अजित पवार के निधन के बाद टूटी विलय की कड़ी
NCP के विलय को लेकर उठ रही अटकलों पर जयंत पाटील ने पूरी तरह विराम लगाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों पार्टियों के विलय का विचार मूल रूप से अजित पवार का था। 28 जनवरी को विमान दुर्घटना में अजित पवार के असामयिक निधन के बाद वह कड़ी टूट गई, जो दोनों धड़ों को जोड़ने का काम कर रही थी। पाटील ने कहा, “जिस नेता के साथ विलय की बातचीत चल रही थी, जब वही इस दुनिया में नहीं रहे, तो मर्जर का सवाल ही पैदा नहीं होता।”
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सुप्रिया सुले के सामने नई चुनौतियां
अब जबकि विलय की बातचीत खत्म हो चुकी है, सुप्रिया सुले के सामने अपनी पार्टी को बिखरने से बचाने और एकजुट रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। कांग्रेस और शिवसेना (UBT) का समर्थन हासिल करने के बावजूद, शरद पवार गुट के पास केवल 10 विधायक होने के कारण सुप्रिया को अपनी साख साबित करनी होगी। राजनीतिक विश्लेषक दयानंद नेने के अनुसार, भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के जरिए अपना एजेंडा सेट कर दिया है। अब सुप्रिया सुले को यह साबित करना होगा कि वे बिना अजित पवार और बिना किसी विलय के अपने दम पर पार्टी को कैसे आगे ले जाती हैं।

























